उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में पीने के पानी की बदहाली को लेकर एक बार फिर मुद्दा गरमा गया है। स्थानीय समाजसेवी संस्था ‘कोनरवा’ ने नोएडा प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के 25 साल पुराने आदेश को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। संस्था ने शहर भर में अशुद्ध पानी की सप्लाई के विरोध में तुरंत प्रभावी कदम उठाने और छोटे-छोटे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग की है।
कोनरवा के अध्यक्ष पी.एस. जैन ने नोएडा विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. लोकेश एम को भेजे एक पत्र में गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है कि नोएडा के स्थापने के 49 साल बाद भी प्राधिकरण नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में असफल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग साढ़े बाबीस साल पहले माननीय उच्चतम न्यायालय ने 100 प्रतिशत शुद्ध पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिए थे, जिसके तहत प्राधिकरण को दो साल के भीतर उपयुक्त क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना था। हैरानी की बात है कि आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया।
पत्र में पी.एस. जैन ने प्राधिकरण की मानसिकता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “प्राधिकरण के पास पर्याप्त संसाधन हैं। वह अन्य विभागों और योजनाओं में करोड़ों रुपये उधार दे सकता है, लेकिन नागरिकों के मौलिक अधिकार और अपनी नैतिक जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए पैसा खर्च करने में आनाकानी करता है। यह उसकी इस मामले को लेकर उदासीनता को दर्शाता है।”
संस्था ने इस समस्या से जुड़े दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि शुद्ध पानी न मिलने के कारण लाखों घरों और संस्थानों में लगे आरओ (RO) की वजह से 70 से 90 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है। यह न केवल पानी की बर्बादी है, बल्कि आम नागरिकों का आर्थिक भी भारी बोझ है। साथ ही, ट्यूबवेल और रेन वेल के दूषित पानी को गंगा जल में मिलाया जा रहा है, जिससे गंगा का जल भी प्रदूषित हो रहा है और पीने योग्य नहीं रह गया है।

इस समस्या का समाधान सुझाते हुए कोनरवा ने कहा कि एकमात्र उपाय यह है कि रिजर्व पाइपलाइन पर छोटे-छोटे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर गंगा जल में शुद्ध पानी को मिक्स किया जाए। उन्होंने प्रश्न पूछा, “जब प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नालों के पानी को शुद्ध करने के लिए छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगा सकता है, तो फिर नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) क्यों नहीं लगा सकता?”
पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्राधिकरण बार-बार नोटिस और सुचना दिए जाने के बावजूद आंखें मूंदे बैठा है और जांच के नाम पर सिर्फ आयोग बनाकर समय बिता रहा है।
कोनरवा ने सीईओ से इस संबंध में तत्काल एक ठोस नीति बनाकर उसे लागू करने का विनम्र अनुरोध किया है। संस्था ने यह भी कहा है कि यदि आवश्यकता हो तो वह प्राधिकरण को इस काम में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नोएडा प्राधिकरण इस जनहित का मुद्दा कितनी गंभीरता से लेता है और लाखों नागरिकों को शुद्ध पेयजल देने के लिए क्या कदम उठाता है।


