लखनऊ । नोएडा के सेक्टर-150 में एक युवा सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल युवराज की दर्दनाक मृत्यु से जुड़े मामले में जहां लोगों को एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है वही इस पूरे प्रकरण में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और नोएडा प्राधिकरण से उत्तर मांगे हैं। यह जनहित याचिका नोएडा में रहने वाले युवा अधिवक्ता हिमांशु जायसवाल द्वारा दायर की गई है। हाईकोर्ट ने अधिकारियों से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदमों और लंबित जिम्मेदारियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को होगी।
युवराज की दर्दनाक मृत्यु: प्रशसनिक और सरकारी का लापरवाही निशाना?
अधिवक्ता हिमांशु जायसवाल ने हाईकोर्ट के सामने दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोएडा सेक्टर-150 में हुई दुर्घटना शहरी नियोजन की गलत नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही के परिणाम है। याचिका में कहा गया है कि प्रशासन के पास में पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी, असुरक्षित निर्माण स्थल और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था की अनुपस्थिति ऐसी घटनाओं को आम बनाती है। आवेदक अधिवक्ता हिमांशु जायसवाल ने कोर्ट को सौंपे दलीलों में भविष्य में खतरे के स्तर की पहचान करने और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की मांग की है।
कोर्ट की कार्रवाई: लंबित जवाब और निर्देश
मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण और यूपी सरकार को लिखित जवाब तैयार करके जमा करने के निर्देश जारी किए हैं। मामले में प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने और सामान्य निर्देशों के लिए जल्द से जल्द समय मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई से पहले जवाब में लंबित कार्रवाई कर लेने की बाध्यता होगी।
प्रश्न: क्या प्रशासन और प्राधिकरण जिम्मेदार है?
याचिका में यह बात उठाई गई है कि युवा की मृत्यु केवल निर्माण स्थल के आसपास की निगरानी के अभाव का परिणाम है, बल्कि तर्कहीन शहरी विकास नीतियों का प्रतीक भी है। सेक्टर-150 एक बार फिर पता लगाया जा रहा है कि शहर के विस्तार के दौरान क्या प्राथमिक आवश्यकताएं भूल गईं। प्राधिकरण ने अब तक क्षेत्र में तेजी से बन रही इमारतों के निर्माण नियमों का उल्लंघन रोकने में विफलता दर्ज की है।150 पेज के जनहित याचिका में हिमांशु जायसवाल ने प्रशासन और पुलिस की लापरवाही स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े घोटाले पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं ।

एनसीआर खबर से विशेष बातचीत में बातचीत में हिमांशु जायसवाल ने बताया कि नोएडा का चर्चित स्पोर्ट्स सिटी घोटाला हाई कोर्ट में भी लंबित है और यह प्लॉट नंबर SC- 02 उसी का हिस्सा है जिसे मुख्य बिल्डर ने 24 हिस्सों में बताकर अन्य छोटे-छोटे बिल्डरों को बेच दिया था । हिमांशु ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एसडीआरएफ के प्रशिक्षित लोग अगर किसी की जान बचाने के लिए पानी में नहीं कूद पा रहे हैं तो उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले शहर नोएडा में सुरक्षा उपाय ऊपर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं । और इसे लेकर चुप नहीं रहा जा सकता इसलिए मैंने स्वयं इस जनहित याचिका को दायर करने का निर्णय लिया ।
उल्लेखनीय है कि…
यह मामला अब नोएडा के साथ साथ प्रदेश के कई अन्य नगरों के बीच सुरक्षा एवं शहरी योजना के मामले में एक चेतावनी के रूप में उभरा है। जायसवाल की याचिका में मांग की गई है कि नोएडा में सेक्टर 150 ही नहीं उसके अलावा शहर के अन्य खतरनाक स्थलों की नियमित निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट, और निर्माण कार्यों पर सख्त नियंत्रण के माध्यम से सुरक्षात्मक कदम उठाए जाते। कोर्ट ने इन उपायों के अलावा दोषित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
अगले कदम के रूप में, अभी देखना होगा कि नोएडा प्राधिकरण की ओर से 17 मार्च को इस पूरे प्रकरण पर क्या-क्या जवाब दिए जाते हैं एसआईटी की जांच के साथ-साथ हाईकोर्ट में जनहित याचिका से अब स्थानीय निवासियों के बीच घोषित कार्रवाई के समय रहते जवाबदेही के मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो सकती है।


