आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी नोएडा में बीते 12 अप्रैल को हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन ने राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए एक निर्णायक मोड़ की तरह काम किया है। पिछले एक दशक से मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था और औद्योगिक विकास पर केंद्रित रहने वाली सरकार की सोच में अब ‘श्रमिक कल्याण’ एक अनिवार्य प्राथमिकता बनकर उभरा है। इस आंदोलन के बाद न केवल श्रमिकों के वेतन में 21% की त्वरित वृद्धि की गई, बल्कि अब उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर एक विस्तृत कार्ययोजना पर मंथन शुरू हो गया है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और पुलिस कमिशनरेट की नई निगरानी व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने नोएडा को 8 जोन में विभाजित किया है। इन जोनों में जोनल और सेक्टर मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की गई है, जो सीधे फैक्ट्रियों का भ्रमण कर रहे हैं। इनका कार्य केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि संस्थानों में श्रमिकों के लिए निर्धारित सुविधाओं और नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।
सुरक्षा और विवाद प्रबंधन के मोर्चे पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘डीसीपी (औद्योगिक)’ का एक समर्पित पद सृजित किया है। यह विंग 25 अधिकारियों की टीम के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की निगरानी करेगी और उद्यमियों व श्रमिकों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए एक सेतु का कार्य करेगी।
बुनियादी ढांचे का विकास: रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर , श्रमिक सुविधा केंद्र, ईएसआईसी अस्पताल और हॉस्टल
श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों ने कई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की है राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके।
यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल
चार आधुनिक हॉस्टल : नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के अनुसार इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा। चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा
रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर : नोएडा प्राधिकरण ने दो और भूखंडों को चिह्नित किया है। यह दोनों प्लाट रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (आरएंडडी) के लिए होंगे। इसको कंपनी को आवंटित किया जाएगा। इसमें औद्योगिक जगत में हो रही नई क्रांतियों पर रिसर्च की जाएगी। इसके अलावा दो कौशल विकास के लिए भूखंड चिह्नित किए गए हैं।
ग्रेटर नोएडा में बनेंगे श्रमिक हॉस्टल, वर्किंग वुमन हॉस्टल
श्रमिक हॉस्टल: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पतवारी में सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर 5 एकड़ भुमि पर ‘श्रमिक हॉस्टल’ का निर्माण प्रस्तावित कर दिया गया है I इसके लिए प्लानिंग विभाग सभी आवश्यक कार्यो पर मंथन कर रहा है।
वर्किंग वुमन हॉस्टल: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एन.जी. रवि कुमार ने इकोटेक-1 में 3 एकड़ के दो और इकोटेक-2 में 1 एकड़ का एक हॉस्टल (विशेषकर कामकाजी महिलाओं के लिए) बनाने के निर्देश दिए हैं।
ईएसआईसी (ESIC) अस्पताल: ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में करीब 7 एकड़ भूमि पर 300 बेड का अत्याधुनिक ईएसआईसी अस्पताल बनाया जाएगा। श्रमिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री इसका वर्चुअल भूमि हस्तांतरण करेंगे। जिसके बाद आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री स्वयं इसकी आध्र्शिला रखने आ सकते हैं।
श्रमिक सुविधा केंद्र: ग्रेटर नोएडा वेस्ट अभी एक ‘श्रमिक सुविधा केंद्र’ का निर्माण प्रस्तावित है, जो श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान का केंद्र बनेगा। इसमें मनोरंजन के लिए टीवी एवं सुविध्याए विकसित की जायेंगी।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया और भविष्य की चुनौतियाँ
सरकार के इस कदम पर औद्योगिक संगठनों ने मिली-जुली लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर’ के अध्यक्ष ने इन योजनाओं को ‘वरदान’ बताते हुए कहा कि इसकी आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। मुख्य्म्नात्री योगी आदित्यनाथ की सर्कार उधोगपतियो और शर्मिको दोनों के हित के लिए कार्य कर रही है इससे उधोगो में तेजी आयेगी।
वहीं, ‘नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन’ (NEA) के अध्यक्ष विपिन मल्हार ने इसे एक महत्वपूर्ण वापसी बताया। उन्होंने साझा किया कि 1980 के दशक तक प्राधिकरणों द्वारा ‘श्रमिक कुंज’ जैसी योजनाएं लाई जाती थीं, जिन्हें बाद की सरकारों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार द्वारा श्रमिकों के बारे में पुनः सोचना उद्योगों के लिए एक शुभ संकेत है।
हालांकि, योजनाएं अभी अपने प्रारंभिक चरण में हैं और इन्हें धरातल पर आने में 1 से 2 वर्ष का समय लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 12 लाख से अधिक श्रमिकों की आबादी वाले इस औद्योगिक क्षेत्र में ये शुरुआती योजनाएं कितनी प्रभावी होंगी, यह समय ही बताएगा। वर्तमान में, सरकार का ध्यान इस बात पर है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों का कल्याण भी सुनिश्चित हो, ताकि भविष्य में 12 अप्रैल जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


