नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों और आगामी चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर गंभीर चिंता व्यक्त की। इस रैली के माध्यम से विपक्षी गठबंधन ने न केवल अपनी एकजुटता प्रदर्शित की, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थानों की स्वायत्तता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर तीखे सवाल भी खड़े किए।
लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के संरक्षण की अपील
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विपक्षी नेताओं को डराने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। खरगे ने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां “जनादेश की चोरी” कर सरकारें बनाई गई हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है जब सत्ता में परिवर्तन हो। खरगे ने कहा, “हम डरे हुए नहीं हैं और लड़ना जानते हैं। हमारा उद्देश्य लोकतंत्र को कमजोर करने वाली शक्तियों को सत्ता से बाहर करना है।”
संस्थानों के ‘कैप्चर’ और चुनावी अनियमितताओं का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और मौजूदा सरकार ने शिक्षा, न्यायपालिका, नौकरशाही और जांच एजेंसियों (सीबीआई, ईडी) जैसी संस्थाओं पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है।
चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों का नाम लेते हुए राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में “वोटों की चोरी” का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इसे ‘देशद्रोह’ की श्रेणी का कृत्य बताते हुए दावा किया कि संस्थागत निष्पक्षता के बिना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि ये संस्थाएं किसी दल की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की संपत्ति हैं।
चुनावी डेटा और प्रक्रियात्मक त्रुटियों पर प्रहार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर लगभग 1.27 करोड़ वोट काटे गए हैं, जो चुनावी निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार के दावों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जनता अब बदलाव के लिए तैयार है और आगामी चुनावों में इसका प्रभावी जवाब देगी।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विशेष रूप से ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया और मतगणना की पारदर्शिता पर असंतोष व्यक्त किया। बनर्जी ने कहा, “हम हारे नहीं हैं, बल्कि हमें रणनीतिक रूप से हराया गया है।” उन्होंने घोषणा की कि विपक्ष एकजुट होकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
रैली में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव सहित अन्य सहयोगियों ने भी ‘वोट चोरी’ और संवैधानिक मूल्यों के क्षरण का मुद्दा उठाया। कुल मिलाकर, रामलीला मैदान की यह रैली विपक्षी खेमे द्वारा चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर एक औपचारिक और सामूहिक असहमति दर्ज कराने का प्रयास थी। चुनाव से पूर्व विपक्षी दलों का यह रुख आगामी राजनीतिक विमर्श को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के संकेत दे रहा है।



