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हिन्दी सिनेमा के संसार में बहुत नंगई है….

हिन्दी सिनेमा का संसार कितना खोखला, झूठा, धर्मान्ध और मौकापरस्त है, ये सोनू निगम वाले प्रकरण से साफ हो गया । हर मुसलमान कलाकार इस मुद्दे पर या तो खामोश रहा या उसने सोनू की मुखालफत की और कुछ तो गंदे, बेशर्म नासेह भी बने । किसी ने उसे नशाखोर बताया तो किसी ने रफी के कंठ की नकल से पैदा होने वाला पतित हिन्दू । सोनू निगम की धार्मिक छवि बेदाग रही है । उसने आज तक कभी धर्मविशेष पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन भोंपू बजाकर कान में अज़ान ठूंसनेवालों के लिए ये बात नागवार गुजरी कि सोनू सुबह-सुबह बजने वाले इस महान स्वर का विरोध करे ! सोनू इस दौर के सबसे विलक्षण प्रतिभासम्पन्न गायक हैं, जिसका म्यूजिक सेंस इस दौर के किसी भी छोटे-बड़े गायक से बहुत बेहतर है । उसे किसी भी बड़े गायक के गाने को गाते हुए सुनिये, चाहे वो रफी, किशोर, मन्ना डे येसुदास कोई भी हो.. वह हर स्वर के साथ न्याय करता है ।

लता से लेकर आशा, येसुदास, हरिहरन, सुरेश वाडेकर और न जाने कितने संगीतकारों, गायकों ने सोनू की तहेदिल से तारीफ़ की है । किसी भी गाने की बारीकी को, उसके स्वरभंग को चुटकियों में पकड़ना उसके बाएं हाथ का खेल है। एक लंबे समय तक सोनू ने हिन्दी सिनेमा के लिए कई मधुर गानों का गायन किया । लेकिन एक झटके में सब बेकार हो गया । साजिद वाजिद जैसे चोर संगीतकार जो चेंपकला में माहिर हैं..वो सोनू को डिसओन करता है, उसे नशेड़ी कहता है ! पूजा भट्ट के दोनों कानों में चर्च और मस्जिद का संगीत फिट बैठा है या उसके सिरहाने बैठकर सुबह-सुबह कोई चर्च की घंटी बजाता है और दूसरा अल्लाहो अकबर करता है ! और वो भारत की महान समवेशी सभ्यता में अपनी उनींदी आंखें खोलती हैं। एजाज़ खान जैसा टपोरी और आतंकी सोच वाला सोनू को नसीहत देता है कि मोहम्मद रफी को गाने वाले सोनू को उनके महान धर्म की भी इज्जत करनी चाहिए ।

दो कौड़ी के एजाज खान और उस जैसे टपोरियों को आंखें फाड़-फाड़ कर देखना चाहिए कि उसके धर्म की विश्व में कितनी इज्जत है ? हिन्दी सिनेमा में ऐसे ही नंगे, लफंगे, आतंकी सोच वाले तहजीबी कलाकार रहते हैं जो वक्त आने पर अपनी औकात दिखाते हैं । इस प्रकरण से साफ हो गया है कि सिनेमा की तथाकथित सेक्यूलर जमात निहायत ही धर्मान्ध है । वह पहले मुसलमान है फिर मनुष्य । वह इस्लाम के लिए छोटी-छोटी, नगण्य बातों पर वैसी ही प्रतिक्रिया देता है जैसी कि किसी मस्जिद का मौलाना । उस मौलवी के फतवे पर खामोश सिनेमाई जमात अपने मुर्दा होने की घोषणा कर चुका है । लाख देह बनाने वाले, बड़े-बड़े बॉडी बिल्डर हीरो आ जाएं, हैं सब शिखण्डी, औरतखोर !!!!!!!!!

देवांशु जी की वाल से साभार

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एन सी आर खबर ब्यूरो

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