आशु भटनागर । नौएडा प्राधिकरण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और मानवीय निर्णय लेते हुए, मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) ने लगभग 4,800 श्रमशक्ति आपूर्तित (आउटसोर्सिंग) कर्मियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस योजना को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के साथ ही अब प्राधिकरण के इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारी-भरकम खर्च की चिंता नहीं करनी होगी।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जनरल इंश्योरेंस कंपनी को इस योजना के लिए चुना गया है। यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय है जो दिन-रात शहर की व्यवस्था को सुचारू बनाने में जुटे रहते हैं।
215वीं बोर्ड बैठक के फैसले पर लगी मुहर
प्राधिकरण के कर्मियों को मेडिकल सुविधा देने का यह ‘ऐतिहासिक’ प्रस्ताव 26 अक्टूबर 2024 को आयोजित 215वीं बोर्ड बैठक में रखा गया था। अब सीईओ कृष्णा करुणेश द्वारा इसके अनुपालन को हरी झंडी मिलने के बाद, इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
क्या मिलेगा लाभ?
बीमा राशि: प्रत्येक कर्मी को सालाना 5.00 लाख रुपये तक की मेडिकल सुविधा मिलेगी।
परिवार की सुरक्षा: इस योजना में कर्मी के साथ-साथ उनके परिवार के 5 आश्रित सदस्य भी शामिल होंगे।
प्रीमियम का भुगतान: श्रमशक्ति आपूर्तिकर्ता एजेंसी के माध्यम से प्रति कर्मी 10,000 रुपये का वार्षिक प्रीमियम भुगतान किया जाएगा।
कोई वेटिंग पीरियड नहीं: पॉलिसी के पहले दिन से ही इलाज की सुविधा मिलेगी, जिसमें गंभीर बीमारियाँ भी शामिल हैं।
अस्पतालों का जाल: नौएडा और दिल्ली के अधिकांश बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल इस पैनल में शामिल होंगे।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
देखा जाए तो यह निर्णय काफी समय से लंबित था। नौएडा प्राधिकरण में कार्यरत इन 4,800 कर्मियों के सामने एक अजीब सी ‘तकनीकी’ समस्या खड़ी हो गई थी। ईएसआई (ESI) विभाग के नियमों के अनुसार, जिन कर्मियों का वेतन 21,000 रुपये से अधिक होता है, वे ईएसआई सुविधाओं से बाहर हो जाते हैं।
वेतन वृद्धि के कारण प्राधिकरण के लगभग सभी कर्मचारी इस दायरे से बाहर हो गए थे, जिससे उनके पास कोई स्वास्थ्य सुरक्षा कवर नहीं बचा था। लंबे समय से ये कर्मचारी मेडिकल सुविधा की मांग कर रहे थे। प्राधिकरण ने विभिन्न कंपनियों (SBI General, United India, HDFC Ergo, Bajaj Allianz) के प्रस्तुतीकरण देखने के बाद एक ठोस नीति बनाई और सबसे बेहतर विकल्प के रूप में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस का चयन किया।
संपादकीय टिप्पणी: एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल
हमारा मानना है कि नौएडा प्राधिकरण का यह कदम अन्य सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के लिए एक सर्वोत्तम उदहारण (Example) है। अक्सर आउटसोर्सिंग कर्मियों को वह सम्मान और सुविधा नहीं मिल पाती जो नियमित कर्मचारियों को मिलती है। लेकिन 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर देकर सीईओ कृष्णा करुणेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों का स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।
यह न केवल आउटसोर्सिंग कर्मियों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में आपातकालीन स्थितियों में उनके परिवारों को वित्तीय संकट से भी बचाएगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस योजना का क्रियान्वयन पारदर्शिता के साथ होगा ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े कर्मचारी को इसका पूरा लाभ मिल सके।


