बजट में निर्मला सीतारमण ने टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को दी बड़ी सौगात, 100 बिलियन डॉलर का होगा गारमेंट सेक्टर, ‘सिटी ऑफ अपैरल’ गौतम बुद्ध नगर को मिलेगी रफ़्तार

आशु भटनागर
6 Min Read

आशु भटनागर । केंद्रीय बजट 2026-27 ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित ‘सिटी ऑफ अपैरल’ और यहां के एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) व टेक्सटाइल उद्योग के लिए नई ऊर्जा का संचार किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बजट में टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को बड़ी सौगात मिली है, जिससे न केवल औद्योगिक इकाइयां मजबूत होंगी, बल्कि रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।

- Support Us for Independent Journalism-
Ad image

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट भारत की टेक्सटाइल नीति में एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है, जिसका उद्देश्य न केवल आत्मनिर्भरता हासिल करना है, बल्कि बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी बनाना भी है।

बांग्लादेश से प्रतिस्पर्धा की नई रणनीति

बजट का एक बड़ा फोकस भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है, खासकर बांग्लादेश के मुकाबले। बांग्लादेश की कपड़ा उद्योग निर्यात-उन्मुख है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक है। 2024 में बांग्लादेश ने 52.9 बिलियन डॉलर का कपड़ा निर्यात किया, जबकि भारत का निर्यात (टेक्सटाइल, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट सहित) 37.7 बिलियन डॉलर था।

बजट 2026-27 इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक घोषणा है। वित्त मंत्री ने चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये पार्क न केवल लागत कम करेंगे बल्कि वैल्यू एडिशन (मूल्य वर्धन) में भी मदद करेंगे, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।

आत्मनिर्भरता और रोजगार पर फोकस

बजट का मूल मंत्र ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। टेक्सटाइल सेक्टर श्रम-प्रधान (Labor-intensive) है, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होता है। बजट में स्किल डेवलपमेंट पर जोर देने का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उद्योग की जरूरत के अनुसार कुशल श्रमिक तैयार करना है।

सरकार के उपायों का फोकस समावेशी विकास और ग्रामीण विकास पर भी है। हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम के जरिए परंपरागत कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

‘सिटी ऑफ अपैरल’ के नाम से प्रसिद्द गौतम बुद्ध नगर को मिलेगी नई रफ्तार

नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के चेयरमेन ललित ठुकराल के अनुसार गौतम बुद्ध नगर जिले में ‘सिटी ऑफ अपैरल’ जैसे औद्योगिक क्लस्टर एमएसएमई की रीढ़ हैं। अकेले इस जिले से 55हजार करोड़ का एक्सपोर्ट होता है जबकि 20हजार करोड़ का डोमेस्टिक कारोबार होता है। ODOP में भी जिले कि पह्चार गारमेंट एक्सपोर्ट से है। बजट में एमएसएमई और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए की गई घोषणाओं से यहां के उद्यमियों में उत्साह है। बजट में सिल्क प्रोडक्शन, मशीनरी सपोर्ट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम के साथ-साथ टेक्सटाइल सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है।

हाल ही में, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस अंतर के पीछे की वजह स्पष्ट की थी। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश एक कम विकसित देश (LDC) होने के नाते यूरोपीय संघ के बाजार में जीरो ड्यूटी का लाभ उठाता था, जिससे उसने यूरोप के 250 बिलियन डॉलर के बाजार में 30 बिलियन डॉलर का कब्जा जमा लिया।

ठुकराल के अनुसार, यह कदम स्थानीय उद्योगों को आधुनिक बनाने में मदद करेगा। बजट में लेबर-इंटेंसिव टेक्सटाइल सेक्टर के लिए मजबूत पॉलिसी पर जोर दिया गया है। यहां के एमएसएमई को जो चुनौतियां जैसे कच्चे माल की लागत और पुरानी मशीनरी का सामना करना पड़ रहा था, उसके समाधान की दिशा में यह बजट एक ठोस कदम है।

lalit thukral naec

बजट में सरकार चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने जा रही है। नोएडा में हम पहले ही यमुना प्राधिकरण के साथ मिलकर नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) बना रहे है इसके साथ ही यूपी में भी कई क्लस्टर बनाये जा रही हैं। अब इस घोषणा से टेक्सटाइल उधोग चैलेन्ज मोड में आ जाएगा

ललित ठुकराल , चेयरमेन -नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर

भविष्य का लक्ष्य: 100 बिलियन डॉलर का गारमेंट सेक्टर

भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक गारमेंट सेक्टर को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए परंपरागत बाजारों पर कब्जा और मौजूदा प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देना जरूरी है।

बजट में स्पोर्ट्स सामान के लिए की गई विशेष पहल भी महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री ने कहा कि उपकरण डिजाइन और मटेरियल साइंस में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारत को हाई क्वालिटी वाले किफायती स्पोर्ट्स सामान का ग्लोबल हब बनाने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 गौतम बुद्ध नगर के ‘सिटी ऑफ अपैरल’ और देश भर के टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक उम्मीद की किरण है। यह बजट न केवल बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों से निपटने की रणनीति है, बल्कि यह भारत के आर्थिक और सामाजिक एजेंडे का भी एक मुख्य हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नीतियों का सही क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय कपड़ा उद्योग न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी एक अलग पहचान भी बनाएगा।

Share This Article
आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे