लंबे इंतजार के बाद नोएडा ग्रेटर नोएडा में मेट्रो सेवा के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम सामने आया है। नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) ने तीन नए मेट्रो कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड डिजाइन तैयार करने के लिए आयशा कंपनी का चयन कर लिया है। यह निर्णय नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों निवासियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में उभर रहा है, जो लंबे समय से बेहतर और विस्तृत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग कर रहे थे।
तीनों नए मेट्रो रूटों की कुल लंबाई 31.595 किलोमीटर है, जिसमें सबसे लंबा रूट सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क-5 तक का है। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी तक का रूट और सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन तक का थर्ड कॉरिडोर भी शामिल है। इन परियोजनाओं के डिजाइन के लिए एनएमआरसी आयशा कंपनी को कुल 24.21 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी।
एक जुड़ाव की शुरुआत
इन नए कॉरिडोर्स के जरिये नोएडा के दूरदराज के इलाकों से मेट्रो का सीधा कनेक्शन होगा। विशेष रूप से, सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के नॉलेज पार्क-5 तक का रूट छात्रों, शिक्षण संस्थानों और आईटी के केंद्र में काम करने वाले पेशेवरों के लिए बड़ी राहत लाएगा। यह कॉरिडोर न केवल यातायात के दबाव को कम करेगा बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करेगा।
इसी तरह, ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी तक का रूट नए बसे क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाएगा, जहां आवास और औद्योगिक विकास तेजी से हो रहा है। जबकि सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन का कनेक्शन आरोग्य और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

स्थायी भविष्य के लिए हरित ऊर्जा की पहल
एनएमआरसी ने घोषणा की है कि तीनों कॉरिडोर के प्रस्तावित सभी स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन पैनलों से उत्पादित बिजली स्टेशनों की पूरी बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति करेगी। यह पहल न केवल ऊर्जा लागत को कम करेगी बल्कि नोएडा को एक पर्यावरण-अनुकूल शहर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
इस निर्णय से नोएडा देश के अग्रणी हरित शहरी परिवहन प्रणाली वाले शहरों में शामिल होने की राह पर आ गया है। सोलर एनर्जी के उपयोग से मासिक बिजली बिल में भारी कमी आएगी और पर्यावरण पर कार्बन उत्सर्जन का दबाव भी कम होगा।
जनता के लिए अधिक सुविधा, कम परेशानी
लंबे समय से नोएडा के नागरिकों ने ट्रैफिक जाम, सुबह की समयमर्यादा के साथ कामकाजी यात्रा और पर्याप्त परिवहन बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर चिंता जताई है। इन नए मेट्रो मार्गों के माध्यम से एक तेज, विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प मिलेगा।
“यह सिर्फ एक मेट्रो परियोजना नहीं है, बल्कि नोएडा के भविष्य के लिए एक संपूर्ण योजना है,” एक स्थानीय निवासी और कॉरपोरेट पेशेवर ने कहा। “जब सेक्टर-135, सेक्टर-142 या नॉलेज पार्क से मेट्रो कनेक्शन होगा, तो लोगों का दैनिक तनाव बहुत कम हो जाएगा।”
अगला कदम: डिजाइन से निर्माण तक
अब आयशा कंपनी की भूमिका इन रूटों के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर), स्टेशन डिजाइन, लैंड एक्विजिशन प्लान और बुनियादी ढांचे की पूरी अध्ययन तैयार करने की होगी। यह प्रक्रिया 12 से 18 महीने तक चल सकती है, जिसके बाद निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू हो सकता है।
एनएमआरसी के अधिकारियों ने कहा कि सरकारी अनुमतियां और पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में शुरू हो सके।


