नोएडा प्राधिकरण ने शनिवार को हुई 221वीं बोर्ड बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए अमिताभकांत समिति की सिफारिशों पर आधारित जीरो पीरियड पॉलिसी दोबारा लागू करने की मुहर लगा दी है। इस फैसले के बाद अब 51 बकायेदार निर्माण कंपनियों को अपना बकाया जमा करने का एक और मौका मिलेगा, जिससे 10,000 से अधिक फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बैठक नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित बोर्ड रूम में चेयरमैन व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, इस पॉलिसी के तहत बिल्डरों को बकाया राशि का 25 प्रतिशत जमा करने के बाद भी किस्तों का भुगतान जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही उन पर लगे जुर्माने में मिलने वाली छूट भी बरकरार रहेगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्राधिकरण ने नवंबर 2025 में जीरो पीरियड पॉलिसी को बंद कर दिया था, क्योंकि कई बिल्डरों ने 25 प्रतिशत बकाया भी नहीं जमा किया था। 11 बिल्डर आंशिक रूप से भुगतान करने के बावजूद नियमों के तहत योग्य नहीं माने गए थे और उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया था। अब इन्हें भी अपनी बकाया राशि जमा करने का अवसर मिलेगा।
फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत
इन 51 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में 10,000 से अधिक फ्लैटों की रजिस्ट्री अटकी हुई है। बिल्डरों के बकाया न जमा करने के कारण खरीदार लंबे समय से कागजात पूरे करने में असमर्थ हैं। अब प्राधिकरण के इस नए फैसले से उन्हें आशा है कि जल्द ही उनके फ्लैट की रजिस्ट्री पूरी हो पाएगी।

प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक 57 बिल्डरों पर 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। जीरो पीरियड पॉलिसी के तहत प्राधिकरण ने 1,500 करोड़ रुपये की कुल राहत प्रदान की थी, जिसमें एनजीटी प्रभाव क्षेत्र की 13 परियोजनाओं को 180 करोड़ का लाभ दिया गया था।
अब तक 36 बिल्डरों ने 872 करोड़ रुपये का बकाया जमा किया है, जिससे 4,134 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। हालांकि, 1,794 फ्लैटों की रजिस्ट्री की मंजूरी होने के बावजूद बिल्डरों ने अभी तक उनका निपटारा नहीं किया है। प्राधिकरण ने इन बिल्डरों पर निगाह बनाए रखी है और सख्ती से निगरानी की बात कही है।
अब फॉलो-अप पर ध्यान
प्राधिकरण अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह मौका अंतिम है। बिल्डरों को अब निर्धारित समयसीमा के भीतर बकाया जमा करना होगा, और उनकी गतिविधियों पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्राधिकरण अधिकारी बिल्डरों के साथ नियमित समीक्षा बैठक करेंगे ताकि फ्लैट खरीदारों को कोई असुविधा न हो।


