जिले में इस वर्ष डेंगू के 426 मामलों की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। लगातार हो रही बारिश ने मच्छरों की प्रजनन क्षमता को बढ़ा दिया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है। इसके अलावा, मौसम में बार-बार बदलाव के कारण सर्दी-जुकाम के मामलों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए विभिन्न उपाय शुरू किए हैं। विभाग की टीमें सेक्टर-सोसाइटियों में फॉगिंग कर रही हैं और जलभराव को रोकने के लिए जागरूकता अभियान का संचालन कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिस क्षेत्र में लार्वा पाया जाता है, उसे तुरंत नष्ट किया जाता है ताकि मच्छरों की संख्या में कमी लाई जा सके।
डेंगू से संक्रमित लोगों की पहचान के लिए विभाग, मरीजों के परिजनों की भी जांच कर रहा है। यद्यपि जिले में डेंगू से किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है, हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के डीजीएम आशीष भाटी की मौत ने सभी को चिंता में डाल दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया है कि मृत्यु का सही कारण अभी निर्धारित नहीं हुआ है और चूंकि यह घटना दिल्ली में हुई थी, विस्तृत जानकारी दिल्ली से क्रॉस-नोटिफिकेशन के बाद ही जारी की जाएगी।
इस वर्ष, जिले में अब तक 923 डेंगू के मरीज सामने आए हैं, जबकि 2022 में कुल 590 मरीजों की रिपोर्ट हुई थी। हालांकि, इस साल अक्टूबर तक मरीजों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम रही है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लार्वा नष्ट करने के लिए फॉगिंग कर रहा है और आशा करता है कि इससे डेंगू के मामलों में कमी आएगी।

स्थानीय निवासियों से अपेक्षित है कि वे स्वच्छता बनाए रखें और अपने आसपास जलभराव को न होने दें, ताकि मच्छरों के संसर को कम किया जा सके। जिला प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे बीमारियों के लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।


