आशु भटनागर । 2027 के चुनाव में अब बस 1 वर्ष का समय बचा है ऐसे में हमने आपसे वादा किया है कि हम यमुना प्राधिकरण में विकास का ढोल बजा रही उन सभी योजनाओं की सच सामने लाएंगे जिनको समय से पूरा हो जाना चाहिए था किंतु अब तक सब आंकड़ों में ही हो रहा है ।
इसी क्रम में आज बात करते है जल्द ही शुरू होने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पहले चरण के विस्थापित गांवों के किसानो और ग्रामीणों की। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण में विस्थापित सात गांवों के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी और वादों की निरंतर अनदेखी से जूझ रहे हैं।
नोएडा‑इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) के प्रथम‑चरण के विकास में कुल सात ग्राम – दयानतपुर खेड़ा, नगला‑गणेशी, नगला‑छीत्र, नगला‑शरीफ़‑ख़ान व अन्य – को 2021‑22 में ज़मीन‑अधिग्रहण के तहत विस्थापित किया गया था। तब प्रशासन ने “पशुबाड़ा, डेरी फार्म, स्वास्थ्य‑शिक्षा केंद्र तथा सस्ती आवास” के वादे किए थे, पर आज उन वादों में से कोई भी पूरी तरह से लागू नहीं हुआ है।
विस्थापित ग्रामों के प्रतिनिधियों ने बताया कि क़रार में उल्लिखित पशु‑पशुबाड़ा के लिये निर्धारित जमीन अभी तक नहीं दी गई। “हम दूध बेचते हैं, पर अब पशु नहीं पाल पा रहे। पिछले दो साल में हमारी आय में 70 % तक गिरावट आई है खेती की जमीन जाने के बाद आस-पास जमीन उपलब्ध न होने के कारण किसानों ने अलीगढ़ व बुलंदशहर में खेती की है, लेकिन खेतों की दूरी बढ़ने के साथ किसानों की खेती अब धीरे-धरे छूटने लगी है।
ग्रामीणों ने अन्य वादों को भी पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया है। यमुना प्राधिकरण के सूत्र कहते है कि “पशु‑पशुबाड़ा की योजना पर कार्य हो रहा है और सुविधाओं के निर्माण में कुछ तकनीकी अक्षमताएँ हैं। लेकिन ग्रामीण इस जवाब को अधिकारियो के “बहाने” कह कर खारिज करते हैं। ऐसे में जब विधान सभा चुनावों में बस एक वर्ष का ही समय बचा है तब युमना प्राधिकरण को जल्द से जल्द इन वादों को पूरा करने के लिए कदम उठाने चाहिए, ताकि ग्रामीणों को उनके हक की सुविधाएं मिल सकें।


