ग्रेटर नोएडा वेस्ट: आम्रपाली गोल्फ होम्स एवं किंग्सवुड सोसाइटी में रविवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) का माहौल इतना बिगड़ गया कि निवासियों और एओए (AOA) के बीच जमकर हंगामा हुआ। निवासियों के गुस्से का आलम यह रहा कि उन्होंने सोसाइटी के प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एओए को तत्काल बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि लोगों ने कुर्सियां उठाकर फेंकी और एओए पदाधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
यह घटना लगभग चार महीने बाद बुलाई गई GBM की है, जहां निवासियों के कई गंभीर सवाल थे, लेकिन एओए ने उन्हें सुनने के बजाय उनका अपमान करना उचित समझा। निवासियों का आरोप है कि जब उन्होंने हाल ही में पास किए गए एफएमएस (FMS) टेंडर की पारदर्शिता पर सवाल उठाए, तो एओए के पदाधिकारी बातें बनाने लगे। उन्होंने बताया कि लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति माह के टेंडर में एक महंगी एजेंसी को ठेका दिया गया, जबकि कई अन्य एजेंसी कम दाम पर काम करने को तैयार थीं। 5806 फ्लैटों के निवासियों के पैसों का इस तरह दुरुपयोग किए जाने से निवासी आक्रोशित हैं।
जब “चोर” कहकर बुलाया गया तो फूटा गुस्सा
सबसे ज्यादा गुस्सा तब फूटा, जब निवासियों का आरोप है कि एओए की ओर से उन्हें “चोर” कहा गया और यह कहा गया कि वे दस्तावेज लेकर भाग सकते हैं। इस अपमानजनक टिप्पणी से गुस्साए निवासियों ने एओए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। एओए पर यह भी आरोप लगाया गया कि वे पिछली GBM में लिए गए निर्णयों पर कोई स्पष्ट जवाब देने में नाकाम रहे। जब निवासियों को बोलने का मौका तक नहीं दिया गया, तो उनका धैर्य टूट गया और हंगामा शुरू हो गया।
विरोध के तेंवर पर चढ़ते देख एओए के सभी सदस्य बिना किसी औपचारिक समापन या निर्णय के GBM छोड़कर भाग खड़े हुए। उनके जाने के बाद उपस्थित सभी निवासियों ने सर्वसम्मति से हस्ताक्षर कर एडहॉक एओए को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित किया।

भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे निवासी
निवासियों ने सिर्फ एओए को बर्खास्त करने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने एक निर्णायक कदम उठाते हुए एडहॉक एओए द्वारा लिए गए सभी प्रमुख वित्तीय निर्णयों, विशेष रूप से एफएमएस टेंडर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया है। यह प्रस्ताव जल्द ही कोर्ट रिसीवर एवं रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंपा जाएगा, ताकि इस मामले की सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
यह घटना सोसाइटी प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी की एक कड़वी कहानी कहती है, जहां निवासियों को अपने ही पैसों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने के लिए इस तरह के उग्र प्रदर्शन पर उतारू होना पड़ा। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि प्रशासन और न्यायालय इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या निवासियों को न्याय मिल पाता है।
पुरे प्रकरण पर AOA से पक्ष के लिए संपर्क किया जा रहा है उनका पक्ष भी आगे प्रकाशित किया जाएगा


