आशु भटनागर । राजधानी दिल्ली के पास उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गौतम बुद्ध नगर में बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन में अब कुछ ही घंटे शेष रह गए है। प्रधानमंत्री के द्वारा होने वाले इस उद्घाटन को भारतीय जनता पार्टी द्वारा विशाल ऐतिहासिक रैली में बदल देने से स्थानीय भाजपा नेताओं और जिला प्रशासन बेहद दबाव में है ।दरअसल दो से तीन लाख लोगों की रैली को उद्घाटन समारोह के साथ जोड़ देने से एक कार्यक्रम बेहद बड़ा हो गया है। ऐसे में गौतम बुद्ध नगर ही नहीं बल्कि उसके पास के पांच जिलों की 14 विधान सभाओ से जनता को लाने का दबाव भाजपा के नेताओं पर बढ़ गया है वहीं प्रशासन भी इसके लिए लगातार इंतजाम करने में लगा हुआ है।
जहां मेधा रूपम के निर्देशन में जिला प्रशासन कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की चूक न होने देने के लिए काम करने पर लग गया है तो वही लामिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में नोएडा पुलिस कमिश्नरेट अधिकारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की सुरक्षा से लेकर मंच व्यवस्था चौकस करने में लग गए हैI कार्यक्रम के लिए आ रहे गणमान्य राजन्कीय अतिथियों की वयवस्था ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ और यूपी सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर एनजी रवि कुमार के साथ एसीईओ सोम्य श्रीवास्तव के जिम्मे हैं। तो यमुना प्राधिकरण में नोएडा इंटरनेशनल एअरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेन्द्र भाटिया के लिए ये अप्रितम अनुभव है I दरअसल यमुना प्राधिकरण में एसीईओ शैलेन्द्र भाटिया ही वो अधिकारी हैं जिन्होंने इस परियोजना की नीव पर कार्य शुरू किया और अब इसके लोकार्पण में भी प्रमुख भूमिका निभा रहे है। यधपि इस परियोजना के जनक रहे पूर्व सीईओ डा अरुणवीर सिंह उतने भाग्यशाली नहीं रहे कि उनके सीईओ रहते ये संभव हो पाता, फिर भी माना जा रहा है कि उन्हें विशेष भूमिका में कार्यक्रम में रखा जाएगाI

दावा किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए लगभग 4000 बसों को जनता को ले जाने के लिए लगाया गया है वहीं भाजपा के नेताओं को मंडल वाइज और जनप्रतिनिधियों के तौर पर जिम्मेदारी सौंप जा रही है । ऐसे में जहां एक और सांसद डॉक्टर महेश शर्मा राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर विधायक तेजपाल नागर, धीरेंद्र सिंह और पंकज सिंह से लेकर एमएलसी नरेंद्र भाटी, श्री चंद शर्मा और नगर पालिका अध्यक्ष गीता पंडित अपने-अपने क्षेत्र में सभाएं कर रहे हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं बीते रविवार यहाँ आ कर वय्व्स्थाओ को देख चुके हैं तो आज देर शाम उनके फिर यहाँ आने की चर्चा है ।
दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी बीते एक सप्ताह से यही डेरा डाले हुए है और संगठन स्तर पर भी इसके लिए तमाम तैयारियां की जा रही हैं । ऐसे में संगठन के स्तर पर पहली बार पदाधिकारी में कशमकश और तनाव दोनों देखा जा रहा है जानकारों की माने इससे पहले गौतम बुद्ध नगर जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर 3 बार मौजूद रहे विजय भाटी और पूर्व जिलाध्यक्ष गजेंद्र मावी ने ऐसे ऐतिहासिक कार्यक्रमों में बेहद परिपक्वता दिखाई और उनके समय हुए बड़े कार्यक्रम को सुचारू रूप पर रूप से करने में सफल योगदान दिया है । किंतु मात्र 1 वर्ष पूर्व बने युवा जिला अध्यक्ष के समक्ष अनुभव की कमी दिखाई दे रही है ।
इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रदेश अध्यक्ष संगठन मंत्री से लेकर सभी बड़े नेता भी एक हफ्ते से यही डेरा डालकर बैठे होने के कारण भाजपा कार्यकर्ताओं में दबाव और बेचैनी देखी जा रही है । बताया जा रहा है कि लाखों की भीड़ को संभालने के लिए लगभग 1500 से 2000 ऐसे वालीयंटर कार्यकर्ता चुने जा रहे हैं जो भीड़ के समक्ष जलपान की व्यवस्था को सुचारू रख सकें । यदि संगठन की ओर से यह भी बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में जाने वाले लोगों के भोजन की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में सुबह 6:00 से तैयार होकर जाने वाले लोग किस तरीके से दोपहर एक दो बजे तक घर से किए गए नाश्ते के सहारे रहेंगे यह भी चर्चाएं हो रही है।
दरअसल 200000 लोगों को 6 से 8 घंटे तक बिना भोजन या भोजन के पैकेट के बैठने के साथ एक समस्या यह है कि जहां ये कार्यक्रम हो रहा है वहां से कई किलोमीटर दूर तक किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत खाने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है ऐसे में संगठन द्वारा तय की गई जगह पर गाड़ियां तो लग गई है किंतु लोगों में खाने की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं हो रही है ।
जिले के दो सांसद, तीन विधायक, 2 एमएलसी के अलावा पास के जिलों के सांसद और विधायकों की सक्रियता से यह माना जा रहा है कि जिला संगठन की ये नाकामियां उनके अनुभव के सहारे छप जाएगी। किंतु संगठन के शीर्ष नेतृत्व को यह एहसास हो रहा है कि जिले में फिलहाल सब कुछ सही नहीं है ऐसे में जैसे तैसे रैली को करके एक बार फिर से संगठन की कमान को कसे जाने की चर्चाएं भी हो रही है ।
वहीं जिले में जनप्रतिनिधियों के बीच शीत युद्ध भी एक बार फिर से दिखाई दे रहा है जनप्रतिनिधियों द्वारा समाचार पत्रों में जारी किए गए विज्ञापनों में एक दूसरे को ना दिखाई देने के चर्चे भी फिलहाल दबी जुबान में हो रहे हैं। सारे संघर्ष के बावजूद सब की एक ही इच्छा है कि किसी तरीके से दो से तीन लाख लोगों की भीड़ इस कार्यक्रम में आ जाए और प्रधानमंत्री की नजरों में उनका कद बढ़ जाए। ऐसे में बड़ा प्रश्न यही है कि कल प्रधानमंत्री की रैली में कौन नेता अपने नंबर बनाने में कामयाब रहेगा और कौन नेता इस रेस में पीछे रह जाएगा यह कल रैली के बाद ही दिखाई देगा ।


