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नव संवत्सर बदलेगा भाग्य, इंद्र योग, पंचक, कालसर्प योग के साथ आया प्रमादी संवत्सर,कोरोना का प्रभाव हो जायेगा कम : जानिये ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ से

नवसंवत्सर पंचक में शुरू हो रहा है। ऐसे में दो दिन यानि 26 मार्च तक पंचक का रहने से इसके असर में कमी ज्यादा नहीं दिखेगी। वहीं ग्रह योगों को देखते हुए इसके बाद यानि 27 से 28 मार्च के बीच से कोरोना में कमी आनी शुरु हो जाएगी।

कमी जरूर आएगी, लेकिन ये पूरी तरह से कंट्रोल में नहीं आएगा। चुंकि इसका असर 3 से 7 माह तक रहने की ओर ग्रह भी इशारा करते हैं, अत: ग्रहों की चाल कहती है कि कुछ माह सावधानी रखने के बाद लोगों के पुन: लापरवाह हो जाने से मई 2020 में एक बार फिर कोरोना का असर देखने को मिल सकता है।

जबकि पुन: जागरुक होने की स्थिति के चलते व राहु के नक्षत्र बदलने के साथ ही करीब मई के अंत से इसमे काफी कमी आनी शुरू हो जाएगी। जबकि सितंबर तक यह वायरस पूरी तरह से डिएक्टिवेट अवस्था में चला जा सकता है, इसका कारण ये है कि 20 सितंबर 2020 तक केतु धनु राशि में बना रहेगा।

ग्रहों के प्रभाव ने फैलाई महामारी

राहु इस समय आद्रा नक्षत्र में है, जो प्रलय का नक्षत्र माना जा रहा है। 20 मई 2020 तक वह इसी आद्रा नक्षत्र में रहेगा। वहीं 20 मई 2020 तक बृहस्पति उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, जो परेशानी पैदा करेगा।
29 मार्च को गुरु के मकर राशि में प्रवेश करते ही शनि-मंगल की युति होगी। ऐसे में चूंकि शनि अपने आने से पहले ही अपना असर दिखाना शुरू कर देता है, इसलिए मुमकिन है कि 27—28 मार्च 2020 से ही इस बीमारी का असर कम होने लगे। लेकिन यदि पंचक का असर कम रहा तो बीमारी में कमी की शुरुआत 26 मार्च से भी होने की संभावना है।

इस दौरान वायरस की शक्ति कमजोर पड़ेगी, जिससे उसके असर में कमी आएगी। वहीं 13 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से राहत बढ़ जाएगी। 4 मई को मंगल कुंभ राशि में प्रवेश करेगा जो काफी राहत भरा रहेगा। 20 मई को राहु नक्षत्र बदलेगा और इसके चलते वायरस का तकरीबन पूरा असर खत्म होता चला जाएगा।

कोरोना महामारी का अंत…इस महामारी का असर 3 से 7 महीने तक रहेगा ! परंतु नव संवत्सर 2078 के प्रारम्भ से इसका प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा अर्थात 25 मार्च 2020 से प्रारंभ हो है, इसी दिन से करोना का प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा ।

राहु का आर्द्रा नक्षत्र में संचार 11 सितम्बर 2019 से शुरू हुआ तथा यह 22 मई 2020 तक चलेगा। दूसरी तरफ भारत को चंद्रमा महादशा में शनि की अन्तरदशा 2 दिसम्बर 2019 से चल रही है। जोकि सरकार के सामने मानसिक रूप से चिन्ताएं पैदा कर रही हैं परन्तु शनि चूंकि वृष लगन के लिए योगकारक है, इसलिए इस महामारी में वह भारत को सुरक्षित रखेगा।
30 मार्च 2020 को बृहस्पति भारत की कुंडली में भाग्य भाव अर्थात 9वें भाव में आ जाएंगे, जिससे भारत को काफी राहत महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि राहु के संचार को अगर सही अर्थों में लिया जाए तो एक निर्माण या नई चीजों के अविष्कार को यह जन्म देगा, जिससे अंतत: मानवता का भला होगा। उन्होंने माना कि यह वर्ष आर्थिक तौर पर उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है परन्तु 2021 व 2022 वर्ष आर्थिक तौर पर देश के लिए अनुकूल सिद्ध होंगे।

नव संवत्सर क्या होता है?

