आशु भटनागर । 25 दिनों से ईरान- इजरायल और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध के विश्व व्यापी परिणाम अब दिखने लगे है । सरकार के तमाम भरोसे के बावजूद गैस की किल्लत को लेकर मचा बवाल अभी शांत नहीं हो रहा था कि सोमवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद लोग इंटरनेट पर भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) जैसे कीवर्ड सर्च कर रहे हैं । क्या भारत में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है, 6 साल पहले 2020 में कोरोना महामारी (Covid 19) की वजह से देश भर में लॉकडाउन लगाया गया था जिसके चलते नोएडा के उद्योगों में करने काम करने वाले कामगार नोएडा छोड़कर अपने-अपने घर चले गए थे ।
क्यों ट्रेंड हुआ लॉकडाउन , नोएडा के उद्योगों पर इसका क्या हुआ असर?
ऐसे हम बड़ा प्रश्न है कि 6 वर्ष बाद एक बार फिर से नोएडा के उद्योगों से वही सूचनाये मिलती क्यों दिखाई दे रही है ? परिणाम ये है कि इस अफवाह के चलते स्थानीय उद्योगों में कामगारों की 30% तक कटौती दिखाई दे रही है। कहीं-कहीं उद्योगपतियों का यह भी दावा है कि लेबर की ये कमी 50% भी हो सकती है। दरअसल फरवरी ओर मार्च में पहले होली, फिर नवरात्रि, ईद जैसे त्योहारो के चलते बहुत सारे कामगार छुट्टी लेकर वापस अपने अपने गांव गए हुए थे । महीने भर से युद्ध के कारण सोशल मीडिया पर पहले ही गैस की कमी को लेकर समाचार आ रहे थे विपक्ष भी इस पर प्रश्न उठा रहा था।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में भाषण देते हुए कहा पश्चिम एशिया संकट पर बयान दिया। लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने सोमवार को याद दिलाया कि कैसे कोरोना वायरस के समय ग्लोबल सप्लाई चैन बाधित हो गई थी और उन्होंने इसकी तुलना वर्तमान में हो रहे ईरान अमेरिका इजरायल के बीच के संघर्ष से उत्पन्न हो रही बाधाओं से की। संसद में उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत सरकार ने ग्लोबल संकटों का बोझ पहले भी किसानों और आम जनता पर नहीं पढ़ने दिया था। उन्होंने सदन को पश्चिम एशिया में तनाव के संबंध में भारत की स्थिति से भी अवगत कराते हुए कहा कि हम कोरोना के समय में भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं अब हमें फिर से इस तरह तैयार रहने की जरूरत है धीरज संयम के साथ शांति मन से हर चुनौती का सामना करना है ।
किंतु प्रधानमंत्री ने जिन शब्दों का उपयोग लोगों को और विपक्ष को समझाने के लिए किया था, सोशल मीडिया पर उसको लेकर अलग ही विरोध अफवाहें शुरू हो गई। सरकार विरोधी तत्वों ने लगातार लॉकडाउन को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी। जिसका परिणाम यह हुआ कि पहले से ही गैस की कमी से परेशान कामगार फिलहाल अपने गांव से वापस आने को लेकर हिचक रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण में आग में घी डालने का काम बृहस्पतिवार को देश की एक प्रमुख निजी तेल कंपनी नायरा द्वारा ₹5 पेट्रोल पर और ₹3 डीजल पर बढ़ाए जाने ने भी कर दिया है । आम जनता में यह डर बैठ रहा है कि अभी प्राइवेट कंपनियां तेल के दाम बढ़ा रही हैं हो सकता है आने वाले दिनों में सरकार के भरोसा देने के बावजूद बाकी कंपनियां भी किसी न किसी तरीके से दाम बढ़ा देंगी ।
ऐसे में अपने ऑर्डर को पूरा करने को लेकर नोएडा के उद्योगपतियों के बीच एक नए तरीके का संघर्ष शुरू हो गया है जानकारी के अनुसार नोएडा में कई फैक्ट्रियों के आगे कामगारों को लाने वाले साथियों को इलेक्ट्रिक प्रेस, पंखा, इंडक्शन से लेकर कई अन्य उपहार देने के पोस्टर लग गए है ।
सूत्रों की माने तो उद्योगपतियों के सामने दो समस्याएं खड़ी हो गई हैं पहले छुट्टी पर घर गए मजदूर को यहां बुलाने की और दूसरी लगातार गैस के बाद अब डीजल पेट्रोल के दामों उछाल के कारण से यहां उपलब्ध कामगारों को घर जाने से रोकने की ।
एनसीआर खबर से कई उद्योगपतियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पहले से ही ईरान इजरायल अमेरिका के बीच संघर्ष के कारण उनके ऑर्डर्स की डिलीवरी में परेशानी आ रही थी और अब लॉकडाउन की अफवाहों के चलते अगर लेबर का संकट बढ़ने लगा तो उद्योगपतियों के लिए समय पर आर्डर पूरा करना मुश्किल हो जाएगा जिसके चलते एक्सपोर्ट कंपनियां को बड़ा नुकसान हो सकता है । लोग अगर घरों से वापस आने को तैयार नहीं हुए तो आने वाले दिनों में न सिर्फ उद्योगों के लिए न सिर्फ माल की लागत बढ़ जाएगी बल्कि डिलीवरी समय न होने पर न होने से रिजेक्शन होने का भी खतरा है, जिसका सीधा प्रभाव न सिर्फ उद्योगपतियों पर पड़ेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा ।
एनसीआर खबर विश्लेषण : क्या सच में युद्ध के बीच भारत में लग सकता है लॉकडाउन ?
ऐसे में अगर हम सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर के रूप में पूछे जा रहे इस प्रश्न पर चर्चा करें कि क्या अमेरिका ईरान युद्ध की वजह से भारत में लॉकडाउन लगेगा तो इसका जवाब है नहीं, बिल्कुल भी लॉकडाउन नहीं लगेगा ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में दिए भाषण के दौरान न ही ऐसी कोई बात कही है, ना ही सरकार के सूत्रों से कोई ऐसा संकेत दिया जा रहा है कि लॉकडाउन लग सकता है । सच तो यह है कि कोरोना महामारी के समय उसे फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया था। उस समय दुनिया भर के देशों में लॉकडाउन को अपने-अपने यहां लागू किया था किंतु ईरान अमेरिका युद्ध के चलते ऐसे हालात नहीं है कि लॉकडाउन लगाया जा सके।
सरकार ने लगातार यह कहा है कि उसके पास अभी भी लगभग 60 दिनों का तेल उपलब्ध है और वह अब भी युद्ध के कारण तेल के भंडारों को दुरुस्त रखने के लिए खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से तेल खरीदने पर काम कर रही है। अफवाहों के चलते हो रहे एलपीजी संकट से निबटने के लिए देशभर में सरकार विभिन्न सख्त फैसले ले रही हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी को रोका जा रहा है, पीएनजी कनेक्शन पर जोर दिया जा रहा है । यहां तक की छोटे सिलेंडरों को भी गैस एजेंसी से दिया जा रहा है ।
ऐसे में फिलहाल लॉकडाउन को लेकर हो रही सभी चर्चाएं सिर्फ अफवाहें हैं। एनसीआर खबर अपने पाठकों से भी अपील करता है कि अगर उनके आसपास लोगों में लॉकडाउन को लेकर कोई भ्रम या डर का माहौल है तो वह उसे इस समाचार को शेयर करने करके दूर कर सकते हैं ताकि देश में अफवाहों से अराजकता न फैले ।


