आशु भटनागर। उत्तर प्रदेश के शो विंडो नोएडा में हरनंदी नदी के डूब क्षेत्र में बसे छिजारसी और चोटपुर गांव में इन दिनों हड़कंप मचा है। मामला उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसपोर्टेशन कमेटी के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को जानकारी दिए जाने के बाद डूब क्षेत्र में 13000 से अधिक अवैध घरों में चल रहे अवैध बिजली के कनेक्शन काट देने का है। एक साथ अचानक आये इस भूचाल के बाद इन दो गांव के अवैध अतिक्रमण कर बनाए गए घरों के लोगों लगभग 50000 लोगों का जीवन अब बिना बिजली और बिना पानी के कट रहा है।
बिजली कटने के बाद परेशान लोगों ने विधायक पंकज सिंह से लेकर थाने और जिलाधिकारी के आफिस पर प्रदर्शन किया। मामले की जानकारी विधायक पंकज सिंह तक पहुंची तो उन्होंने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय में बात कर वैध कनेक्शन को ना काटे जाने और अन्य लोगों के लिए कोई अस्थाई व्यवस्था करने की बात करने का दावा किया। इधर पंकज सिंह के विरोध में माहौल बना तो मौका देखते ही पूर्वांचल के बाहुबली नेता बृजभूषण सिंह की पुत्री शालिनी सिंह भी अपने स्थानीय संगठन एनसीएफ के साथ एक्शन में आई और उन्होंने मौके पर जाकर पीड़ितों से मुलाकात का माहौल को अपने पक्ष में करने का सफल प्रयास किया और दावा किया कि वह उनकी लड़ाई लड़ेंगे और सरकार तक पहुंचाएंगे।
मामला बिजली से पानी पर पहुंचा तो शालिनी सिंह ने वहां पानी के टैंक करो की व्यवस्था करवानी शुरू कर दी । 3 दिन से चल रहे इस पूरे प्रकरण में रोचक बात यह भी रही कि पंकज सिंह और शालिनी सिंह दोनों ही भाजपा से जुड़े हुए हैं ऐसे में जनता सवाल पूछने लगी की नोएडा में पंकज सिंह को हराने का दावा करने वाले विपक्ष के नेता अब कहां है? विपक्ष के नेताओं की ढूंढ मची तो लोगों ने लोकसभा का चुनाव लड़ चुके समाजवादी पार्टी के नेता डॉक्टर महेंद्र नागर से लेकर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके सुनील चौधरी और महानगर अध्यक्ष आश्रय गुप्ता के लिए पूछताछ करनी शुरू कर दी हैI
बिजली माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही माफिया बनाने का आरोप, भ्रष्ट तंत्र पर गंभीर सवाल!
नोएडा में 50,000 से अधिक की आबादी वाली 13 कॉलोनियों में बिजली आपूर्ति की माँग को लेकर वहाँ के लोग 20 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के तहत हिण्डन नदी के निकट, छिजारसी,चोटपुर, सोरखा एक्सटेंशन, सैनिक विहार, गणेश नगर, विष्णु नगर कॉलोनी सेक्टर 115 नोएडा, अम्बेडकर सिटी, उन्नति विहार सेक्टर 123 नोएडा, साईं एनक्लेव, राधा कुंज, कृष्णा कुंज, ककराला खासपुर एक्सटेंशन, अक्षरधाम, श्याम वाटिका और बालाजी एनक्लेव सहित 13 ऐसी कॉलोनियाँ हैं जहाँ बिजली सप्लाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

इस प्रकरण का एक पहलु ये भी है कि नोएडा में बिजली व्यवस्था और कथित बिजली माफियाओं के खिलाफ लंबे समय से संघर्ष कर रहे अभियानकर्ताओं ने जेई/एसडीओ अभियंता और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जो लोग पिछले कम से कम दो वर्षों से अपनी जान की परवाह किए बिना कॉलोनी की जनता के हित और विद्युत विभाग के राजस्व को बचाने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं, आज उन्हीं लोगों को कथित तौर पर माफिया घोषित करने और फर्जी मुकदमों में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियानकर्ताओं के अनुसार, पिछले दो वर्षों के दौरान बिजली माफियाओं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न माध्यमों से 11,000 से अधिक शिकायतें ट्विटर के माध्यम से की गई हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित संबंधित अधिकारियों और विभागों को ई-मेल एवं लिखित शिकायतें भेजी गई हैं। इसके साथ ही कथित बिजली माफियाओं और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए ED सहित अन्य जांच एजेंसियों से जांच की मांग भी की गई है।
छिजारसी और चोटपुर गांवों के इस क्षेत्र में कैसे बने अवैध मकान?
