उत्तर प्रदेश के आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गौतम बुद्ध नगर के दो प्राधिकरण और उनके सीईओ इन दिनों बेहद चर्चा में है, यह दो प्राधिकरण है नोएडा और यमुना प्राधिकरण। यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह तो बीते 6 माह से अपनी सख्त प्रशासनिक किंतु अव्यवहारिक कार्यशैली को लेकर चर्चित रहे हैं। दरअसल उनको लेकर अभी तक प्राधिकरण में सहजता नहीं हो पाई है। सीईओ लगातार एक उभरते हुए प्राधिकरण को डीएम ऑफिस की तरह चलाने में लगे हुए है जिसके चलते प्राधिकरण लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर देता है किंतु जिन कंपनियों को लेटर ऑफ इंटेंट जारी करता है उनको जमीन पूरी नहीं मिल पाती है। चर्चा है तो यह तक है कि 2 महीने से नए प्लॉट की स्कीम लाने में सफल नहीं हो पाने को लेकर यमुना के कर्मचारी पुराने सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह को याद करने लगे है । प्राधिकरण की चर्चाओं की माने तो स्थानीय विधायक को भी अभी तक सीईओ मैनेज करने में कामयाब नहीं हो पाए है । जिसके कारण हर सप्ताह कहीं ना कहीं किसानों के मामले उठते दिखाई देते हैं । कहा जाता है कि एयरपोर्ट,अपेरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क और फिल्मसिटी सभी जगह काम अटके हुए है और 2027 का चुनाव पास आता जा रहा है ।
वहीं बीते दिनों एनएमआरसी के नववर्ष कलेंडर में अपना फोटो छपवा कर विवाद में आए डा लोकेश एम भी विगत दिनों से बेहद चर्चा में आ गए है। असल में बीते 6 माह से सभी प्रकार के टेंडर रोक कर लोकेश एम अपने ही प्राधिकरण के अधिकारियों कर्मचारियों की आंख में किरकिरी बने हुए थे तो शहर में अवैध अतिक्रमण से लेकर धारा 10 के नोटिस को लेकर भूमाफियाओं समाजसेवियों और नेताओं की स्थिति भी उनको लेकर नकारात्मक हो चली थी। ऐसे में कैलेंडर कांड ने बस अधीनस्थों ओर बाकी सब को मौका दे दिया। मौका मिला तो अधीनस्थो ने मीडिया से लेकर लखनऊ दरबार तक शिकायत से पहुंचने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां बैठे अधिकारियों को यह भी लगता है कि लोकेश एम को प्राधिकरण में 3 वर्ष पूरे भी हो चुके हैं ऐसे में उनका जाना तो तय है ।
ऐसे में दोनों ही प्राधिकरणों से त्रस्त लोग व्यापारी, समाजसेवी, भूमाफिया और सामाजिक संगठन अपने-अपने तरीके से सीईओ के हटाए जाने की कोशिश कर रहे हैं वही कुछ प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि दरअसल लोकेश एम को अभी यमुना प्राधिकरण का सीईओ बनाया जाना चाहिए क्योंकि लोकेश एम बेहद सेंसिटिव क्रिएटिव और टास्क एवं रिजल्ट ओरिएंटेड व्यक्ति है और यमुना प्राधिकरण जैसे उभरते प्राधिकरण में इस समय विकास के लिए ऐसे ही व्यक्ति की आवश्यकता है । वही यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह प्रशासनिक तौर पर सख्त रहे हैं ऐसे में उनको अगर नोएडा प्राधिकरण भेज दिया जाए तो नोएडा प्राधिकरण के अवैध अतिक्रमण, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बेहतर कार्य कर पाएंगे वैसे भी उनके छह माह ही बचे हैं अगर 6 माह में वह नोएडा में बेहतर रिजल्ट नहीं दे पाए तो उनकी जगह नया सीईओ लाया जा सकता है । अब होना तो वही है जो राम रची राखा पर अपेक्षाओं के होने में कोई हर्ज भी नहीं है।



