उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोएडा यानी न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण को मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनाने के निर्देश पर अपना निर्णय ले लिया है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अध्यक्षता में गुरुवार को ही कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के तहत नोएडा को मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी गई ।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास विभाग ने राय दी थी कि नोएडा की स्थापना उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के अंतर राज्य का औद्योगिक विकास सुरक्षित करने के लिए की गई थी इसकी स्थापना का उद्देश्य औद्योगिक आवासीय और वाणिज्य विकास की संगठित तरीके से संरचना करने के लिए थी नोएडा विदेशी निवेश का प्रमुख केंद्र है इसलिए इसको मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनाने से राज्य के निवेश पर विपरीत असर पड़ेगा । वही न्याय विभाग ने भी सरकार को यह राय दी की नियम अनुसार नोएडा में मेट्रोपोलिटन कॉरपोरेशन की स्थापना नहीं की जा सकती है कैबिनेट ने इसके अलावा वित्त विभाग नगर विकास राजस्व विभाग आवास एवं शहरी नियोजन तथा नियोजन विभाग की राई भी ली इसके बाद नोएडा क्यों औद्योगिक विकास क्षेत्र रखने के लिए स्वीकृति दे दी है ।
क्या है मामला ?
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान 22 नवंबर 2023 को नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार की जांच एसआईटी से करने के आदेश दिए थे । एसआईटी ने नोएडा में भ्रष्टाचार के 12 मामलों की जांच की थी जिसमें किसानों की भूमि अधिकरण के लिए 89.31 करोड़ का भुगतान नियमों के विपरीत किए जाने का मामला सामने आया था 20 अन्य मामलों में 117.56 करोड रुपए का भुगतान गलत तरीके से करने की बात भी सामने आई थी. जिसके बाद एसआईटी ने नोएडा में मेट्रोपोलिटन कारपोरेशन के गठन का सुझाव दिया था इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को नोएडा मेट्रो कॉरपोरेशन के गठन के विचार का आदेश पारित किया था।
सरकार के फैसले से शहर में रह रहकर होने वाले नगर निगम की मांग भी होगी खत्म
दरअसल नोएडा के औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन में बदलने की मांग कोर्ट के अलावा शहर के कई संगठन भी करते रहे है। इन संगठनों का दावा है किसके जरिए उन्हें प्लीज भूमि की जगह फ्री होल्ड जमीन मिल जाएगी जिससे उन्हें अधिक फायदा होगा । किंतु नोएडा प्राधिकरण के पक्ष के लोगों का कहना है कि दरअसल किसी भी मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन को बनाए जाने के बाद प्रशासनिक के साथ साथ नोएडा में राजनैतिक सामाजिक भ्रष्टाचार भी बढ़ जाएगा । दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में कई शहर ऐसे हैं किंतु वहां की स्थिति नोएडा से भी बेहद खराब है। ऐसे में पक्ष विपक्ष जो भी हो फिलहाल सरकार के इस निर्णय से अब इन सब बातों का अर्थ खत्म हो गया है और एक बार फिर से अगले 100 वर्षों के लिए नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ही रहेगा



