नए वर्ष के साथ ही नोएडा प्राधिकरण से लोगों की अपेक्षाएं यह थी कि वो उनके उनके कार्यों के लिए धन्यवाद देंगे, किंतु ऐसा लगता नहीं है। नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र सिंह द्वारा अपने फोटो को कैलेंडर पर छपवाने के बाद नोएडा प्राधिकरण में अब अधिकारियों पर एक के बाद एक कार्यशाली को लेकर प्रश्न उठ रहे है ।
ताजा मामला सेक्टर 44 के सदरपुर खजूर गांव के गली नंबर 53 का है । जहां प्राधिकरण के कर्मचारियों ने बीचों-बीच सीवर का ढक्कन ऐसे उठाकर लगाया हुआ है कि कोई भी आने जाने वाला वहां गिर सकता है । सोशल मीडिया पर हिमांशु गुप्ता नाम के एक यूजर ने फोटो जारी करते हुए लिखा कि आपका इंजीनियर का कमल गली के बीचो-बीच सेवक का ढक्कन गली से डेढ़ फीट ऊंचा आज सब्जी वाले की बैलेंस बिगड़ने से सब्जी गिर गई मुस्कुराईये है आप अच्छा ज्ञान देते हैं ।

एनसीआर खबर ने इस पूरे मामले को लेकर जब जानकारियां पता की तो पता लगा कि नोएडा प्राधिकरण के जल और सीवर के अधिकारी कागजों पर बेहतरीन काम कर रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर जहां ठेकेदार का जैसा मानता है वह वैसे कर देता है । समस्याओं को लेकर अगर IGRS पर शिकायतें भी होती हैं तो उनका समाधान IGRS पर ही कर दिया जाता है।
हालात ये है कि लखनऊ से करंट पा रहे ऐसे सभी अधिकारियों को किसी भी प्रकार की कार्यवाही से डर भी नहीं लगता है इसका उदाहरण ऐसे समझ सकते हैं कि कलेंडर कांड से चर्चा में आए एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक रहते हुए महेंद्र प्रसाद पर नोएडा के सीईओ की कार्यवाही भी एक आई वाश से ज्यादा नहीं है । उन्हें सिर्फ एनएमआरसी से हटाया गया है नोएडा प्राधिकरण में अन्य विभागों पर उनकी पकड़ वैसे ही मजबूत है।

प्राधिकरण के अधिकारियों की माने तो किसी भी अधिकारी को अगर आप हटाएंगे तो उसे कहीं ना कहीं तो लगाना ही पड़ेगा ऐसे में आप कितना भी बड़ा कांड कर लीजिए आपकी कार्यशैली पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
नोएडा सीईओ की बेबसी यहीं खत्म नहीं होती है नोएडा में ही अगर आप सिविल की बात करें तो एक अधिकारी की ऊपरी पहुंच के चलते सिविल में जीएम पद पर दो अधिकारियों के बीच कार्य बांटा गया है। कहा जात है कि ऊपरी पहुंच वाले अधिकारी नोएडा शहर को बिना कार्य के ही स्वच्छता का अवार्ड दिला देते हैं । तो दूसरे आए अधिकारी अभी तक साइनिंग अथॉरिटी की पावर तक नहीं ले पा रहे हैं । 4 महीने से ज्यादा समय के बावजूद वो बस नाम के ही जीएम है।
ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम् वाकई प्राधिकरण की कार्यशैली में कुछ बदलाव ला पाएंगे या फिर अपने तीन वर्ष पूर्ण होने के चलते अपने स्थानांतरण का इंतजार करेंगे और प्राधिकरण को लेकर” सब चलता है” वाली चर्चाएं ऐसे ही जारी रहेंगी और आम गरीब आदमी ऐसे ही गिरता रहेगा ।


