राजनीति के गलियारों में इस बार पहली चर्चा क्षेत्र में एचसीएल ओर फॉक्सकॉन के सहयोग से बनी सेमीकंडक्टर कंपनी इंडिया चिप के शिलान्यास कार्यक्रम से है। दरअसल उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप का कार्यक्रम यु तो एक कॉरपोरेट कंपनी का कार्यक्रम था किंतु उत्तर प्रदेश चुनाव से महज एक वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में हो रहे इस कार्यक्रम को पूर्ण तरीके से राजनीतिक संदेश देने के लिए प्रयोग कर लिया गया। इस कार्यक्रम में वर्चुअली रुपए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा क्षेत्र के सभी सांसद विधायक विधानसभा प्रभारी उपस्थित थे। ऐसे में जेवर से क्षेत्रीय भाजपा विधायक धीरेंद्र सिंह कैसे मौका चूक जाते ? जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में सांसद और विधायक को लेकर एक तनाव हमेशा ऑन रहता है ऐसे में जेवर विधायक के क्षेत्र में हो रहे इस कार्यक्रम में भी राजनीति जमकर हुई । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस कारपोरेट कार्यक्रम में जेवर विधायक के साथ आए समर्थको ने जब से विधायक का भाषण शुरू हुआ तब से ही लगातार विधायक के समर्थन में जोर से जयकारे लगाने लगे। बात यहां भी खत्म हो जाती तो कोई बात नहीं थी समस्या इसके बाद शुरू हुई जब क्षेत्रीय सांसद डॉक्टर महेश शर्मा अपने संबोधन देने मंच पर आए तब इन्हीं समर्थको द्वारा फिर से हूटिंग की जाने लगी, दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद स्वयं धीरेंद्र सिंह को मंच से नीचे उतर कर अपने समर्थकों को शांत रहने को कहना पड़ा । इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी के जुड़ने के समाचार के चलते डॉक्टर महेश शर्मा को यह कहा गया कि वह दो से तीन मिनट और संबोधन दें ताकि बीच के गैप को भरा जा सके किंतु इसको महेश शर्मा ने स्वयं अपने भाषण में भी कहा किंतु नीचे खड़े लोगों की शूटिंग के चलते महेश शर्मा ने जैसे तैसे करके अपना संबोधन 2 मिनट पूर्व भी समाप्त कर दिया जिसके परिणाम स्वरूप एचसीएल (HCL) कंपनी को प्रधानमंत्री मोदी के आने के समय के बीच में कंपनी के प्रेजेंटेशन किए क्लिप चलानी पड़ी । घटना से हतोत्साहित कार्यक्रम में गए उद्योगपतियों ने एनसीआर खबर को बताया कि इंडिया चिप जैसी कंपनी के कार्यक्रम में इस तरीके के राजनीतिक उत्पात के बाद यह तो तय है कि यह क्षेत्र अभी भी विकास के लिए कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार नहीं है। सरकार को इस पर नियंत्रण करने की बेहद आवश्यकता है। ऐसी अराजकता अगर सरकार के पक्ष की ओर से होती रही तो क्षेत्र में कंपनियों को इन्वेस्टमेंट करने के लिए कई बार सोचना पड़ेगा।
राजनीति के गलियारों से दूसरी चर्चा नोएडा के समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता की एक पोस्ट को लेकर है जिसमें आश्रय गुप्ता ने यह दावा किया कि बीते तीन दिनों से सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते सड़कों पर जगह-जगह कूड़ा फैल गया हैं। