यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने हाथरस को एक नए औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। प्राधिकरण ने हाथरस अर्बन सेंटर के विकास के लिए ‘महायोजना 2041’ तैयार करने वाली कंपनी का चयन कर लिया है, जिसके बाद जल्द ही क्षेत्र में विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।
प्राधिकरण के एसीईओ शैलेंदर भाटिया के अनुसार, वित्तीय और तकनीकी बिडिंग प्रक्रिया के बाद आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट को महायोजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कंपनी को अगले नौ महीने के भीतर महायोजना का मसौदा तैयार कर यीडा को सौंपना होगा। इसके बाद शासन और प्राधिकरण के बोर्ड से आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद मूल विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए तीन कंपनियों ने वित्तीय बिड में हिस्सा लिया था, जिनमें से आरवी इंजीनियरियरिंग कंसल्टेंट को चुना गया। वहीं, तकनीकी बिड में एलईए एसोसिएट्स साउथ एशिया और गरूड़ा यूएवी सॉफ्टसॉल्यूशंस सहित तीन कंपनियां सफल रही थीं। चयनित कंपनी न केवल महायोजना तैयार करेगी, बल्कि भविष्य के विकास कार्य में भी तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।
4,000 हेक्टेयर में बसेगा नया शहर
यह अर्बन सेंटर यमुना एक्सप्रेसवे के निकट हाथरस और सासनी के गांवों की करीब 4,000 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण की योजना के अनुसार, इस शहर में 15 फीसदी से अधिक हरित क्षेत्र होगा और एक मजबूत सड़क नेटवर्क को विकसित करने को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की स्थानीय आर्थिकी को बढ़ावा देना है। इसके लिए यहां एक ऐसा औद्योगिक पारितंत्र (इकोसिस्टम) विकसित किया जाएगा, जो स्थानीय उद्योगों को समर्थन दे सके। साथ ही, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर यहां उद्योगों के लिए भूखंड भी विकसित किए जाएंगे।
आवास और रोजगार पर भी होगा फोकस
यह शहर केवल औद्योगिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं होगा। यहां अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवासीय परियोजनाएं भी विकसित की जाएंगी, ताकि बढ़ती आबादी की आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से हाथरस और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।
इन उद्योगों को मिलेगी प्राथमिकता
महायोजना में क्षेत्र की कृषि-प्रधान पहचान को ध्यान में रखते हुए कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। हाथरस और आसपास का क्षेत्र कृषि के लिहाज से काफी समृद्ध माना जाता है। ऐसे में यहां कोल्ड स्टोरेज, डेयरी प्लांट, होजरी यूनिट, हस्तशिल्प और फूड प्रोसेसिंग यूनिट जैसी इकाइयों को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विशेष रूप से हाथरस की विश्वभर में पहचान बनाने वाले हींग और गुलाल के उत्पादन से जुड़े उद्योगों को भी इसमें विशेष स्थान दिया जा सकता है।


