नोएडा। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद नोएडा के परिधान उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई है। लगभग 11 महीनों की अनिश्चितता का अंत करते हुए, जिसके कारण द्विपक्षीय संबंध दो दशकों से अधिक समय में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए और विश्वास की कमी और गहरी हो गई थी। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के परिणामस्वरूप भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की, जिसके तहत अमेरिका टैरिफ को 50% (जो दुनिया में सबसे अधिक है) से घटाकर 18% कर देगा। इस फैसले का नोएडा के परिधान निर्यातकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नोएडा और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी का काम करेगा।
परिधान निर्यातक और नोएडा अपेरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के चेयरमैन ललित ठुकराल ने इस ऐतिहासिक समझौते के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह का धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि संकट के समय सरकार ने उद्योग को हर संभव समर्थन दिया।
ललित ठुकराल ने बताया कि अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाया गया 50% का भारी टैरिफ परिधान निर्यात के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हुआ था। ठुकराल के अनुसार, इस क्षेत्र से अमेरिका को होने वाला निर्यात लगभग ₹20,000 करोड़ वार्षिक है, जो कुल निर्यात का लगभग 30% है। टैरिफ बढ़ने से न केवल विदेशी मुद्रा आय प्रभावित हुई, बल्कि रोजगार सृजन पर भी संकट आ गया था।
इस टैरिफ कटौती को व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ठुकराल ने कहा, “50% की दर से टैरिफ लगने के कारण भारतीय परिधान अन्य देशों की तुलना में अमेरिकी बाजार में महंगे हो गए थे, जिससे प्रतिस्पर्धा कम हो गई थी। अब जबकि टैरिफ घटकर 18% हो गया है, तो भारत का परिधान निर्यात फिर से प्रतिस्पर्धी हो गया है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत के ₹30 बिलियन (लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर) के परिधान निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना आसान हो जाएगा। चूंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा परिधान आयातक है (कुल निर्यात का लगभग 35%), इसलिए यह समझौता निर्यातकों के लिए बेहद राहत भरा है।
क्या था मामला?
बीते करीब 11 महीनों से दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में तनाव था, जिससे द्विपक्षीय संबंध दो दशकों में अपने निचले स्तर पर पहुंच गए थे। भारत पर दो कारणों से 50% टैरिफ लगाया गया था—रूसी तेल खरीद पर 25% और पारस्परिक टैरिफ के रूप में 25%। इस उच्च टैरिफ ने भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजार में पिछड़ने पर मजबूर कर दिया था।
सोमवार को आशा की पहली किरण तब दिखी जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारतीय समयानुसार रात 9.16 बजे X पर पोस्ट किया, “राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। देखते रहिए…
विशेषज्ञ अब इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही भारत और अमेरिका के बीच चल रहा व्यापार समझौता पूरा होगा, जिससे परिधान क्षेत्र को और भी अधिक राहत मिलेगी और नोएडा का निर्यात उद्योग नई ऊंचाइयों को छूएगा।