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण में हलचल मच गई क्योंकि जिस बात को लगातार छुपाया जा रहा था वह सामने आने शुरू हो गई। यह सच भी है कि नोएडा में सफाई कर्मचारियों की राजनीति कोई नई नहीं है। बीते 35 वर्षों से इन सफाई कर्मचारियों ने प्राधिकरण को अपनी मुट्ठी में कर रखा है । एक ही जाति वर्ग से होने के कारण और सफाई कर्मचारियों की ब्लैकमेलिंग के आगे प्राधिकरण को अक्सर झुकना पड़ता है। हालत यह है कि कहने को यह कर्मचारी प्राधिकरण के कांट्रेक्टर दो कंपनियों के पैरोल पर है । पर सच यह है कि यह कर्मचारी आज भी सीधे-सीधे बातचीत नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से ही करते हैं, कांट्रेक्टर कम्पनियां बदल जाती हैं पर कर्मचारी नहीं बदलते। ऐसे में कंपनियां सिर्फ इनको सरकारी नौकरी न देने के नियम की एक काट मात्र है । एनसीआर खबर को मिली जानकारी के अनुसार कहने को तो यह हड़ताल हेल्थ विभाग को समाप्त कर वर्क सर्कल में मिलाकर काम करवाने के लिए के विरोध में हो रही है, किंतु असली मुद्दा कंपनी द्वारा कुछ कर्मचारियों को कामचोरी, लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप में निकाल देने के बाद पुनः रखने की जिद से खड़ी हुई है। हड़ताल करके कर्मचारी लगातार उन निकाले गए कर्मचारियों को उसी पद के साथ साथ उसी गाड़ी पर लगाने की मांग कर रहे हैं । वही कंपनी का कहना है कि अगर ऐसे ही जिद मान ली जाएगी तो वहां काम पर आने के बाद यह कर्मचारी बिल्कुल काम नहीं करेंगे। इससे शहर की सफाई पर फिर भी असर पड़ेगा। ऐसे में विपक्ष को भले ही सफाई को लेकर मौका मिल गया हो किंतु प्राधिकरण के लिए भी चिंतन का विषय यह है कि आखिर कब तक सफाई को लेकर किसी एक समुदाय विशेष पर निर्भरता बनाई रखी जाएगी और कब तक वह कभी भी सफाई को रोक कर ऐसे ही ब्लैकमेल करते रहेंगे प्रश्न नोएडा प्राधिकरण के समक्ष यह भी है कि बीते 35 वर्षों में भी नोएडा प्राधिकरण ने ऑटोमेटेड सफाई और कूड़ा उठाने की कार्यशैली क्यों विकसित नहीं की है।
तीसरी चर्चा भी समाजवादी पार्टी नोएडा महानगर को लेकर है, दरअसल एनसीआर खबर ने जब नोएडा महानगर से समाजवादी पार्टी के संभावित नेताओं को लेकर जनता की पसंद का सर्वे चलाया तो उसमें नोएडा महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता को लेकर लोगों ने उत्साह दिखाया ।वहीं समाजवादी नोएडा विधानसभा अध्यक्ष बबलू चौहान के लिए भी लोग चर्चा करते दिखे किंतु इस पूरे क्रम में नोएडा के युवा समाजवादी नेता और अखिलेश यादव द्वारा दीवाना का जाने वाले राहुल अवाना की हालत बहुत बुरी दिखाई दी। असली सच ये है कि सर्वे के परिणाम को देखते हुए दूसरे दिन ही एनसीआर खबर से बातचीत में राहुल अवाना ने नोएडा से चुनाव लड़ने की संभावनाओं से ही इनकार कर दिया उन्होंने स्वयं अखिलेश यादव से आश्रय गुप्ता को समर्थन देने की बात कही । जबकि लोकसभा चुनाव में गौतम बुध नगर से राहुल का टिकट की घोषणा होने के बाद जब टिकट काटा गया था तो यह वादा किया गया था कि विधानसभा चुनाव के समय राहुल नोएडा से चुनाव लड़ सकते हैं किंतु जिस तरीके से राहुल रावण ने बातचीत में यह कहा कि नोएडा की सीट जीत नहीं जा सकती है इसलिए वह किसी अन्य सीट से अपने लिए मौका देख रहे हैं उससे नोएडा में समाजवादी पार्टी की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए है । प्रश्न इसलिए भी है कि अगर पार्टी में ही इस सीट को लेकर ना जीत पाने को लेकर संगठन जे नेता इतने आश्वस्त है है तो फिर चुनाव लड़ने या टिकट लेने की इतनी मारामारी क्यों ? या फिर राहुल अवाना जैसे कई नेताओं को यह समझ आ गया है की टिकट मिलने नहीं वाला है इसलिए पहले ही पार्टी जीत नहीं सकती जैसी बातें करना शुरू कर दो, ऐसे में सच कुछ भी हो किंतु इससे 2027 में पार्टी को नुकसान होना तो तय है और पार्टी संगठन में राहुल अवाना जैसे और कितने ऐसे नेता हैं जो टिकट न मिलने की सूरत में पब्लिकली “पार्टी की हार तय है” कहना शुरू कर सकते हैं।


