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तो क्या ये भी एक कारण था केजरीवाल प्राइम टाइम ख़बरों से गायब रहने का ?

आखिर अरविन्द केजरीवाल का अनशन बिना किसी रिजल्ट के समाप्त हो गया , केजरीवाल ने कहा कि उनके अनशन से और कुछ हुआ हो या न हुआ हो, इतना तय हो गया है कि दिल्ली विधानसभा का अगला चुनाव बिजली और पानी के मसले पर लड़ा जाएंगा। उन्होंने कहा, यह भी तय हो गया है कि इस देश की राजनीति अंबानियों के हिसाब से नहीं, बल्कि आम आदमी के हिसाब से चलेगी।

कई दिनसे चल रहे इन अनशन जिस पर सोशल मीडिया पर इतना कुछ कहा जा रहा था , पर मैंन  स्ट्रीम मीडिया ने जैसे एक दम चप्पी ही साध ली थी , वो मैंन  स्ट्रीम मीडिया जो अरविन्द और अन्ना के आंदोलनों को हाथों हाथ ले रहा था , आखिर क्या वजेह थी इस बार मैंन  स्ट्रीम  मीडिया उसे इस कदर भूल गया की उसके बात तक करना उचित नहीं समझा ,

बहुत सोचने के बाद मुझे  याद आया  अरविन्द का  वो “गूगल हैंगआउट” जिसमें उन्होंने  खुलासा किया था  कि मुकेश अम्बानी ने मीडिया कंपनियों को मानहानि का नोटिस भेजा था । यह नोटिस केजरीवाल के 31 अक्टूबर और नौ नवम्बर के प्रेस कांफ्रेंस का सीधा प्रसारण करने वाली सभी मीडिया कंपनियों को भेजी गयी । नोटिस में उन सभी मीडिया हाउस को माफ़ी मांगने को कहा गया था  जिसने प्रेस कांफ्रेंस का सीधा प्रसारण किया था। उन्होंने आगे बताया था कि नोटिस में  उन मीडिया हाउस को चेतावनी भी दी गयी थी  कि भविष्य में ऐसे प्रसारण करने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

तो क्या हमारा मैंन  स्ट्रीम मीडिया जो निष्पक्ष होने का दावा करताहै , अरविन्द के खुलासो से इतना डर गया है की अब उनके आंदोलनों से हाथ खीच रहा है, इसका जबाब तो शायद मीडिया चैनल मैं काम करने वाले लोग ही दे सकते है ये मुझे इसलिए भी लगा की पिछले दिनों रवीश कुमार जैसे सुलझे हुए पत्रकार ने अपना फेसबुक और ट्वीटर अकाउंट को डीएक्टिवेट कर दिया , मीडिया मैं आयी  कुछ खबरों के अनुसार उन्होंने अपने कार्यक्रम मैं’ आप”का पक्ष लिया था

 

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