मेडिकल डिवाइस पार्क में गामा रे‑डायरेक्शन लैब के लिए होगा  9 जनवरी को बीआरआईटी के साथ अनुबंध

NCR Khabar News Desk
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यमुना प्राधिकरण‑बोर्ड ऑफ़ रेडिएशन एंड आइसोटोप टेक्नोलॉजी (BRIT) के बीच, प्रदेश के पहले मेडिकल‑डिवाइस पार्क (MDP) में गामा रेडिएशन लैब के निर्माण‑संचालन 9 जनवरी को मुंबई में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत BRIT लैब के लिए मानक ऑपरेटिंग प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगा, जिससे निर्माण, मान्यताकृत संचालन तथा उपयोग‑शुल्क निर्धारण के लिये स्पष्ट दिशा‑निर्देश मिलेंगे।

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यीडा के सेक्टर 28 में 350 एकड़ के भूमि पर प्रदेश के प्रथम Medical Device Park (MDP) का विकास चल रहा है। भारत सरकार ने इस परियोजना को 100 कोटि रुपये का अनुदान प्रदान किया है। पार्क में, “कॉमन साइंटिफिक सेक्टर” के अंतर्गत 13 विभिन्न प्रयोगशालाएँ स्थापित होंगी:

लैब/फैसिलिटी

1 3‑डी डिजाइन, रैपिड प्रोटोटाइपिंग और टूलिंग लैब
2 इंटरनेट ऑफ़ मेडिकल टेक्नोलॉजी (IoMT) लैब
3 इलेक्ट्रॉनिक असेंबली फसिलिटी
4 बायो‑मैटेरियल टेस्टिंग फसिलिटी
5 कॉमन आईटी फसिलिटी
6 कॉमन टूल रूम
7 इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम एंड डिजाइन फसिलिटी
8 मेकाट्रॉनिक्स जोन
9 इलेक्ट्रॉनिक कैलिब्रेशन एवं टेस्टिंग फसिलिटी
10 गामा रेडिएशन लैब (मुख्य फ़ोकस)
11 सेंटर टेस्टिंग एंड इंटीग्रेशन फसिलिटी
12 डिजिटल डिस्प्ले जोन
13 AI/ML और कंप्यूटिंग लैब
गामा रेडिएशन लैब: सुरक्षा‑पहले की कड़ी चुनौती

गामा‑रे प्रयोगशाला के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती विकिरण सुरक्षा है। यमुना प्राधिकरण ने इस दिशा में विशेष चरणबद्ध उपायों की घोषणा की है:

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SOP बनाना – BRIT लैब के निर्माण एवं संचालन के लिये तकनीकी मानक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और एक्सेस नियंत्रण स्थापित करेगा।
ऑपरेटर प्रशिक्षण – प्राधिकरण द्वारा चयनित समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण से सुसज्जित किया जाएगा।
निगरानी एवं ऑडिट – स्थापित सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिये निरंतर निगरानी प्रणाली लागू होगी।

यमुना प्राधिकरण के ACEO शैलेंद्र भाटिया ने कहा, “गामा रेडिएशन लैब हमारी चिकित्सा‑उपकरणों की विश्व‑स्तरीय परीक्षण क्षमता को नई ऊँचाई पर ले जाएगी। सुरक्षा के मामले में हम ‘शून्य जोखिम’ सिद्धान्त को अपनाते हुए हर कदम पर कठोर मानकों का पालन करेंगे।”

संचालन मॉडल और उपयोग शुल्क

लैब के उपयोगकर्ता‑संकुल (स्टार्ट‑अप, एजीडू वेंचर, शोध संस्थान आदि) के लिये “ग्रुप‑बेस्ड” मॉडल अपनाया जाएगा। प्राधिकरण एक चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य कंपनियों का चयन करेगा, जिनके पास लैब की सुविधाओं का उपयोग करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही लैब के उपयोग कर्ताओं से विभिन्न सुविधाओं के उपयोग के लिए शुल्क निर्धारित भी किया जाएगा।

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