वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का निधन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जताया शोक

NCR Khabar Internet Desk
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नोएडा। भारतीय राजनीति के एक सुनहरे अध्याय का बुधवार को दुखद समापन हो गया। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का नोएडा सेक्टर 40 स्थित उनके आवास (एफ-52) पर निधन हो गया। वह कुछ समय से अपने परिवार के साथ यहीं रह रही थीं। उनके निधन की खबर ने न केवल कांग्रेस परिवार को, बल्कि देश की राजनीतिक बिरादरी को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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एक प्रखर और सशक्त नेतृत्व का अंत

मोहसिना किदवई केवल एक राजनेता नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय राजनीति में शुचिता, संघर्ष और वैचारिक स्पष्टता का प्रतीक थीं। एक ऐसे दौर में जब राजनीति में मूल्यों का क्षरण हो रहा है, किदवई जैसी शख्सियत का जाना एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जिस दृढ़ता के साथ गांधीवादी विचारधारा और संवैधानिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने यह सिद्ध किया कि सत्ता का उपयोग जनसेवा के लिए किस निष्ठा के साथ किया जाना चाहिए।

शीर्ष नेतृत्व ने जताया दुख उनके निधन पर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें पार्टी की एक मजबूत स्तंभ बताया है, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में संगठन का साथ निभाया। गांधी परिवार के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और कठिन से कठिन चुनौतियों में भी विचलित न होने का उनका स्वभाव ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता था।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसमूह

जैसे ही उनके निधन की खबर फैली, नोएडा स्थित उनके आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लग गया। पूर्व सांसद संदीप दीक्षित सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता उनके अंतिम दर्शन करने और परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे। स्थानीय स्तर पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।

क्या खोया हमने?

आज की राजनीति में जहां अवसरवाद हावी है, मोहसिना किदवई का जीवन हमें याद दिलाता है कि राजनीति सेवा का माध्यम है। उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह आने वाले समय में उन युवाओं के लिए एक मशाल की तरह होगी जो ईमानदारी से देश सेवा करना चाहते हैं। उनकी कमी केवल मंचों पर ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की उन बहसों में भी खलेगी जहां वे हमेशा तर्क और तल्खी के साथ अपनी बात मजबूती से रखती थीं।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है, लेकिन उनके विचार और संघर्ष की गाथाएं सदैव जीवित रहेंगी।

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