Budget 2026: बुनियादी ढांचे पर जोर, कैपेक्स ₹12.2 लाख करोड़; रेयर अर्थ के लिए पैकेज, जानें बजट की बड़ी बातें और उन पर एनसीआरखबर का विश्लेषण

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पारुल भटनागर । वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए, सरकार ने भारत की आर्थिक विकास गाथा में एक और अध्याय जोड़ा है, जो रणनीतिक आत्मनिर्भरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार और भविष्य की तकनीकों में गहरी पैठ पर केंद्रित है। वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत यह बजट एक स्पष्ट संकेत देता है कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के लिए एक आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

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पेश हैं बजट 2026-27 की प्रमुख घोषणाओं का विस्तृत विश्लेषण:

बुनियादी ढांचा विकास: पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि

बजट का केंद्रीय मंत्र ‘निरंतर गति’ है। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यह वित्त वर्ष 2026 के 11.2 लाख करोड़ रुपये के आवंटन की तुलना में लगभग 9% की वृद्धि है।

एनसीआरखबर विश्लेषण: वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह व्यय केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास को सहारा देने और रोजगार सृजन के लिए एक लीवर के रूप में काम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश का गुणक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ता है। इस बढ़े हुए आवंटन का उद्देश्य सड़कों, रेलवे और हवाई अड्डों के नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करना है, जिससे व्यापार की लागत कम हो सके।

रणनीतिक खनिज: चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम

भारत की तकनीकी और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।

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एनसीआरखबर विश्लेषण: दुनिया भर में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) का बाजार चीन के प्रभुत्व वाला है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइन और उच्च तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन चार राज्यों में कॉरिडोर बनाने का उद्देश्य केवल खनन नहीं, बल्कि प्रसंस्करण और विनिर्माण को भी बढ़ावा देना है। नवंबर 2025 में शुरू की गई रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना का यह विस्तार भारत को ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

बायो-फार्मा और स्वास्थ्य: वैश्विक हब बनने की आकांक्षा

भारत को वैश्विक बायो-फार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए ‘बायो-फार्मा शक्ति’ कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे।

एनसीआरखबर विश्लेषण: यह योजना तीन नए राष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना और सात मौजूदा संस्थानों के उन्नयन पर केंद्रित है। इसके अलावा, सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के आधुनिकीकरण से गुणवत्ता नियंत्रण और अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह निवेश न केवल महामारी की तैयारियों को मजबूत करेगा, बल्कि जेनेरिक दवाओं के बाजार में भारत की पकड़ को और मजबूत करेगा।

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स विनिर्माण के लिए 40,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के साथ, सरकार ने ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ लॉन्च करने की घोषणा की है।

एनसीआरखबर विश्लेषण: सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 की सफलता के बाद, मिशन 2.0 का ध्यान उपकरणों, सामग्रियों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर है। यह भारत की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख स्थान हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

MSME और टेक्सटाइल: रोजगार को गति देना

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘चैम्पियन एसएमई’ बनाने हेतु 10,000 करोड़ रुपये के फंड का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, टेक्सटाइल क्षेत्र में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे और 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स को पुनर्जीवित किया जाएगा।

एनसीआरखबर विश्लेषण: MSME भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ‘चैम्पियन एसएमई’ फंड का उद्देश्य उन इकाइयों को वित्तीय सहायता देना है जो निर्यात और तकनीकी उन्नयन में सक्षम हैं। टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए, वैल्यू एडिशन पर ध्यान देना आवश्यक है, जबकि ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज’ पहल खादी और हैंडलूम क्षेत्र को आधुनिक बाजारों से जोड़ने का प्रयास है।

ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: पर्यावरण और विकास का संतुलन

पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के लिए, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन स्कीम के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है।

एनसीआरखबर विश्लेषण: जैसे-जैसे भारत अपने औद्योगीकरण को गति दे रहा है, कार्बन उत्सर्जन एक बड़ी चुनौती है। कार्बन कैप्चर तकनीक में निवेश भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (Net Zero 2070) को पूरा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, साथ ही यह हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नए उद्योगों के द्वार खोलता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और हाई-स्पीड कॉरिडोर

निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’ स्थापित किया जाएगा, जो कर्ज देने वालों को आंशिक क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा। इसके अलावा, शहरों को जोड़ने के लिए 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का भी प्रस्ताव है।

एनसीआरखबर विश्लेषण: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जोखिम प्रबंधन महत्वपूर्ण है। यह गारंटी फंड बैंकों और वित्तीय संस्थानों को आश्वस्त करेगा, जिससे बड़ी परियोजनाओं के लिए फंडिंग आसान होगी। हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को नए केंद्रों तक ले जाएंगे।

बैंकिंग और वित्तीय सुधार

वित्त मंत्री ने ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ पर एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। इसके अलावा, म्युनिसिपल बॉन्ड्स को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के बॉन्ड जारी करने वाले नगर निगमों को 100 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा।

एनसीआरखबर विश्लेषण: शहरी निकायों को बाजार से सीधे धन जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना एक स्वस्थ वित्तीय प्रथा है। साथ ही, REC और PFC के पुनर्गठन से ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं को अधिक कुशल बनाने की उम्मीद है।

अपने बजट भाषण में, वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था राजकोषीय अनुशासन और निरंतर विकास के पथ पर रही है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8-7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।

यह बजट भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है। रेयर अर्थ कॉरिडोर से लेकर बायो-फार्मा शक्ति तक, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत अब आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता देगा। चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में, यह बजट भारत की मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ करने का एक प्रयास है।

लेखक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म से जुडी हैं, ऑडिटिंग, टैक्स कंसल्टेंसी, वित्तीय योजना, अनुपालन (Compliance) और लेखांकन सेवाएं प्रदान करते हैं

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