सामान्य अर्थों में नव संवत्सर हिंदू कैलेंडर के नव वर्ष का पहला दिन होता है। हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि वर्ष प्रतिपदा कहलाती है। इस तिथि से यानी इस दिन से नया वर्ष प्रारंभ हो जाता है। इसके अलावा ये भी मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्रााजी ने इस संसार की रचना की थी। जब चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि आती है तब नया संवत्सर आरंभ हो जाता है। संवत्सर का अर्थ जिसमें सभी महीने पूरी तरह से निवास करते हों। संवत्सर 12 महीने का कालविशेष होता है। भारतीय संवत्सर 5 प्रकार के होते हैं। इनमें से तीन सावन, चान्द्र तथा सौर प्रमुख होते हैं।

तीन साल बाद नव संवत्सर 2077 में एक माह अधिमास का भी होगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। संवत्सर के अनुसार इसमें 12 की बजाय 13 महीने होंगे। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है। विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत 25 मार्च से होगी। जो आनंद नामकीय संवत्सर रहेगा। इसके राजा बुध व मंत्री चंद्र होंगे। आश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। यानि इसकी अवधि करीब 2 माह होगी। इन 2 माह में बीच की अवधि वाला माह का समय अधिमास रहेगा। इसके बाद जितने भी त्याेहार आएंगे। वे 10 से 15 दिन या इससे कुछ अधिक विलंब से आएंगे। दीपावली इस बार 14 नवंबर को होगी। साथ ही देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को आएगी। सवंत्सर 2077 में अधिमास की 2 तिथियां शुक्ल पक्ष की तृतीया का क्षय 19 अक्टूबर को व कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का क्षय 15 अक्टूबर है। इस कारण 3 सितंबर को श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र आरंभ होंगे। श्राद्धपक्ष की सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन नवरात्र शुरु हो जाते हैं, लेकिन अमवस्या व नवरात्र के बीच पूरे एक माह का अंतर होगा। 3 सितंबर कृष्ण पक्ष एक से आश्विन माह शुरु होगा, जो 31 अक्टूबर तक रहेगा।

1 जुलाई के बाद 5 माह तक सोएंगे देव:- इस वर्ष अधिकमास होने से देव भी पांच महीने सोएंगे। पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी 1 जुलाई को मनाई जाएगी। इसके बाद शादी-विवाह व शुभ कार्यों के कोई भी मुहूर्त नहीं होंगे। इस बीच अधिकमास शुरु होगा। श्राद्ध पक्ष के एक महीने बाद नवरात्र शुरु होंगे। दीपावली के बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी।
कब होता है अधिकमास, वर्ष 2018 में भाद्रपद में आया था
सौरमास 365 दिन का व जबकि चंद्रमास 354 दिन का होता है। इससे हर साल 11 दिन का अंतर आता है।, जो 3 साल में बढ़कर एक माह से कुछ अधिक हो जाता है। यह 32 माह 16 दिन के अंतराल से हर तीसरे साल में होता है। वर्ष 2018 में भाद्रपद में था तो अब आश्विन में हो रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। सूर्य के बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं।

नव संवत्सर 2077 और भविष्यवाणी

विंशति का परिधावी नामक संवत्सर विदा हो रहा है और ‘प्रमादी’ नामक संवत्सर का शुभारंभ होने वाला है जिसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। जिसके फलस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार के लिए कठिन तो रहेगा, किंतु भारत सरकार इसमें पूर्ण तरह सफल रहेगी। 6 अप्रैल से ‘आनंद’ नामक संवत्सर का भी शुभारंभ हो जाएगा जो भारतवर्ष की समृद्धि के लिए शुभ साबित होगा। नववर्ष का आरंभ बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र, और मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर के समय में हो रहा है अतः देश के लिए यह संयोग अति शुभ रहेगा, यही नहीं यह संयोग भारतवर्ष के आर्थिक विकास, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उन्नति, सामाजिक व्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में नए मील का पत्थर साबित होगा।

25 मार्च से 4 मई, 18 जून से 15 अगस्त, 4 अक्तूबर से 24 दिसम्बर एवं फरवरी से 12 अप्रैल 2021 तक का समय कठिन परिस्थितियों वाला होगा, भूकंप-प्राकृतिक प्रकोप, भयंकर समस्याओं का सामना, युद्ध जैसे हालात, अराजकता-उपद्रव-हिंसक घटनाओं से हानि, विचित्र रोग से जन-धन आदि का भय, डर का माहौल रहेगा, कुछ प्रदेशों में भारी वर्षा से बाढ़, तेज आंधियों का जोर, आसमानी बिजली गिरने, कुदरती आपदा, बादल फटने से नुक्सान, कुछ प्रदेशों में वर्षा की भारी कमी भी रहेगी और सूखे आदि से जीवन प्रभावित होगा, खड़ी फसलों पर कुदरती मार पड़ेगी-नुक्सान होगा। सर्दी के मौसम में इस वर्ष भारी बर्फबारी-ओलावृष्टि, हिमस्खलन-बर्फ के तोदे गिरने से, भूस्खलन से जन-धन की हानि होगी।