पर पूरे प्रकरण पर इस कथित आम आदमी या गरीब आदमी के साथ अन्याय की कहानियों के बीच यह भी जानना जरूरी है कि इस क्षेत्र में अवैध मकान कैसे बने I जिस देश में नदियों को मां माना जाता रहा हो, उसी देश में नदियों की तलहटी में कॉलोनी काटने वाले अपराधी कौन है ? क्या इन कॉलोनी में 50 से 70 लाख के बीच मिलने वाले मकानों को कथित तौर पर गरीब लोगों ने बिना देखभाल के खरीद लिया या फिर दिल्ली की तर्ज पर कॉलोनी के नियमितीकरण के विश्वास पर पूर्वांचल से आए लोगों ने हमेशा की तरह इन कॉलोनियो को अपनी रिहाइश का एक अधिकार समझ लिया है।
असल में दिल्ली से लेकर नोएडा तक यहाँ आने वाले मजदूरों के लिए इन शहरों में रहने के कोई प्लान कभी बनाये ही नहीं गएI बड़ी ऊंची औद्योगिक क्रांति की बात करते-करते अधिकारियों से लेकर सरकारों तक का ध्यान हमेशा चमचमाती हुई जिंदगी पर रहा जिसका परिणाम हमेशा यह हुआ कि इन शहरों को बनाने वाले लोगों के पास खुद के रहने के लिए कोई मकान नहीं था जिसका पूरा फायदा स्थानीय लोगों और माफियायो ने उठायाI
इन लोगों ने गांव के आबादी की जमीनों के साथ-साथ नदियों के किनारे के डूब क्षेत्र की जमीनों को भी इन लोगों को किराए पर देने के साथ-साथ बेचने से भी गुरेज नहीं किया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इसका आरंभ 2006-7 में तत्कालीन समाजवादी सरकार के समय से शुरू हुआ। दावा है तब सरकार में शामिल नेताओं की की शह पर माफियाओ ने यहां पर न सिर्फ कालोनिया काटी, बल्कि प्राधिकरण के अधिकारियों को भी आम लोगों के समक्ष यह कहने पर मजबूर कर दिया था कि प्राधिकरण अधिसूचित क्षेत्र होने के बावजूद यहां पर जमीन लेने में कोई खतरा नहीं हैI इसलिए लोगों ने ऐसे विश्वास पर यहां जमीन खरीदीI
हालांकि यह दावा और तर्क दोनों ही बेमानी है क्योंकि ₹10 के बिस्कुट के पैकेट को भी 5 बार नापतोल के खरीदने वाली भारतीय मानसिकता के लोग अगर यह कहें कि उनको जमीन खरीदते हुए उसकी असलियत नहीं पता थी तो इस पर विश्वाश नहीं किया जा सकता है। बीते 20 वर्षों से लगातार इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण बढ़ता गया है, सरकारे बदलती रही, अधिकारी डरते रहे या उधर से आँखे चुराते रहे। देखा जाए तो इसमें उनका नुक्सान भी नहीं था एक तो नेताओ और माफियाओ से उनका डर ख़तम होता था दूसरी ओर इसके लिए उनको पैसे भी मिलते थेI
प्राधिकरण के अधिकारियों को की माने तो उस दौर में पूर्वांचल के एक माफिया ने प्राधिकरण के एक चेयरमेन के घर पहुंचकर बदतमीजी की तो सरकार उसके लिए कुछ नहीं कर सकी थी और अब तक प्राधिकरण के अधिकारियों में वही डर बैठा होता हैI वर्तमान सरकार भले ही कानून व्यवस्था की कितनी बातें करें किंतु अधिकारियों को पता है कि सरकार बदलेगी तो व्यवस्था भी बदल जाएगी और बदल जायेगे उनके द्वारा किये गए सख्ती के फैसले!
2019 में छपी एक रिपोर्ट की माने तो भाजपा सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ने तो बाक़ायदा मंच से घोषणा की थी कि वह सभी लोगों को सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन दिलवाने के लिए विभाग की ओर से कैम्प लगवायेंगे और यह वादा किया था कि सभी 13 कॉलोनियों के प्रत्येक घर को 500 रुपये में कनेक्शन दिया जायेगा तथा सभी अन्य नागरिक सुविधाएँ दी जायेंगी।
इसलिए बीते 20 वर्षों में सरकार तो बदली मगर अवैध अतिक्रमण का खेल नहीं बदला अधिकारियों के दबाव और डर का आलम यह रहा कि क्षेत्र में न सिर्फ अवैध निर्माण में अभूतपूर्व वृद्धि हुई बल्कि उन अवैध निर्माणों को बिजली देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद पूरा एक एक सिस्टम खड़ा हुआ जिसको लोग अब बिजली माफिया कह रहे हैंI कहा जाता है कि इस बिजली माफिया द्वारा प्रतिमाह बिजली विभाग के समान्तर एक करोड़ से ज्यादा की उगाही की जाती है । इस उगाही में ऐसा नहीं है कि बिजली विभाग के स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों का हिस्सा नहीं है, दावा किया जाता है कि इसमें सब बराबर शामिल हैI
चुनाव से पहले पंकज सिंह के समक्ष बड़ी चुनौती?
