नई दिल्ली: भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने आज व्हाट्सएप (WhatsApp) और उसकी मूल कंपनी मेटा (Meta) को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यह कंपनियां सिर्फ अपने व्यावसायिक मुनाफे (Commercial Interest) के बारे में सोचती हैं और यूजर्स की निजता (Privacy) की अनदेखी कर रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने मेटा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह यह बखूबी जानते हैं कि लोग व्हाट्सएप के आदी हो चुके हैं और आज हर कोई इसका इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे यूजर्स की जानकारी चुराएं।
“तमिलनाडु के गांव का यूजर आपकी शर्तें कैसे समझेगा?”
CJI ने मेटा से सवाल करते हुए कहा, “आप अपना कमर्शियल इंटरेस्ट जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि आपने कंज्यूमर्स को ऐप का आदी कैसे बनाया है। तमिलनाडु के किसी गांव में बैठा व्यक्ति, जो सिर्फ़ अपनी भाषा समझता है, वह आपकी जटिल शर्तें (Terms of Service) कैसे समझेगा?”
कोर्ट ने साफ किया कि व्हाट्सएप डेटा इकट्ठा करने और बेचने के लिए नहीं है, बल्कि यह एक मैसेजिंग और कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइड करने के लिए है।
डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और 5 मिनट में विज्ञापन
अदालत ने डेटा चोरी का एक गंभीर उदाहरण देते हुए कहा, “हम आपको कई उदाहरण दिखा सकते हैं। जब आप अपने डॉक्टर से दवाइयां मांगते हैं और जैसे ही वह प्रिस्क्रिप्शन भेजते हैं, आप देखेंगे कि 5 मिनट में आपके पास उन दवाओं के ऑनलाइन विज्ञापन आने शुरू हो जाते हैं। यह दर्शाता है कि आपकी निजी बातचीत की निगरानी की जा रही है।”
DPDP एक्ट का हवाला, विज्ञापन के लिए डेटा का दुरुपयोग
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने भी मेटा की दलीलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट सिर्फ प्राइवेसी के बारे में बात करता है, लेकिन मेटा ऑनलाइन विज्ञापन (Online Advertisement) के मकसद से यूजर डेटा का इस्तेमाल कर रही है।
कोर्ट ने मेटा से एक अंडरटेकिंग (Undertaking) मांगा है कि वे यूजर डेटा का इस्तेमाल कैसे करेंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर कंपनी यह अंडरटेकिंग देती है, तभी वे इस केस की मेरिट के आधार पर आगे सुनवाई करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी और यूजर डेटा के दुरुपयोग से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि व्हाट्सएप यूजर्स की निजी बातचीत और डेटा को विज्ञापन कंपनियों के साथ साझा कर रहा है, जो भारतीय कानून और यूजर्स के अधिकारों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब देखना होगा कि मेटा और व्हाट्सएप यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाते हैं।