कालसर्प योग की छाया भी रहेगी

नूतन संवत्सर के प्रथम दिन सूर्योदय के समय बृहस्पति केतु के साथ अपनी राशि धनु में विराजमान हैं किंतु ये इस राशि की अंतिम 30वीं कला का भोग कर रहे हैं और अतिचारी अवस्था में 29 मार्च की मध्यरात्रि पश्चात 03 बजकर 48 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। राहू मिथुन एवं केतु धनु राशि की 10वीं कला का भोग कर रहे हैं इसलिए सभी ग्रहों के साथ-साथ वृहस्पति भी राहु केतु के अक्ष में है अतः कालसर्प योग भंग नहीं हुआ। यदि बृहस्पति का भोगांश कम होता और राहु-केतु भोगांश ज्यादा होता तो ये कालसर्प योग भंग हो जाता। आपकी राशि पर किस ‘कालसर्प’ योग की छाया है

मनुष्य के जीवन में भारी उतार-चढ़ाव लाने वाले ‘कालसर्प योग’की छाया नए संवत्सर के आरंभ से ही पड़ रही है।‘प्रमादी’नामक नए संवत्सर के शुभारम्भ से ही राहु और केतु के द्वारा बनने वाले कालसर्प योग की छाया पड़ना देश और देश की जनता के लिए शुभ नहीं है क्योंकि, स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की जन्मकुंडली में यह योग ‘कुलिक’ कालसर्प योग के रूप में असर दिखाएगा। जो देश में साम्प्रदायिकता बढ़ा सकता है और स्वतंत्र भारत की ही प्रभाव राशि कर्क के बारहवें भाव में ‘शेषनाग’ कालसर्प योग के रूप में भी देश के लिए शुभ नहीं रहेगा क्योंकि, यह योग देश अथवा व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर बनाता है।

कालसर्प योग का नैसर्गिक प्रभाव यह भी है कि यदि यह योग शुभ है तो व्यक्ति को जीवन के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाता है और अशुभ है तो व्यक्ति को अर्श से फर्श पर भी ला खड़ा करता है। भारतवर्ष के ही नहीं वरन संसार के कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेकों महान नेता, उद्योगपति, फ़िल्मी कलाकार लेखक आदि इसी योग के शुभ प्रभाव से अपने जीवन में महानतम मापदंडों को स्थापित किया है और कई बड़ी शख्सियतें इस योग के कुप्रभाव से समय आने पर हाशिये पर गए हैं।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो लग्नेश बुध चतुर्थ भाव में पंचग्रही योग बना रहा है जो सत्ता पक्ष का शुभ संकेत है। गुरु और शनि के साथ युति होने से देश में अराजकता का माहौल बना रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे यह शांत हो जाएगा। नए एवं लोकहित कानून और योजनाओं से देश को लाभ होगा। सत्ता पक्ष और मजबूत होगा। विपक्ष को मुश्‍किलों का सामना करना पड़ सकता है। दशम भाव में मित्र क्षेत्री राहु होने से साम,दाम, दंड, भेद की नीतियों के चलते केंद्र सरकार अपनी योजनाओं को लागू कराने में सफल होगी।

इस वर्ष ये दिव्य शक्तियों के मंत्र देंगे सभी को राहत।

वर्षभर किए जाने वाले स्तुति तथा मंत्र जो कि अत्यंत प्रभावकारी माने जाते हैं

रोग नाश के लिए…

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

महामारी नाश के लिए…

ऊँ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

यह दोनों मंत्र अत्यंत प्रभावकारी माने जाते हैं।

परात्पर परब्रम्ह भगवान श्री चित्रगुप्त के मंत्र जिसका विलक्षण फल होगा कोरोना राक्षस का नाश होगा

ॐ नमों विचित्राय धर्म लेखकाय यम वाहिकाधिकारिणे म्ल्व्यूं जन्म-सम्पत्-प्रलयं कथय-कथय स्वाहा।

महामृत्युंजय मंत्र करेगा महामारी का नाश

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्‍धनान्
मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ

सरल जाप

  • ॐ नमो नारायण। श्रीमन्न नारायण नारायण हरि हरि।
  • ॐ नमः शिवाय
  • ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः
  • ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे

