स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माता राम वनजी सुतार का निधन, शिल्प जगत में शोक की लहर

NCR Khabar News Desk
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नोएडा/नई दिल्ली। दिग्गज मूर्तिकार और पद्म भूषण से सम्मानित राम वनजी सुतार का बुधवार रात को नोएडा स्थित आवास पर निधन हो गया। 100 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को होने की संभावना है। कला एवं संस्कृति की दुनिया में शिल्पकार सुतार के आकस्मिक निधन से गहरा शोक छाया हुआ है।

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  • राम सुतार का निधन 100 वर्ष की आयु में नोएडा स्थित आवास पर हुआ।
  • इन्हें Padma Bhushan सहित अनेक सम्मान प्राप्त।
  • प्रसिद्ध कृतियों में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अयोध्या की श्रीराम प्रतिमा, बेंगलुरु की शिव प्रतिमा शामिल।
  • कला जगत, राजनेताओं और जनता ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

राम वनजी सुतार का जन्म 1925 में महाराष्ट्र के छोटे से गांव गोंडूर (जिला उस्मानाबाद) में हुआ था। बचपन से ही मिट्टी और पत्थर को आकार देने का साधारण सा काम उन्हें आकर्षित करता था। प्रारंभ में इंदू मिल, मुंबई में श्रमिक के रूप में कार्यरत राम सुतार ने धीरे-धीरे शिल्प कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। 1970 के दशक से वे स्वतंत्र मूर्तिकार के रूप में सक्रिय हुए और समय के साथ राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़ते गए।

प्रमुख उपलब्धियाँ एवं परियोजनाएँ

  • 2018 में स्थापित दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (182 मीटर), सरदार वल्लभभाई पटेल, गुजरात।
  • अयोध्या में 251 मीटर ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा—विश्व की दूसरे क्रमांक की ऊँची प्रतिमा।
  • बेंगलुरु में 153 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा।
  • पुणे (मोशी) में 100 फीट ऊंची छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा।
  • मुंबई के इंदू मिल परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की भव्य प्रतिमा।
  • हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने मालवन (सिंधुदुर्ग) स्थित राजकोट किले पर 60 फीट ऊंची छत्रपति शिवाजी महाराज की नई प्रतिमा निर्माण कार्य राम सुतार आर्ट क्रिएशन्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा था।

सम्मान

राम सुतार को सन् 2016 में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार द्वारा पद्म भूषण से विभूषित किया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें महाराष्ट्र राज्य सरकार, भारतीय मूर्तिकला संघ और कई सामाजिक संस्थानों द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है।

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शोक संवेदना

कला एवं संस्कृति मंत्री (केंद्रीय) ने अपने ट्वीट में लिखा, “राम सुतार जी का जाना भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ हमेशा हम सबको प्रेरित करती रहेंगी।” वहीं गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा, “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के माध्यम से राम सुतार ने सरदार पटेल के योगदान को युगों-युगों तक जीवंत रखा। उनका निधन असमय हुआ लेकिन उनके अद्भुत कृतित्व का प्रकाश सदा रहेगा।”

राम सुतार के परिवार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके पीछे पत्नी, दो पुत्र—अनिल और अरविंद, एवं एक पोता-पोती हैं। बड़े पुत्र अनिल सुतार ने मीडिया से कहा, “मेरे पिता हमेशा कहते थे कि जड़ से जुड़े रहो, पर सोच को ऊँचा उड़ने दो। उन्होंने कला के माध्यम से इतिहास को आकार दिया। हमें उनका साथ हमेशा याद रहेगा।”

कलात्मक योगदान एवं विरासत

सुतार की खासियत यह थी कि वे प्राचीन भारतीय शिल्प शैली को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर निर्मित करते थे। उनकी बनाई मूर्तियों में शुगीला विवरण, अनुपात और स्थायित्व तीनों का अद्भुत संतुलन दिखता था। उन्होंने लोक कलाकारों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ अपने स्टूडियो में युवा मूर्तिकारों को अवसर भी प्रदान किया। उनके शिष्य आज देश-विदेश में विभिन्न परियोजनाओं पर कार्यरत हैं।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि राम सुतार की मूर्तियां भारतीय पहचान के साथ-साथ एक वैश्विक संस्कृति का संदेश भी देती हैं। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जहाँ सरदार पटेल की प्रतिबद्धता की कहानी बयां करती है, वहीं अयोध्या की श्रीराम प्रतिमा हिंदू धर्म के सौंदर्य और आस्था का सजीव चित्रण है।

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