महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं : प्रेम के असली प्रतीक वेलेंटाइन नहीं शिव ओर शक्ति है, विश्व का अनोखा प्रेम विवाह जिसे माता पिता ने भी सहमति से कराया

आशु भटनागर
6 Min Read

आशु भटनागर। वेलेंटाइन डे भारत में 1995 के समय से आया। आर्चीज नामक कंपनी को ग्रीटिंग कार्ड बेचने के लिए सबसे उपयुक्त त्यौहार लगा । यू कहूं कि इस त्योहार के सबसे पहले शिकार हम या हमारी पीढ़ी ही थी। मैं इस प्रेम के खिलाफ रहने वाले बजरंग दल या फिर आसाराम बापू टाइप लोगों से कभी सहमत नहीं रहा क्योंकि प्रेम हमारे यहां बेहद पवित्र अनुभूति रहा है और इसके अनंत रूप हमारे इतिहास और पौराणिक कहानियों में बार बार लिखे गए हैं।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

किंतु कल 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे को लेकर एक रील चल रही थी फरवरी में क्या है जिसमें अपने पति या बॉयफ्रेंड के रोमांटिक ना होने पर जवाब मिलता है कि तुम्हारे लिए शिवरात्रि है । इस रील को बनाने वाले वही लोग हैं जो आज 40 पार कर चुके हैं इसका मतलब है उन्होंने जीवन के चार दशक देख लिए है।

पर क्या 2 मिनट मैगी वाले इस दौर में वाकई महाशिवरात्रि उन लोगों के लिए है जिनके जीवन में प्रेम नहीं है क्या वाकई महाशिवरात्रि नीरसता या धार्मिक कर्मकांड का प्रतीक मात्र है या फिर मात्र श्रद्धा से मनाया जाने वाला एक धार्मिक त्योहार है ।

कदाचित आज के निब्बा निबंबियों को बताना आवश्यक है कि इस संसार में सबसे अधिक समर्पित प्रेमी पति अगर कोई हैं, तो वह महाशिव ही है। इसीलिए सदियों से हमारे यहां शिव की तरह पति पाने का वरदान युवतियां मांगती रही किंतु तेजी से बदलाव हो रही इस दुनिया में अपने ही मूल्यों के प्रति अज्ञानता अब लोगों को उनका इतिहास जानने से रोक रही है जिसके बाद ऐसे रील बन रही है ।

आखिर महाशिवरात्रि मनाई क्यों जाती है ?

महाशिवरात्रि का व्रत और उत्सव विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के दिन मनाया जाता है। आज के ही दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यह विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण का एक ऐसा कथानक है, जिसके आगे इस दुनिया की सारी प्रेम कहानियां फीकी नजर आती हैं।

धर्मगुरुओं का मानना है कि इस दुनिया में होने वाली हर प्रेम कहानी की कल्पना के पीछे कहीं न कहीं शिव और शक्ति (पार्वती) की प्रेम कथा का ही प्रभाव है। यह कथा तब शुरू होती है जब तारकासुर नामक राक्षस को यह वरदान प्राप्त हुआ था कि शिवपुत्र ही उसका वध करेगा। इसी भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए शक्ति ने दक्ष प्रजापति के घर सती के रूप में जन्म लिया।

सती से पार्वती तक का सफर

कथा के अनुसार, अपने पिता ब्रह्मा का सिर काटे जाने के कारण दक्ष शिव के विरोधी हो गए थे। इसके बावजूद सती ने शिव की तपस्या और उनके गुणों से प्रभावित होकर उनसे विवाह किया। किंतु दक्ष ने अपने दामाद (शिव) का अपमान करने के लिए एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया। अपने पिता की लाडली होने के बावजूद सती, शिव के मना करने पर भी उस यज्ञ में गई। वहां अपने पति के अपमान को सह न कर सकी और उन्होंने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।

सती के इस कदम से शिव अत्यंत क्रोधित हुए और वैराग्य धारण कर लिया। लेकिन सती के त्याग के बाद शक्ति ने फिर से पार्वती के रूप में जन्म लिया। इस बार पार्वती ने प्रेम को विद्रोह की जगह कठिन तप और समर्पण को आधार बनाया। अपने माता-पिता को मनाया और भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको वरदान दिया और अंततः महाशिवरात्रि के दिन शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।

महाशिवरात्रि केवल एक पूजा नहीं है, बल्कि यह हमें सिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कितनी शक्ति होती है। शिव और पार्वती का यह विवाह हर जोड़े के लिए प्रेरणास्रोत है और ऐसी अद्भुत प्रेम कथा और उसके परिणाम स्वरुप हुए विवाह को अगर आप रोमांचक नहीं मानते हैं प्रेम का अप्रतिम उदाहरण नहीं मानते हैं यह आपके ज्ञान की कमी हो सकती है।

मैं फिर से कह रहा हूं पश्चिम से आए वैलेंटाइन डे से किसी को समस्या नहीं किंतु हमारे यहां प्रेम के उत्सव का इतना बड़ा दिन पहले से मौजूद है जिसको युवाओं को बताया जाना जरूरी है इसीलिए महाशिवरात्रि को हुई शादियों को मात्र 20 वर्ष पहले तक बहुत पवित्र समझा जाता था और आज महाशिवरात्रि शिव और पार्वती के इस प्रेम को याद कर उत्सव के रूप में मनाने का दिन है। हर लड़के और लड़की को शिव से यह वरदान लेने का दिन है कि वह शिव की तरह अप्रीतम प्रेम का प्रतीक बने तो हर कन्या प्रेम को तप और समर्पण से अपने प्रेमी के लिए उदाहरण बन सके ।

Share This Article
आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे