युवराज को किसने मारा ? युवराज केस में सरकार, पुलिस, प्रशासन और प्राधिकरण के बचाव में दिए जा रहे तर्क कहीं उल्टे ना पड़ जाए

आशु भटनागर
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नोएडा के सेक्टर 150 में निर्माणाधीन शॉपिंग मॉल के बेसमेंट भर पानी में डूब कर हुई युवराज मेहता की मृत्यु पर उपजे आक्रोश को ठंडा करने के लिए पुलिस प्रशासन और प्राधिकरण के बचाव में जिस तरीके के तर्क उनको बचाने वाले लोग देने में लग गए हैं उस पर भी प्रश्न खड़े हो गए है। कल देर शाम एस आई टी के हवाले से शनिवार गुड़गांव में एक बार के वीडियो को जारी करके यह कहा गया कि युवराज मेहता उस रात पार्टी कर रहा था और संभवत इसके सहारे पार्टी में शराब पीने की बात कहीं जाने की कोशिश की गई । 49 लोगों की पार्टी के ₹200000 के बिल की चर्चाएं भी सोशल मीडिया पर अननोन अकाउंट से लिखी गई।

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किंतु इस वीडियो के वायरस होते ही सोशल मीडिया पर जन साधारण की प्रतिक्रिया प्रशासन पुलिस और प्राधिकरण तीनों के विरुद्ध हो गई यहां तक की वीडियो को लेकर यह प्रश्न उठे कि अगर यह वीडियो एसआईटी के हवाले से बाहर आ रहा है तो एसआईटी बिना जांच पूरी करें या  रिपोर्ट सरकार को दिए बिना ऐसे वीडियो को लीक कैसे कर रही है। इससे एसआईटी की इंटेंशन पर भी प्रश्न खड़े हो रहे है।

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इस पूरी कार्यवाही से मुझे बरसों पुराना भारतीय पुलिस को लेकर बना एक हास्य व्यंग याद आ गया जिसमें कहा जाता था कि स्कॉटलैंड पुलिस किसी अपराधी को पकड़ने में 3 दिन लगाती है रशियन पुलिस दो दिन लगाती है और भारतीय पुलिस पीड़ित को पकड़ कर यह साबित कर देती है कि वही अपराधी है।

पुलिस द्वारा पीड़ित को बचाने वाले एक फ्लिपकार्ट के डिलीवरी मैन पर दबाव डालकर बयान बदलवाने और बाद में परिवार द्वारा पुलिस पर ही तमाम आरोप लगाए जाने से भी पूरे प्रकरण पर कई नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं, इसको फिर से उसी दौर की याद ताजा होने लगी है जिन किसी दुर्घटना में मदद करने वालों के साथ ही पुलिसिया रवैया निरंकुश हो जाता था।

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पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को अटैच करने के बाद पुलिस और जिला प्रशासन पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही न होने को लेकर भी लोगों में रोष देखा जा रहा है।

दरअसल लोग लगातार यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि पुलिस के 60 जवान  होने के बावजूद किसी ने भी उसको बचाने की कोशिश नहीं की। वहां पर डीसेपी और डीएम स्वयं उपस्थित नहीं थी, ना ही उनके स्तर से किसी बड़े बचाव कार्य को अंजाम दिया गया। ऐसे में सिर्फ प्राधिकरण के सीईओ को बलि का बकरा बनाकर सरकार ने क्या संदेश दिया है । लोग लगातार यह पूछ रहे हैं कि क्या जनाक्रोश को शांत करने के लिए लोकेश एम को अटैच कर दिया गया और दिखावे के लिए एसआईटी घोषित कर दी गई ।

पूरे प्रकरण में आनन फानन में पुलिसिया कार्रवाई में बिल्डर पर की गिरफ्तारी पर भी चर्चाएं हो रही हैं, पूरे मामले में बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके उसे जेल भेज दिया गया ।जिसमें कहा जा रहा है कि साइट पर बैरिकेडिंग ना लगाए होने के कारण उस पर गैर इरादतन हत्या के आरोप लगाए गए हैं । वहीं लोगों के प्रश्न हैं कि अगर बिल्डर द्वारा इस पर बैरिकेटिंग लगाई जाने के बाद प्राधिकरण ने वहां पेनल्टी तक लगा दी थी जिसके कारण बिल्डर से काम रुकवाया गया तो फिर इसमें बिल्डर क्यों निशाना क्यों बनाया जा रहा है। क्या पूरे केस में जानबूझकर दिशा भटकाने की कोशिश की जा रही है या फिर कार्यवाही के नाम पर कुछ भी करके लोगों के जनाक्रोश को शांत करने की कोशिश की जा रही है अगर ऐसा है तो यह इतने बड़े कांड के बाद प्रशासनिक मानसिकता को दर्शाता है और यह बताता है कि सरकार  जनता के हित के लिए काम नहीं कर रही है बल्कि किसी भी तरीके से लीपापोती करके अपनी जान बचाने में लग गई है और इसमें पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन सब शामिल है ।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे