12 वर्ष तक दिल्ली पर प्रचंड बहुमत से शासन करने के बाद विपक्ष में बैठी आम आदमी पार्टी इन दिनों भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार पर आक्रामक तेवर दिखा रही है । इनमें दिल्ली में बारिश के दौरान पानी भरने, फिर दीपावली पर पटाखों से प्रदूषण और अब छठ पर यमुना में पानी साफ न होने के बाद दिल्ली सरकार द्वारा कृत्रिम बारिश के लिए कराई गई क्लाउड सीडिंग पर प्रश्न उठाना प्रमुख है । सामान्यतः विपक्ष को ऐसा करना भी चाहिए । किंतु क्या इसके लिए सरकार को कुछ समय देना आवश्यक नहीं है ।
ये अच्छी बात है कि वर्तमान में दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार अपनी सरकार बनने के 6 माह में ही इन सभी मुद्दों पर लगातार प्रयास करती दिख रही है और आंशिक सफलता भी प्राप्त कर रही है । सच ये भी है कि अगर 6 माह में यमुना साफ हो गई होती तो कांग्रेस की शीला दीक्षित के 15 वर्षों और आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के 12 वर्षों में दिल्ली में यमुना मैली न रही होती । स्वयं प्रत्येक 5 वर्ष बाद यमुना को स्वच्छ करने के लिए पुनः सरकार बनाने के लिए वोट मांगने वाले केजरीवाल के मंत्री सौरभ भारद्वाज की ये जल्दबाजी राजनैतिक थेथरई से अधिक कुछ नहीं है । मीडिया और पार्टियों को भी, चंद महीनों के शासन के बाद, रेखा गुप्ता से 40 साल की गंदगी का हिसाब नहीं मांगना चाहिए. ये काम कम से कम पांच साल का है. हिसाब मांगने की शुरुआत तीसरे साल के अंत से होनी चाहिए।
ऐसे में वरिष्ठ राजनेता शरद यादव का ये कहना उचित हैं कि राजकाज लोकलाज से चलता है और ये भी अच्छी बात है कि रेखा गुप्ता उसे मान रही है । तो फिर उन्हें भी कम से कम 4 वर्षों का समय तो देना ही चाहिए । विपक्ष के आरोप प्रत्यारोप जनहित में दिखाई देने चाहिए न कि हताशा और राजनैतिक विरोध में ।