देखा जाए तो चुनाव से मात्र 6 महीने पूर्व हो रहे इस खेल का सबसे ज्यादा असर भाजपा से नोएडा विधायक पंकज सिंह की राजनीति पर पड़ना तय हैI पंकज सिंह इस बात को भली-भांति समझते हैं कि इस पूरे प्रकरण पर इन लोगों का साथ देना मुश्किल है, इसलिए उन्होंने वैध कनेक्शन को चालू रखना और अवैध घरों के लिए कोई अस्थाई व्यवस्था बनाने की मांग करी। एजेंडा साफ है कि किसी तरीके से इस मुद्दे पर चुनाव तक कोई बड़ा नुकसान रोका जा सके, किंतु “सही रुकने नहीं दूंगा और गलत होने नहीं दूंगा” का दावा करने वाले पंकज सिंह क्या इस भंवर से आराम से निकल पाएंगे इसका विश्वाश फिलहाल किसी के पास नहीं हैI
चुनावी गणित से इसे समझे तो नोएडा सीट को दूसरी बार पंकज सिंह ने 181513 वोटों से जीता, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के सुनील चौधरी रहेI पंकज सिंह को 244,319 वोट मिले थे, सुनील चौधरी को 62,806 मिले थे I ऐसे में अगर डूब क्षेत्र के अधिकतम वोट 50000 वोट भी मान लिए जाए तो पंकज सिंह को सीधे सीधे कोई बड़ा खतरा नहीं है किन्तु अगर मामला उनके विरुद्ध अविश्वाश का बना तो नुक्सान हो सकता है और उनकी जीत का अन्तर काफी कम हो सकता हैI
वहीं लखनऊ सूत्रों की माने तो पंकज सिंह के हस्तक्षेप के बाद डूब क्षेत्र में रहने वाले 45 हजार परिवारों को जल्द बिजली कनेक्शन मिलने का सपना साकार भी हो सकता है। इसके लिए प्रमुख सचिव के साथ विभाग के अभियंताओं की ऑनलाइन बैठक होने जा रही है। इसमें डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन को लेकर गंभीर चर्चा की जाएगी। अगर बैठक सफल रही तो कैबिनेट में जल्द प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिर प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही डूब क्षेत्र में कनेक्शन देना शुरू कर दिए जाएंगे। इससे बिजली चोरी होने से तो बचेगी ही साथ में निगम को राजस्व का भी लाभ होगा। कॉलोनियों के ठेकेदारों द्वारा भी बिजली चोरी पर रोक लग सकेंगी।
शालिनी सिंह में लपक लिया आपदा में अवसर!
अब इस पूरे प्रकरण पर ध्यान से देखें तो बीते एक वर्ष में नोएडा के लोगो के बीच सामाजिक और राजनीतिक जमीन बनाने में लगी शालिनी सिंह के लिए मौका आपदा में अवसर की तरह आया है। दरअसल बीते 1 वर्ष में “पहलवान की बेटी हूँ” कविता कह करसक्रिय हुई शालिनी सिंह लगातार नोएडा शहर के लोगों की समस्याओं पर मुखर होकर सामने आती रही हैंI यधपि उनके तमाम प्रयास अभी तक शहरी मतदाता के भाजपा की जगह उनको ही नेता मानने में नाकाफी साबित हुए हैं।
शालिनी बृजभूषण सिंह की इकलौती बेटी हैं। उनकी शादी आरा से पूर्व सांसद स्व. अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते पुत्र विशाल सिंह से की है। विशाल सिंह बिहार के आरा के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। वह भी भाजपा नेता हैं। वह राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) के चेयरमैन भी हैं।
शहर में उनके समर्थको द्वारा यह दावा किया जाता है कि वह भाजपा से नोएडा का टिकट मांग रही हैं हालांकि शालिनी सिंह स्वयं कैमरे पर कभी हाँ कभी ना करती रही है। किंतु उनके कार्यकलापों से हमेशा यह लगता रहा कि शालिनी सिंह कोई छिपा हुआ चक्रव्यूह को रचने में व्यस्त है। ऐसे में शहरी मतदाता से अपेक्षित महत्त्व न मिलने के बाद डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की बिजली काटने को उन्होंने एक अवसर की तरह लिया है और वह बिना सही गलत के फैसले के फिलहाल लोगों की भावनाओं को उदलित करके अपने लिए माहौल बनाने की कोशिश में लग गई है। इसमें पुर्वांचल के लोगो का होना उनके लिए एक बड़ा कारण भी हो सकता है और इस बहाने ग्रामीण आँचल में अपनी प्रासंगिकता बनाना भी।
