आशु भटनागर। महाशिवरात्रि के लिए व्रत रखने की तैयारी करते हुए हम सब काम में लगे हुए ही थे कि सुबह-सुबह नारद जी बेहद क्रोध में घर पर अवतरित हो गए। त्योहार के दिन प्रभु को क्रोध में देख हमारे सिटी पट्टी गुम हो गई हम समझ नहीं पाए कि उनको इस तरीके से सामने देखकर प्रसन्न हो या अपनी चिंता करें ।
घबराते हुए हमने उन्हें आसन ग्रहण करने की प्रार्थना करते हुए उनके क्रोध का कारण पूछा, किन्तु उन्होंने हमारा प्रश्न पूरा होने से प्रश्न पूरा होने से पहले ही हमसे प्रश्न पूछ लिया कि “क्या तुमने आज का समाचार पत्र देखा?” हमने कहा प्रभु अभी आंखें खोल ही रहे थे,आज महाशिवरात्री है तो भोलेनाथ का व्रत और पूजन की समस्त तैयारी कर रहे थे तो उसमें समाचार पत्र छूट गया। क्या आप नोएडा प्राधिकरण में देर रात हुए वर्क सर्कल के प्रभारी के कार्यभार में बदलाव से क्रोधित है क्या उसमें कुछ गलत हो गया है, प्रश्न पूछते हुए हम जल्दी-जल्दी समाचार पत्र खोलकर उनके क्रोध की संभावनाओं को खोज रहे थे।
उन्होंने वीणा का तार बजाया और समाचार पत्र में महाशिवरात्रि के विज्ञापनों के बीच छपा एक बिज़नस कॉन्क्लेव (जिसमें कॉकटेल पार्टी भी होगी) का विज्ञापन हमारे सामने आ गया हमने देखा कि वह किसी व्यापारिक संस्था का था । हमने हाथ जोड़कर प्रभु से पूछा प्रभु यह तो समाचार पत्र है बहुत सारे लोग शिव भक्त होंगे बहुत सारे लोग शिव भक्त नहीं होंगे । कुछ विपरीत धर्म के भी होंगे तो वह ऐसा कर सकते हैं उन्होंने हमें बस खा जाने वाले वाली स्थिति से देखा और बोले ध्यान से इसे पुनः देखो इसके आयोजक और मुख्य अतिथि सब ब्राह्मण है ।
हमने देखा कि उसमें मुख्य अतिथि हमारे क्षेत्र के भाजपा सांसद डॉक्टर महेश शर्मा थे और उसे आयोजित करने वाले भी शर्मा और उपाध्याय उपनाम वाले ब्राह्मण थे। हमने कहा प्रभु उन्हें पता नहीं रहा होगा कि आज शिवरात्रि है उन्होंने कार्यक्रम रख दिया होगा।
नारद जी क्रोधित होकर बोले क्या तुम जानते हो कि कलयुग कब शुरू होगा? हमने कहा कि प्रभु नहीं हमें इतना ज्ञान नहीं है। उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि कलयुग तब शुरू होगा जब ब्राह्मण ही नियमों के विपरीत जाकर अधर्म और अपयश के कार्य करना शुरू कर देगा, जब ब्राह्मण ही धर्म, तप और समाज को दिशा देने की जगह आमोद प्रमोद और तमस में डूबने लगेगा। जब सत्ता और अर्थ की चाह में पाखंड तक डूबे ब्राह्मण धर्म को सोचना बंद कर देंगे तब कलयुग आरंभ होगा और क्या यह सब तुम्हे इस विज्ञापन से होता दिखाई नहीं दे रहा है ।
हमने कहा प्रभु अब हम इस पर क्या कह सकते हैं, हम तो बस इतना जानते हैं कि मनुष्य के कर्मों का फल भगवान चित्रगुप्त देंगे । हम मनुष्यों को अच्छे या बुरे कर्म करने से रोक नहीं सकते हैं जैसा जिसका प्रारब्ध लिखा है वैसा ही उसका अंत भी होगा। अगर ब्राह्मण वर्ण में जन्म लेने के बाद भी कुछ लोग अधर्म की तरफ जा रहे हैं तो उसके दुष्परिणाम उनके निजी होंगे, किंतु सामाजिक दुष्प्रभाव निश्चित तौर पर परिलक्षित होगा। जैसा कि शास्त्रों में भी लिखा है समय अपनी गति से चलता है और बदलाव होकर ही रहेगा और अगर कलयुग का अंत होना है तो उसका आरंभ भी ऐसे ही कार्यों से होगा इसलिए प्रभु हम पर क्रोधित होने की जगह नारायण से प्रार्थना कीजिए कि जितना जल्दी हो सके कलयुग समाप्त हो। भगवान कल्कि अवतार ले और फिर से धर्म की स्थापना करें सतयुग का आरंभ करें।
नारद जी हमारी बातों से बहुत ज्यादा प्रसन्न तो नहीं दिखे फिर भी बोले कि तुम्हारी इन बातों से मैं संतुष्ट तो नहीं पर फिर भी प्रभु के लिखे को बदल भी नहीं सकता हूं इसलिए अभी के लिए यहां से जाता हूं तुम महाशिवरात्रि का त्योहार मनाओ।
हमने उन्हें प्रणाम किया और महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को जलाभिषेक की तैयारियों में लग गए। पर फिर एक बार उस विज्ञापन को देखकर सोचने लगे कि क्या वाकई ब्राह्मण कुल में पैदा हो जाने से कोई ब्राह्मण हो जा रहा है या किसी के कर्म उसके ब्राह्मण होने की दिशा और दशा तय करेंगे । क्या इस विज्ञापन में लिखे नामो के कर्म कम के कम किसी भी तरीके से ब्राह्मण वाले हैं। वह भले ही अपने आप को मिश्रा उपाध्याय शर्मा कुछ भी लिखकर ब्राह्मण शिरोमणि बनते रहे । आपको क्या लगता है ?


