ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एक सोसाइटी के बेसमेंट में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की हुई मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन न करने को गंभीर चूक माना है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी बिल्डर अभय कुमार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है, जिसके बाद गुरुवार देर रात उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की कोर्ट संख्या 46 में माननीय न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और माननीय न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष सुना गया। हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 100/2026 में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनु शर्मा ने दलीलें पेश की, जबकि राज्य की ओर से एजीए अरविंद कुमार ने पक्ष रखा।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी ज्ञापन के खंड-13 का पालन नहीं किया गया और न ही गिरफ्तारी से पहले इसकी प्रति उपलब्ध कराई गई। इसके समर्थन में उमंग रस्तोगी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया।
न्यायालय ने पाया कि इस प्रकरण में भी गिरफ्तारी ज्ञापन के खंड-13 का उल्लंघन हुआ है और अभियुक्त की गिरफ्तारी सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत की गई। अदालत ने गिरफ्तारी, हिरासत और रिमांड की प्रक्रिया को अवैध मानते हुए संबंधित प्राधिकरण को याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।
त्वरित कार्रवाई के निर्देश
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि एजीए इस आदेश की प्रमाणित प्रति जारी होने की प्रतीक्षा किए बिना संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचित करें, ताकि आदेश का त्वरित अनुपालन हो सके। इसके साथ ही रिट याचिका स्वीकार कर ली गई और आदेश की प्रमाणित प्रति 5 फरवरी 2026 को जारी करने के निर्देश दिए गए।
उच्च न्यायालय के इस फैसले को पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के पालन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस मामले ने स्थानीय निवासियों के बीच भी काफी चर्चा बटोरी है, जो पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है।


