लखनऊ।प्रवर्तन निदेशालय (ED), लखनऊ जोनल ऑफिस ने अम्रपाली ग्रुप के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरेका ग्रुप की 99.26 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। इसमें मेसर्स मौर्या उद्योग लिमिटेड का कार्यालय, फैक्ट्री की भूमि और भवन शामिल हैं, जो सुरेका ग्रुप की प्रमुख संस्थाओं में से एक है।
ED की जांच में पता चला कि अम्रपाली ग्रुप के निदेशकों — अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार — ने सुरेका ग्रुप के प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका के साथ मिलकर निर्माण सामग्री की खरीद के नाम पर फर्जी लेनदेन के जरिए घर खरीदारों के फंड को डायवर्ट किया। कुल 110.39 करोड़ रुपये की राशि मौर्या उद्योग लिमिटेड को स्थानांतरित की गई, जो अम्रपाली के पीड़ित खरीदारों के पैसे से उत्पन्न ‘अपराध की आय’ (POC) है।
चूंकि मूल फंड खत्म हो चुके हैं, इसलिए ED ने प्रतिबंधित संपत्तियों के “मूल्य के बराबर” संपत्ति को प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अटैच किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश और गौतम बुद्ध नगर व दिल्ली पुलिस की कई FIRs के आधार पर की गई है।
इससे पहले ED ने अम्रपाली ग्रुप के तीन निदेशकों और उसके सीएफओ सहित कुल पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया चुका है। अब तक इस मामले में छह प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं, जिनमें 33 व्यक्ति और संस्थाएं आरोपी हैं। अब तक ED ने कुल 303.08 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है।

स्थानीय निवासियों के बीच इस कार्रवाई को सकारात्मक कदम माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के बीच जिन्होंने सालों पहले अम्रपाली के प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था लेकिन अब तक घर नहीं मिला। ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना है।


