आशु भटनागर। नोएडा के सेक्टर 150 में अर्थम् कमर्शियल मॉल के अधूरे पड़े बेसमेंट में भरे हुए पानी में डूब कर युवराज मेहता की मृत्यु के बाद अब स्पोर्ट्स सिटी घोटाले पर सरकार और नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही और मिलीभगत पर भी प्रश्न उठने लगे हैं । दरअसल बीते 3 दिन में पुलिस ने दो बिल्डर के 3 लोगो को गिरफ्तार किया है जिसके बाद मामले में नए-नए खुलासे होते जा रहे हैं जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रकरण पर नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर प्लॉट 3C फेम लोटस ग्रीन को दिया था।
स्पोर्ट्स सिटी को 300 एकड़ जमीन बेहद सस्ते दामों पर इस शर्त पर आवंटित की गई थी कि 70% भूमि पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित की जाएगी किंतु बिल्डर ने प्राधिकरण के अधिकारी को साथ मिलकर जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर 24 अन्य कंपनियों को बेच दिया और अरबो रुपए का मुनाफा कमा कर गायब हो गया। बाद में यहां कुछ भी नहीं बन पाया और प्रोजेक्ट अधूरे रह गए इन्वेस्टर के पैसे डूब गए ।
ऐसे ही एक आधे अधूरे अधूरे प्रोजेक्ट में ही पानी भरने के कारण युवराज मेहता की मृत्यु हो गई ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या कानून के लंबे हाथ छोटे बिल्डरों या फिर बिल्डर प्रोजेक्ट में दो और तीन परसेंट के पार्टनर्स तक ही सीमित रहेंगे या फिर पूरे घोटाले के सबसे बड़े खिलाड़ी निर्मल सिंह तक भी पहुंचेंगे। क्योंकि नोएडा पुलिस की ही जांच का एक हिस्सा यह भी कह रहा है कि थ्री सी फेम लोटस ग्रीन भी इस प्रोजेक्ट में एक हिस्सेदारी थी।
सवाल यह भी है कि निर्मल सिंह का नाम इस पूरे खेल में ना आ जाए इसके लिए नोएडा प्राधिकरण से लेकर पुलिस प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार तक तक कौन लोग हैं जो इसके लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं । गौतम बुध नगर जिले की फिजाओं में हो रही चर्चाओं की माने तो 3c फ्रेम निर्मल सिंह के कई वेतन भोगी अधिकारी प्राधिकरण के विभिन्न विभागों में कार्यरत रहे हैं और यह अधिकारी घोषित तौर पर नोएडा प्राधिकरण की जगह निर्मल सिंह के हितों के लिए काम करते रहें हैं। रोचक तथ्य यह है कि इनमें कुछ अधिकारी अभी भी नोएडा प्राधिकरण में न सिर्फ विराजमान है बल्कि अपने साथी अधिकारियों को बचाने के लिए जांच को पूरी तरीके से डाइवर्ट करने में लगे हुए हैं।

इन अधिकारियों के सिंडिकेट का असर आप ऐसे भी देख सकते हैं कि बीते 11 महीने में ईडी ने 5 बार नोएडा प्राधिकरण से पत्र भेज कर दागी अफसर के नाम मांगे पर नोएडा प्राधिकरण ने कोई जवाब नहीं दिया । नोएडा प्राधिकरण की स्पोर्ट्स सिटी घोटाले में खानापूर्ति को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हाई कोर्ट और केंद्रीय जांच एजेंटीयों ने दबाव बढ़ाया तो प्राधिकरण ने पिछले महीने आनन् फानन में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के तहत लगभग 12000 करोड रुपए का बकाया वसूलने के लिए बिल्डरों को नोटिस जारी किए जिसको बस दिखावा मात्र माना गया ।


