शुक्रवार को नोएडा के जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार का एक वर्ष पुराने जांच मामले पर अचानक निलंबन कर दिया गया। उत्तर प्रदेश के आबकारी ओर निषेध विभाग के मंत्री नितिन अग्रवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट से जानकारी देते हुए लिखा कि जनपद गौतमबुद्धनगर में मदिरा दुकानों पर निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूले जाने की लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों के दृष्टिगत तत्कालीन उप आबकारी आयुक्त, मेरठ प्रभार राकेश कुमार सिंह द्वारा विस्तृत जांच एवं निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दिनांक 23 दिसंबर 2024 को 9 दुकानों तथा 20 जनवरी 2025 को 16 दुकानों पर ओवररेटिंग की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए मैंने आबकारी अधिकारी, गौतमबुद्ध नगर सुबोध कुमार को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही का आदेश दिया है।
आबकारी मंत्रालय के रूप में पिता की विरासत सँभालने वाले नितिन अग्रवाल ने स्पष्ट लिखा कि योगी सरकार में आमजन के हितों से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। मदिरा बिक्री में अनियमितता, ओवररेटिंग या भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
पर कहते हैं कोयले की कोठरी में बिना दाग के कैसे कोई बाहर आए, तो ऐसे ही बीते 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश में शराब पर ओवर रेटिंग कोई नया मुद्दा नहीं है । मायावती सरकार में शुरू हुए इस खेल में सरकारे बदलती रही मंत्रालय बदलते रहे, मंत्री बदलते रहे, अधिकारी बदलते रहे किंतु शराब पर ओवर रेटिंग की शिकायतें कम नहीं हुई ।
ऐसे में मंत्री द्वारा स्वयं सामने आकर किसी जिला आबकारी अधिकारी को के निलंबन की सूचना देना अपने आप में कई प्रश्न खड़े कर रहा है यह इसलिए भी प्रश्न चिन्ह इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि मंत्री जी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से घोषणा करते हुए यह बताया कि विभागीय जांच 2024 में आई शिकायतों से शुरू हुई थी और अब जाकर 2024 के मामले पर ही जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित किया गया है और उनके खिलाफ विभागे जांच शुरू की गई है ऐसे में सीधा-सीधा प्रश्न यह है कि 1 वर्ष तक इस जांच के नाम पर रिपोर्ट को क्या दबाया गया था, क्या किसी राजनीति के तहत अचानक इस रिपोर्ट का उपयोग आपकारी मंत्रालय या आप कार्य अधिकारियों ने गौतम बुध नगर के जिला आबकारी अधिकारी के विरुद्ध कर लिया है ?

चर्चाएं यह भी हैं कि सुबोध कुमार बीते 1 वर्ष से लगातार ओवर रेटिंग पर गोपनीय जांच को अंजाम दे रहे थे और इस पूरे क्रम में कई ऐसे लोग उनके निशाने पर आ गए थे जिसे तमाम प्रभावशाली लोगों की सत्ताएं हिल रही थी। 1 वर्ष तक उनको समझाया जा रहा था और अंत में वही हुआ जो अक्सर ऐसे अधिकारियों के साथ होना चाहिए । ओवररेटिंग का दमन कर रहे जिला आबकारी अधिकारी पर ओवररेटिंग की शिकायत पर ही कार्यवाही करते हुए मामला सुलझा लिया गया।
एक अन्य चर्चा ये भी हैं कि क्या गौतम बुध नगर के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य सभी जिलों में कहीं ओवरराइटिंग की शिकायत नहीं आ रही है या फिर किसी खास अधिकारी को गौतम बुद्ध नगर देने के लिए सुबोध कुमार विभागीय राजनीति का शिकार बन गए हैं।
नोएडा से लखनऊ तक चर्चाओं में एक प्रश्न ये भी है कि मंत्रिमंडल विस्तार में 70% मंत्रियों के मंत्रालय जाने की सूचनाये इन दिनों उत्तर प्रदेश में गूंज रही है ऐसे में क्या नितिन अग्रवाल ने अपनी छवि को स्वच्छ दिखाने, अपने मंत्री पद को बचाने के लिए किसी अधिकारी की बलि ले ली है।
सच क्या है यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा, फिलहाल जनसमुदाय की दृष्टि नए अधिकारी के बाद की स्थिति पर रहेगी और मंत्री जी से अपेक्षा भी रहेगी कि गौतम बुध नगर समेत पूरे उत्तर प्रदेश में ओवर रेटिंग की खबरें अब सुनाई देना बन हो जाएंगी ।


