गौतमबुद्ध नगर: सड़कों पर लगने वाला भारी ट्रैफिक अब किसी मरीज की जान और मौत के बीच की दीवार नहीं बनेगा। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने एंबुलेंस को जाम से मुक्त रखने और मरीजों को समय पर इलाज दिलाने के लिए एक विशेष पहल ‘आपरेशन फास्ट’ (Operation Fast) की शुरुआत की है।
इस नई व्यवस्था के तहत, ट्रामा पीड़ित, सड़क दुर्घटना में घायल और अन्य गंभीर मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस के लिए ट्रैफिक पुलिस विशेष क्लियरेंस मुहैया कराएगी। सूचना मिलते ही ट्रैफिक कर्मी रास्ते में पहले से मोर्चा संभाल लेंगे ताकि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के अस्पताल पहुंच सके।
समर्पित एंबुलेंस ट्रैफिक सुविधा सेल और हेल्पलाइन
पुलिस ने इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रैफिक कंट्रोल रूम में 24 घंटे काम करने वाला एक समर्पित ‘एंबुलेंस ट्रैफिक सुविधा सेल’ स्थापित किया है। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 9218981716 जारी किया गया है। जिले के सभी बड़े और प्रमुख अस्पतालों को इस मुहिम से जोड़ा गया है और उन्हें यह नंबर उपलब्ध करा दिया गया है। यह पहल जिले की ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अधिकारियों ने शोध के बाद तैयार किया प्लान
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में इस योजना को डीसीपी मुख्यालय शैव्या गोयल और डीसीपी यातायात सैयद अली अब्बास ने गहन शोध के बाद तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य हृदयघात (हार्ट अटैक), अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट), अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर रूप से घायल मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुंचाना है।
कैसे काम करेगा ‘रोलिंग ट्रैफिक क्लियरेंस’ सिस्टम?
प्रणाली के अनुसार, जैसे ही अस्पताल या एंबुलेंस कर्मी हेल्पलाइन नंबर पर एंबुलेंस की लोकेशन, गंतव्य अस्पताल और रूट की जानकारी देंगे, ट्रैफिक कंट्रोल रूम उस मार्ग पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को अलर्ट कर देगा।
एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रित कर लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक सिग्नल का अस्थायी प्रबंधन किया जाएगा और विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को रोककर वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएंगे। इस पूरी व्यवस्था को ‘रोलिंग ट्रैफिक क्लियरेंस मैकेनिज्म’ नाम दिया गया है। इसके अलावा, पब्लिक एड्रेस (PA) सिस्टम के जरिए सार्वजनिक घोषणा कर लोगों से रास्ता खाली करने की अपील भी की जाएगी।
ट्रायल में मिली बड़ी सफलता
ट्रैफिक पुलिस इस व्यवस्था का सफल ट्रायल भी कर चुकी है। ट्रायल के दौरान चिल्ला बॉर्डर से मैक्स अस्पताल और फोर्टिस अस्पताल तक की दूरी को खाली एंबुलेंस के जरिए मात्र 10 मिनट में तय कर लिया गया।
इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर एंबुलेंस को मिलने वाला यह ‘ग्रीन कॉरिडोर’ भविष्य में कई कीमती जानें बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।



