नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों का मेट्रो का सपना एक बार फिर फाइलों में उलझ गया है। केंद्र सरकार द्वारा ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को एक बार फिर से संशोधन के लिए भेजे जाने से आक्रोशित निवासियों ने ‘नेफोवा’ (NEFOWA) के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन किया। सेक्टर-71 चौराहे के पास नोएडा एक्सटेंशन की ओर जाने वाले अंतिम मेट्रो पिलर के समीप आयोजित इस विरोध-प्रदर्शन में सैकड़ों स्थानीय निवासियों ने हिस्सा लिया।

रस्सी से पिलर खींचकर जताया अनोखा विरोध
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशासन को जगाने के लिए एक अनूठा और प्रतीकात्मक तरीका अपनाया। प्रदर्शनकारियों ने एक मोटी रस्सी की मदद से मेट्रो पिलर को खींचकर नोएडा एक्सटेंशन की ओर ले जाने का प्रयास किया। यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन इस बात का संकेत था कि पिछले एक दशक से मेट्रो केवल कागजों पर ही चल रही है, जबकि हकीकत में निवासी अभी भी विकास से कोसों दूर हैं।
10 साल से ‘वादे’ और ‘निराशा’ का खेल
प्रदर्शन में शामिल निवासियों का कहना है कि वे रोजाना घंटों भीषण ट्रैफिक जाम में फंसते हैं। क्षेत्र में कोई सुलभ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था न होने के कारण कामकाजी पेशेवरों का जीवन नारकीय हो गया है। पिछले 10 वर्षों से मेट्रो लाने के केवल राजनीतिक वादे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर अब तक एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों लोगों के साथ यह निरंतर अन्याय है। बार-बार डीपीआर निरस्त करना यह दर्शाता है कि सरकार हमारे क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों के प्रति गंभीर नहीं है। हम केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल मंजूरी और निर्माण कार्य शुरू करने की मांग करते हैं।”
“आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए”
एक्टिव सिटीजन आलोक कुमार ने इस मुद्दे को आधारभूत संरचना के अभाव से जोड़ते हुए कहा, “इतना तेजी से विकसित हो रहा यह क्षेत्र आज बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का न होना यहाँ के निवासियों की उत्पादकता और सेहत दोनों को प्रभावित कर रहा है। सरकार को अब यह समझना होगा कि यह क्षेत्र अब और विलंब बर्दाश्त नहीं करेगा।”
आंदोलन होगा और उग्र: 26 अप्रैल को ‘जंतर-मंतर’ का ऐलान
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मेट्रो परियोजना को जल्द स्वीकृति नहीं दी गई, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा। नेफोवा ने अपनी अगली रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि 26 अप्रैल को हजारों की संख्या में निवासी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट करेंगे।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की मेट्रो परियोजना अब महज एक यातायात का मुद्दा नहीं, बल्कि निवासियों के धैर्य की परीक्षा बन गई है। क्या सरकार इस बार संवेदनशीलता दिखाते हुए इस क्षेत्र को आधुनिक परिवहन प्रणाली से जोड़ेगी, या ये पिलर फिर से केवल दशकों पुराने वादों के मूक गवाह बनकर खड़े रहेंगे? यह अब बड़ा सवाल बन चुका है।


