नई दिल्ली: सुपरटेक के हजारों घर खरीदारों के लिए आज का दिन न्यायपालिका से जुड़ी बड़ी गतिविधियों का रहा। दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान कंपनी की परियोजनाओं के प्रबंधन और समाधान पेशेवर (IRP) की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किए गए।
दिल्ली उच्च न्यायालय: आईआरपी की याचिका पर नोटिस जारी
आज दिल्ली उच्च न्यायालय में आईआरपी हितेश गोयल द्वारा दायर एक रिट याचिका माननीय न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कौरव के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी। इस मामले में आईआरपी का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजशेखर राव ने रखा, जबकि आईबीबीआई (IBBI) की ओर से एएसजी श्री एन. वेंकटरमण उपस्थित हुए। घर खरीदारों की संस्था ‘नेफोवा’ (NEFOWA) की ओर से अधिवक्ता सुश्री संगीता भारती और श्री कुमार मिहिर ने पक्ष रखा।
बता दें कि नेफोवा ने इस मामले में पहले ही एक कैविएट (Caveat) दायर की थी। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आईबीबीआई और नेफोवा को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, न्यायालय ने इस मामले में कोई स्टे ऑर्डर (Stay Order) देने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल, 2026 के लिए निर्धारित की गई है।
सुप्रीम कोर्ट: आईआरपी को सभी परियोजनाओं से किया बाहर
इसी के साथ, सुपरटेक घर खरीदारों से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में भी हुई। शीर्ष अदालत ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए आईआरपी हितेश गोयल को सुपरटेक की सभी परियोजनाओं से तत्काल प्रभाव से बाहर कर दिया है। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब परियोजनाओं का कार्य एक निगरानी समिति की देखरेख में पूरा होना है, तो आईआरपी की भूमिका की आवश्यकता नहीं है।
NBCC को सौंपी गई पूरी जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों का विस्तार करते हुए एक बड़ा फैसला सुनाया। पूर्व के आदेशानुसार, सुपरटेक की केवल 14 परियोजनाओं को एनबीसीसी (NBCC) द्वारा पूरा किया जाना था, लेकिन आज के आदेश के बाद अब सुपरटेक की सभी परियोजनाओं के निर्माण और पूर्णता का उत्तरदायित्व एनबीसीसी को सौंप दिया गया है। यह कदम आम्रपाली मामले की तर्ज पर उठाया गया माना जा रहा है, जिससे घर खरीदारों में समयबद्ध तरीके से कब्जा मिलने की उम्मीद जगी है।
नेफोवा (NEFOWA) ने किया स्वागत
इस न्यायिक घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश का स्वागत करते हैं। आईआरपी को हटाने और एनबीसीसी को सभी परियोजनाओं की जिम्मेदारी देने से पारदर्शाता आएगी। हमें पूरी उम्मीद है कि अब आम्रपाली की तरह सुपरटेक के परेशान खरीदारों को भी जल्द ही अपने घरों की चाबियां मिल सकेंगी।”
यह आदेश उन हजारों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है जो पिछले कई वर्षों से अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने के बाद भी घरों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।