इनके साथ श्रीगणेश आराधना, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड , भगवद नाम संकीर्तन, इत्यादि करते रहें

नव संवत्सर के आरंभ में ‘कालसर्प योग’की छाया पड़ रही है।‘प्रमादी’नामक नए संवत्सर के शुभारम्भ से ही राहु और केतु के द्वारा बनने वाले कालसर्प योग की छाया पड़ना देश और देश की जनता के लिए शुभ नहीं है क्योंकि, स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की जन्मकुंडली में यह योग ‘कुलिक’ कालसर्प योग के रूप में असर दिखाएगा। जो देश में साम्प्रदायिकता बढ़ा सकता है और स्वतंत्र भारत की ही प्रभाव राशि कर्क के बारहवें भाव में ‘शेषनाग’ कालसर्प योग के रूप में भी देश के लिए शुभ नहीं रहेगा

इस नव संवत्सर में राशियों पर कालसर्प योग का क्या है प्रभाव एवं क्या करें उपाय जिससे हो बचाव

  • मेष राशि इस वर्ष बन रहा है वासुकी कालसर्प योग जो आपको सर्वदा शुभ रहेगा पारिवारिक परिस्थितियों में होगा विरोधाभास।
    उपाय:- गणेश आराधना करें , ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः मंत्र जप करे, हनुमान चालीसा का पाठ करें
  • वृषभ राशि कुलिक कालसर्प योग आकस्मिक धन प्राप्ति के योग षडयंत्र के शिकार स्वास्थ्य में गिरावट होसकती है।
    उपाय शिव जी को दूध जल चढ़ाएं देवी आराधना करें
  • मिथुन राशि अनंत कालसर्प योग विवाद आलस्य प्रमाद आवेश अनावश्यक तनाव
    उपाय: दुर्गा आराधना विष्णु सहस्रनाम पाठ करे।
  • कर्क राशि शेषनाग कालसर्प योग विदेश यात्रा वाहन दुर्घटना से बचें अनावश्यक विवाद
    उपाय: सौं सोमाय नमः जप करे शिव जी को दूध जल बिल्वपत्र चढ़ाए
  • सिंह राशि विषधर कालसर्प योग आर्थिक स्थिति सुदृढ़ भाइयों से मतभेद व्यसन से बचें
    उपाय: सूर्य अर्घ्य प्रदान करे गो सेवा करे
  • कन्या राशि पातक कालसर्प योग मान सम्मान मिलेगकार्य क्षेत्र में तनाव सरकारी कार्यों से लाभ
    उपाय: गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करें वृद्ध आश्रम में सेवा करें
  • तुला राशि शंखचूड़ कालसर्प योग असफलता के बाद सफलता भी मिलेगी आध्यात्मिक क्षेत्र में कार्य करें धन खर्च होगा दिखावे से बचें
    उपाय:देवी आराधना करें ॐ नमः शिवाय मंत्र जप करे।
  • वृश्चिक राशि कर्कोटक कालसर्प योग आकस्मिक धन प्राप्ति बड़ा निवेश होगा दुर्घटना से बचें षड्यंत्र संभावित
    उपाय: सफेद आंकड़े के गणेश को सिंदूर का चोला चढ़ाएं हनुमान आराधना करें
  • धनु राशि तक्षक कालसर्प योग दांपत्य जीवन में कड़वाहट पार्टनरशिप से बचें विवाह में विलंब व्यापार में सावधानी बरतें
    उपाय: भगवान श्री चित्रगुप्त मंदिर में कागज पेन चढ़ाए विष्णु सहस्त्र नाम पाठ करे संत सेवा करे।
  • मकर राशि महापद्मा काल सर्प योग न्यायालय क्षेत्र से सावधान स्वास्थ्य का ध्यान रखें आर्थिक मामलों में सचेत रहें
    उपाय: तर्पण करे गोसेवा करे वृद्धाश्रम में अन्न दान करे।
  • कुंभ राशि पद्म कालसर्प योग संतान संबंधी चिंता परिश्रम की अधिकता प्रतिस्पर्धा में लाभ
    उपाय: वाल्मीकि सुंदरकांड पाठ करे अनाथ रोगी की सेवा करे
  • मीन राशि शंखपाल कालसर्प योग मकान वाहन के मामलों में अड़चन बाद में सफलता पारिवारिक कलह मानसिक तनाव चोरी का भय
    उपाय: गोपाल सहस्त्रनाम पाठ करें ॐ नमो नारायणाय जप करें

रविशराय गौड़
ज्योतिर्विद
अध्यात्मचिन्तक

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एन सी आर खबर ब्यूरो

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