यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) अब उन औद्योगिक भूखंड आवंटियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर न तो निर्माण कार्य प्रारंभ किया है और न ही उनकी फैक्ट्री स्थापित करने की कोई योजना प्रतीत हो रही है। इस कार्रवाई की शुरुआत सबसे पहले अपैरल पार्क के आवंटियों के खिलाफ की जा सकती है, जिनमें से कुछ द्वारा भूखंड को अवैध रूप से बेचने का मामला सामने आया है।
यीडा के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे आवंटियों पर शिकंजा कसा जाएगा, जो औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की बजाए केवल भूमि के मूल्य में वृद्धि के उद्देश्य से भूखंड आवंटित करा रहे हैं। इनमें वे आवंटियाँ भी शामिल हैं जो लीज डीड नहीं करवा रहे हैं और जो निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं कर रहे हैं। खासकर सेक्टर 29 में स्थित अपैरल औद्योगिक पार्क के 82 सदस्यों में कुछ को विशेष रूप से निशाना बनाया जा सकता है, जिन पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है।
हाल ही में, यीडा के अध्यक्ष और प्रमुख सचिव उद्योग, आलोक कुमार ने इस क्षेत्र का दौरा करते हुए उन आवंटियों के भूखंडों को निरस्त करने का आदेश दिया, जिन्होंने अपनी यूनिट स्थापित नहीं की है। यीडा द्वारा पिछले वर्षों में कम से कम 11 औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जिससे आशा की गई थी कि औद्योगिक गतिविधियाँ तेजी से प्रारंभ होंगी। लेकिन, कई आवंटियों ने भूखंड प्राप्त करने के बाद कोई प्रगति नहीं की है, जिससे प्राधिकरण के औद्योगिक विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है।
नए सीईओ राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर, ऐसे आवंटियों को चेतावनी नोटिस भेजे जा रहे हैं। यीडा का यह कदम न केवल औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि सरकारी नीतियों के प्रति जिम्मेदारी का भी संकेत देगा। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या ये आवंटी समय पर कार्रवाई करते हैं या फिर प्राधिकरण को और सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।