एक सल्तनत है लफ्जों की, हम दिखावा नहीं करते।
हम लिख देते हैं इतिहास, हम दावा नहीं करते।
हमने स्याह हरफो छू ली है रूह अपनी,
हम मंदिर-मस्जिद, काशी-काबा नहीं करते।
हम आएंगे तूफान बनकर-स्वागत की तैयारी रखना,
धधकता विजय-घोष रखना, राजतिलक की थाली रखना।
शालिनी सिंह की कविता का एक अंश
संभवत इसीलिए वह पहले ही दिन जाकर गांव के लोगों से मिली और अब जानकारी के अनुसार वहां के लोगों के लिए पानी के इंतजाम भी वही करवा रही हैं। फिर भी प्रश्न यह है कि अगर उनका मुद्दा राजनीतिक नहीं है तो पानी और बाकी सब पर खर्च होने वाले पैसे का इंतजाम उनका संगठन एनसीएफ कर रहा है या यह उनके व्यक्तिगत अकाउंट से हो रहा है।
वहीं किसके अकाउंट से आ रहा है से अलग लोगो का ये भी कहना है कि कांग्रेस की पंखुड़ी पाठक ने भी 2022 के चुनाव से पहले ऐसे ही तमाम टैंकर शहर में घूमाए थे, फिर चुनाव के बाद वो आज तक जनता के बीच नहीं आई हैं। ऐसे में शालिनी सिंह के टैंकर पॉलिटिक्स पर एक बार फिर से लोगों को पंखुड़ी पाठक भी याद आने लगी है। साथ ही ये भी याद आने लगा है कि क्या उनका राजनैतिक और सामाजिक अभियान भी बस टिकट पाने तक है और कहीं वो भी पंखुड़ी पाठक की तरह 27 के चुनाव बाद अन्तर्ध्यान तो नहीं हो जायेंगी।
विपक्ष के जागने का इंतजार
वही इस पूरे मुद्दे पर 3 दिन से छिजारसी और चौटपुर के गांव के इन निवासियों को आज भी कुंभकरण की नींद सोए हुए विपक्ष का इंतजार है। लोगों का कहना है कि लोकसभा से लेकर विधानसभा के चुनाव तक अक्सर विपक्ष के नेता इन्हीं लोगों के वोट के सहारे अपने आप को भाजपा के साथ को चुनौती देने के दावे करते नजर आते हैं। किंतु अब जब उन पर आपदा आई है तो विपक्ष से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले डा महेंद्र नागर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं, ना ही नोएडा में विधानसभा में 62,806 वोट पाने वाले सुनील चौधरी कहीं दिखाई दे रहे हैं और ना ही कांग्रेस से 15000 वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहने वाली पंखुड़ी पाठक यहां कहीं दिखाई दे रही है।
किंतु इस सबसे अलग आम आदमी के लिए परेशानी बिजली और पानी के बाद आने वाले दिनों में अवैध मकानों के टूटने के डर की भी है अब ऐसे में प्रश्न यह है कि इस सबका हल क्या है? क्या 50000 वोटो का डर दिखाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरनंदी नदी और यमुना नदी के किनारे बसे डूब क्षेत्र में बने मकानों को हटाने के निर्देशों को उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार रोक देगी या फिर चुनाव से और वक्त पहले आए इस तूफान को बस चेतावनी समझा जाए क्योंकि इससे बड़ी सुनामी आने वाले समय में निश्चित तौर पर आनी है ।
सवाल यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट में यमुना और हरनंदी नदी के उत्त्थान को लेकर चल रही सुनवाई के बीच यूपी स्टेट ट्रांसपोर्टेशन की कमेटी के इस पहले चरण के निर्णय के बाद आने वाले दिनों में यहां की राजनीति कैसे बदलेगी ? क्या जनता की परेशानी पर वाकई नोएडा का विपक्ष अपनी कुम्भ्करनी नींद से जागेगा या फिर पंकज सिंह और शालिनी सिंह में से कोई एक इनका खिवैया बनेगा।




