भारतीय संस्कृति में एक प्रचलित धारणा है कि बढ़ती ताकत और प्रभाव के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं, और लोक-नियमों का पालन करने का दबाव अधिक होता है। हालांकि, नोएडा जैसे शहरी क्षेत्रों में यह देखने को मिलता है कि कुछ प्रभावशाली संस्थाएं नियमों को परे रखकर अपना मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसी कड़ी में, सेक्टर 11 स्थित प्रतिष्ठित, किंतु निवासियों के लिए अक्सर कुख्यात होते जा रहे मेट्रो हॉस्पिटल का नाम चर्चा में है, जिस पर नोएडा प्राधिकरण ने हाल ही में पर्यावरणीय और निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई की है।
अब इन्हीं सब शिकायतों के बाद, नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग ने संज्ञान लेते हुए मेट्रो के सेक्टर 11 और सेक्टर 12 में स्थित दोनों अस्पतालों में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) का निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि दोनों ही अस्पतालों में STP और ETP से शोधित जल का पुनर्चक्रण (reuse) नहीं किया जा रहा था। इसके विपरीत, इस शोधित जल को सीधे-सीधे सीवर लाइन में बहाया जा रहा था। प्राधिकरण ने इस अनियमितता के कारण सीवर लाइन पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार और ओवरफ्लो की समस्या को देखते हुए अस्पताल पर 10,000 रुपये का अर्थदंड लगाने का निर्देश जारी किया है।

दरअसल, सेक्टर 11 में मेट्रो हॉस्पिटल के अत्यधिक फैलाव और इसके कारण निवासियों पर पड़ने वाले अतिक्रमण तथा अन्य परेशानियों को लेकर अतीत में भी तमाम शिकायतें आती रही हैं। आरोप है कि मेट्रो ग्रुप इन शिकायतों को कभी अपने संबंधों के आधार पर, तो कभी निवासियों को डिस्काउंट कार्ड देकर “प्रबंधित” करता रहा है, लेकिन अपने संचालन में सुधार लाने की कोशिश नहीं करता।
सेक्टर 11 में रहने वाली समाजसेविका और पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अंजना भागी ने एनसीआर खबर से बात करते हुए अस्पताल द्वारा की जा रही इस “दबंगई” पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब भी इन सब मुद्दों को लेकर मांग उठाई जाती है, तो हॉस्पिटल अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर या तो निवासियों को डरा देता है, या फिर व्यवस्था को अपने पक्ष में “मैनेज” करने की कोशिश करने लगता है। उन्होंने आगे कहा कि नालियों में अपना वेस्ट बहाना तो सिर्फ एक मुद्दा है, इसके अलावा अस्पताल के कारण सेक्टर के निवासियों को सड़कों पर लगने वाले जाम और अवैध पार्किंग से भी लगातार निपटना पड़ता है।
एनसीआर खबर को यह भी पता चला है कि नोएडा प्राधिकरण के केवल जल विभाग से ही नहीं, बल्कि नियोजन विभाग ने भी बीते दिनों सेक्टर 11 स्थित मेट्रो अस्पताल को स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण न करने तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट और अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त न करने के लिए नोटिस जारी किया है। नियोजन विभाग ने इस मामले में कड़ी कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी है, जो अस्पताल के संचालन की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
एनसीआर खबर ने इस पूरे प्रकरण पर मेट्रो हॉस्पिटल का पक्ष जानने के लिए प्रवक्ता छाया मल्होत्रा से संपर्क करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि वह संबंधित अधिकारियों से जानकारी एकत्र कर अपना पक्ष रखेंगी।
ऐसे में ऑपरेशन मेट्रो हॉस्पिटल के जरिये एनसीआर खबर इस पूरे प्रकरण पर अपनी पड़ताल जारी रखेगा, जिसमें मेट्रो हॉस्पिटल का आधिकारिक पक्ष, प्राधिकरण के अन्य विभागों द्वारा जारी की गई सूचनाएं, और क्षेत्र के निवासियों की विस्तृत शिकायतें शामिल होंगी। यह देखना होगा कि क्या प्रभावशाली संस्थाएं वास्तव में बढ़ती जिम्मेदारी को स्वीकार करती हैं, या फिर नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी जारी रखती हैं।


