लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों और राजनीतिक सक्रियता के बीच दादरी में आयोजित समाजवादी पार्टी की रैली को लेकर सूबे का सियासी पारा चढ़ गया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस रैली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘दुर्भावना’ वाली रैली करार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी की यह रैली सद्भावना के बजाय दुर्भावना का प्रदर्शन बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन के जरिए सपा एक ऐसे दौर की यादें ताजा करने की कोशिश कर रही है, जब प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदतर थी और अपराधियों का बोलबाला था।
सपा शासनकाल पर उठाए सवाल केशव प्रसाद मौर्य ने तीखे शब्दों में कहा, “यह रैली 2012 से 2017 के उस अंधेरे अध्याय को फिर से जीवित करने का प्रयास थी, जिसे प्रदेश की जनता पहले ही खारिज कर चुकी है।” उन्होंने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी राजनीति ने उत्तर प्रदेश को अराजकता और असुरक्षा की ओर धकेला था।
‘जनता को चाहिए सुशासन और विकास’ उपमुख्यमंत्री ने अपने बयान में वर्तमान सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश बदल चुका है। उन्होंने कहा, “आज का उत्तर प्रदेश जागरूक है। जनता को न गुंडाराज चाहिए और न ही तुष्टीकरण। प्रदेश की जनता केवल सुशासन, सुरक्षा और निरंतर विकास के पथ पर चलना चाहती है।”
बीजेपी की मजबूती पर जोर केशव प्रसाद मौर्य ने आगामी चुनावों को लेकर स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जनता का मन साफ है और वह तीसरी बार भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि जनता चाहती है कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संकल्प और सशक्त हो तथा प्रधानमंत्री के हाथ और अधिक मजबूत हों।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा दादरी की इस रैली को समाजवादी पार्टी के आगामी चुनावी अभियान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन भाजपा के इस तीखे हमले ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान सीधे तौर पर सपा के ‘पिछड़े और अल्पसंख्यक’ कार्ड को काउंटर करने की एक रणनीति है।
आपको बता दें कि दादरी में आज हुई रैली में अखिलेश यादव ने सत्ताधारी भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे ‘नकारात्मक विचारधारा’ वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने भाजपा को ‘ड्राईक्लीन की दुकान’ बताते हुए आरोप लगाया कि भ्रष्टाचारी लोग इसमें शामिल होकर पाक-साफ हो रहे हैं। उन्होंने ‘अग्निवीर योजना’ और ‘पेपर लीक’ को लेकर युवाओं की निराशा का जिक्र किया और कहा कि समाजवादी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी। संविधान के मुद्दे पर उन्होंने कहा, “जो लोग 400 सीटें लाकर संविधान बदलने की बात कर रहे थे, वे अब भूमिगत हो गए हैं। उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलेगा।” अखिलेश यादव ने अपने भाषण में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि समाज के पीछे छूटे हुए वर्गों को मुख्यधारा में लाने का एक निरंतर चलने वाला अभियान है। उन्होंने नोएडा में कथित फर्जी एनकाउंटर और अधिकारियों की हताशा का भी जिक्र किया।
फिलहाल, समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस तल्ख टिप्पणी के बाद राज्य में पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं।


