ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के विकास और सुंदरीकरण के दावे उस समय खोखले नजर आने लगते हैं, जब करोड़ों की लागत से बना प्रोजेक्ट केवल प्रशासनिक फाइलों के चलते धूल फांकने लगे। दरअसल लम्बे इंतज़ार के बाद सेक्टर साइट-4 में वेंडिंग जोन का निर्माण कार्य पूरा हुए दो माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ‘आवंटन नीति’ तैयार न होने के कारण आज भी इन क्योस्क पर ताले लटके हुए हैं।
दो महीने पहले हुआ हैंडओवर, फिर भी इंतजार
जानकारी के अनुसार, यूपीसीडा ने साइट-बी और साइट-4 में व्यवस्थित बाजार और अतिक्रमण मुक्त सड़कों के लिए वेंडिंग जोन बनाने का निर्णय लिया था। एक ही ठेकेदार को दोनों जगह कुल 218 क्योस्क बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। साइट-4 का काम जनवरी के अंत तक पूरा हो गया था और फरवरी माह में यूपीसीडा ने इसका हैंडओवर भी ले लिया। विभाग को अब केवल आवंटन प्रक्रिया शुरू करनी थी, लेकिन दो महीने बाद भी आवंटन नीति का ड्राफ्ट तैयार नहीं हो सका है।
अतिक्रमण से बढ़ रही आपराधिक घटनाएं और ट्रैफिक जाम
वेंडिंग जोन के शुरू न होने का सबसे बड़ा खामियाजा स्थानीय उद्यमियों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। उद्यमियों का कहना है कि सेक्टर की मुख्य सड़कों पर अवैध ढाबों और ठेलों का जाल बिछ गया है। अतिक्रमण की वजह से सड़कों की चौड़ाई कम हो गई है, जिससे पीक आवर्स में यहां से निकलना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
इतना ही नहीं, स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़कों किनारे फैला यह अनियंत्रित अतिक्रमण केवल यातायात की समस्या ही नहीं, बल्कि आपराधिक घटनाओं का भी केंद्र बनता जा रहा है। अंधेरा होते ही इन अवैध ठिकानों पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों का तर्क है कि वेंडिंग जोन का उद्देश्य ही सेक्टर को अतिक्रमण मुक्त कर व्यवस्थित करना था। व्यापारियों का कहना है, “जब वेंडिंग जोन बनकर तैयार है, तो आवंटन में इतनी देरी क्यों? प्रशासन की सुस्ती के कारण सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ रहा है, जबकि इन क्योस्क के खुलने से रेहड़ी-पटरी वालों को स्थायी जगह मिलती और सड़कों से जाम खत्म होता।”
वही यूपीसीडा के सूत्रों का कहना है कि आवंटन नीति को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। जैसे ही नीति को उच्च अधिकारियों से हरी झंडी मिलेगी, आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


