बेलाग लपेट : नोएडा में 2 घंटे तक पानी में तड़पता रहा इंजीनियर युवराज, रेस्क्यू टीम बोली- ‘पानी ठंडा है, सरिया हो सकता है!’ जिम्मेदार कौन—प्रबंधन या सुरक्षा एजेंसी?

आशु भटनागर
6 Min Read
Highlights
  • हादसे के वक्त क्या थी लापरवाही?
  • समय पर मदद क्यों नहीं मिली?
  • जिम्मेदार कौन—प्रबंधन या सुरक्षा एजेंसी?

आशु भटनागर । उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम और राहत एवं बचाव व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। यहां एक इंजीनियर युवक, युवराज, एक गड्डे में भरे पानी में डूब गया, लेकिन उसे बचाने के लिए मौजूद पुलिस और एसडीआरएफ के जवान उस तक पहुंचने में नाकाम रहे। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की नाकामयाबी की कहानी है, जो आम नागरिकों की सुरक्षा के दावे करती है।

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घटना बृहस्पतिवार की है, जब एक कार बेसमेंट में गिर गई। कार में फंसे युवराज ने कार के छत पर चढ़कर दो घंटे तक अपनी जान बचाने की गुहार लगाई। सैकड़ों लोगों की भीड़ और पूरे सरकारी अमले के सामने वह तड़पता रहा, लेकिन कोई उसे बचाने के लिए आगे नहीं आया। आखिरकार, थकान और सर्दी से उसका बल बूझा और वह पानी में डूबकर मर गया।

इस घटना ने एक इकलौते बेटे को अपनी मौत से पहले अकेले और मदद विहीन होकर रोने के लिए मजबूर कर दिया, और उसके बाद कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब सिस्टम के पास नहीं है।

“मेरा बेटा 2 घंटे तक गुहार लगाता रहा…”

मृतक युवराज के पिता का दर्द और गुस्सा फट पड़ा है। उन्होंने सीधे तौर पर बचाव दल पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है, “मेरा बेटा कार के ऊपर खड़ा होकर खुद को बचाने की 2 घंटे गुहार लगाता रहा। लेकिन उसका रेस्क्यू नहीं किया जा सका। विभाग के लोग रेस्क्यू के लिए इसलिए नहीं उतरे क्योंकि उनका कहना था कि पानी बहुत ठंडा है और पानी में सरिया भी हो सकता है।”

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यह बयान किसी भी सभ्य समाज को झकझोरने के लिए काफी है। एक जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले जवानों का “पानी ठंडा है” जैसा बहाना, सिस्टम की बेशर्मी और लापरवाही की पराकाष्ठा है। फिर सवाल उठता है कि आखिर ये कैसी ट्रेनिंग दी गई पुलिस और एसडीआरएफ को, जिसमें उन्हें किसी व्यक्ति को बचाने के लिए पानी में उतरना तक नहीं आता? अगर वे खतरे का सामना नहीं कर सकते, तो फिर आम नागरिकों से वसूला जाने वाला टैक्स कहां खर्च हो रहा है?

प्रश्न ये भी है कि क्या पुलिस और जिला प्रशसन के शीर्ष अधिकारियो को घटना कि सुचना नहीं थी या दोनों ने घटना को गंभीरता से नहीं लिया, नहीं तो मात्र ३० किल्मीटर दूर हिंडन एयरबेस से हैलीकॉप्टर भी लाया जा सकता था। आखिर आम आदमी के लिए अधिकारियो की मानसिकता सब चलता है वाली क्यु हैं ?

प्रश्न पानी में उतर कर जाने वाले युवक मुनेंदर के बड़े बयानों के बाद स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी उठ रहे है लोगो के प्रश्न हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि युवक का आक्रोश एक दिन बाद ही पलट गया और उसने पुलिस, दमकल से लेकर SDRF/NDRF कि नाकामियों को उपलब्धियों में बताना शुरू कर दिया I सोशल मीडिया पर इनको लेकर तमाम आवाज़े उठ रही हैं लोग पूछ रहे हैं कि क्या पुलिस का काम सत्य को दबब्ना रह गया है ?

नोएडा की घटना: हर घर से निकलने वाले के लिए एक चेतावनी

यह घटना सिर्फ एक परिवार का शोक नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए एक कड़वा सच है। यह बताती है कि आज के समय में अपनी जान को अपनी हथेली पर लेकर ही घर से बाहर निकलना है। घर से निकलते समय इस बात का ख्याल रखना है कि अगर आप डूब गए, भीड़ गए या घायल हो गए, तो आपको बचाने कौन आएगा? शायद कोई नहीं।

देखा जाए तो, इस सिस्टम को डूबकर मरने की जरूरत है, ताकि उसे ठंड लगे। लेकिन जब तक ऐसा होता है, मरने की बारी आपकी और हमारी आती है। युवराज की मौत ने यह साबित कर दिया है कि हादसे के वक्त जो लापरवाही बरती गई, वह जानबूझकर थी। समय पर मदद न मिलना, किसी एजेंसी की चूक है या फिर पूरी व्यवस्था की साजिश?

तो फिर जिम्मेदार कौन—प्रबंधन या सुरक्षा एजेंसी?

अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सवाल यह है कि यह गड्ढा यहां क्यों खुला था? इसकी जिम्मेदारी बिल्डिंग प्रबंधन की है या सुरक्षा एजेंसी की? लेकिन इन सबसे बड़ा सवाल उन राहत एजेंसियों पर है, जो जवाबदेही से भाग रही हैं उस पुलिस वयवस्था पर भी है जो बयान

बदलवा दे रही है। युवराज की मौत एक निर्मम हकीकत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह उस परिवार का दर्द है, लेकिन यह उस सिस्टम पर कलंक है, जो अपनी नाकामी पर पर्दा डालने में लगा है। सवाल यह नहीं है कि युवराज की मौत कैसे हुई, सवाल यह है कि उसे मारने वाली कानूनी और प्रशासनिक लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? जब तक इसका जवाब नहीं मिलेगा, हर नागरिक यह सोचकर घर से निकलेगा कि कहीं आज उनकी बारी तो नहीं है।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे