ग्रेटर नोएडा में बीते 2 वर्षों से फुटओवर ब्रिज की राह देख रही जनता ने मायूस होकर शुक्रवार 19 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आ रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है लोगों ने कहा है कि मुख्यमंत्री 19 तारीख को ग्रेटर नोएडा का निरीक्षण करने आए तो एक बार कलेक्ट्रेट से जगत फार्म होकर कैलाश हॉस्पिटल तक बन रहे तीन फुटओवर ब्रिज की भी सुध ले लें, जहां इनको बिना पूर्ण किए बिना प्राधिकरण से बिना ओसी लिए ठेकेदार विज्ञापनों से कमाई कर रहा है । ठेकेदार का प्रभाव इतना है कि फुटओवर ब्रिज पर काम पूरा हुए बिना विज्ञापन को रात में प्रकाशित करने के लिए बिजली के कनेक्शन भी बिना ओसी के मिल गया हैं या फिर अवैध कनेक्शन के जरिए विज्ञापन को बिजली तक दी जा रही है ।


एनसीआर खबर को मिली जानकारी के अनुसार इन तीनों ही फुटओवर ब्रिज में टाइल्स और लिफ्ट दोनों का काम बाकी है स्वयं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि एनजी के आदेश पर तीन हफ्ते पहले बिना इस ओसी लिए फुटओवर ब्रिज पर विज्ञापन लगाने के चलते प्राधिकरण द्वारा दो-दो लाख की पेनल्टी ठेकेदार पर लगाई गई थी और तीन दिनों में विज्ञापन हटा कर जवाब मांगा था। किंतु ठेकेदार द्वारा ना तो प्राधिकरण को नोटिस का जवाब देने की जरूरत समझी न ही फुटओवर ब्रिज से विज्ञापन हटाए । एनसीआर खबर के पास इस नोटिस की कॉपी उपलब्ध है।

प्राधिकरण के सूत्रों की माने तो लोगों की शिकायत के बाद ठेकेदार की इस मनमानी के विरुद्ध एक बार फिर से उच्च अधिकारियों द्वारा 10-10 लाख की पेनल्टी लगाई जाने के निर्देश दे दिए गए किंतु सप्ताह बीत जाने के बाद भी संबंधित वर्क सर्कल द्वारा अभी तक नोटिस सर्व नहीं किए गए हैं ।
प्राधिकरण में चर्चा है कि इन पांच फुटओवर ब्रिज के लिए जिस ठेकेदार का चयन किया गया है उसके संबंध सत्तारूढ़ दल के नेताओं से हैं और इसका लाभ उठाकर वो न तो फुटओवर ब्रिज का निर्माण पूरा कर रहा है ना ही प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों की बात को कोई महत्व दे रहा है । टेंडर होने के लभभग 2 वर्षों के बाद भी 5 में से मात्र तीन ब्रिज पर ही काम शुरू हुआ है जबकि चौथा फुटओवर ब्रिज दुर्गा टॉकीज के पास बनाए जाने की बात हुई थी। उसके बारे में बताया जा रहा है कि उसको भी बनाने जाने के लिए ठेकेदार फिलहाल इच्छुक नहीं है । ऐसे में अगर ठेकेदार की मनमानी पर अंकुश नहीं लगा तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाए जा रहे फुट ओवर ब्रिज कब लोगों को सुविधा दे पाएंगे, इसका उत्तर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ही देना पड़ेगा ।


