प्रथक बटोही । जब अंग्रेज भारत पर राज कर रहे थे तब उन्होंने अफगानिस्तान का कुछ इलाका तब के ब्रिटिश भारत में मिला दिया था जिसे वह FATA (फेडरल एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरिया)कहते थे यानी यह केंद्रीय शासित आदिवासी क्षेत्र था।
यह इलाका पारंपरिक रूप से गांधार जनपद का हिस्सा था जिसमें पेशावर भी आता था। अंग्रेजों ने रूस के दखल को मद्देनजर रखते हुए यह इलाका एक बफर जोन की तरह जबरन ब्रिटिश इंडिया में मिला लिया था अफगान कभी इसको भूले नहीं, वह आज भी पाकिस्तान से FATA समेत पेशावर तक का इलाका वापस मांगते हैं।

जब भारत की सरकार ने जम्मू कश्मीर से 370 हटाकर भारत में जम्मू कश्मीर यूनियन टेरिटरी और लद्दाख यूनियन टेरिटरी की रचना करी तब पाकिस्तान ने भी जवाब में जम्मू कश्मीर के कब्जाए हुए हिस्से “गिलगित बाल्टिस्तान” को एक अलग राज्य घोषित किया इसके साथ ही FATA के इलाके को अपने पश्तो बहुल इलाके में मिलाकर नए राज्य खैबर पख्तुनख्वा की रचना कर दी। जब तक अफगानिस्तान में अमेरिकी बैठे थे तब तक पाकिस्तान के लिए सब चंगा सी तालिबान अफगान हुकूमत में आए उन्होंने पाकिस्तान से अपने दो इलाकों को वापस मांगने का तकादा शुरू कर दिया जिसमें वह पूरा बलूचिस्तान और पूरा खैबर पख्तूनख्वा जिसकी राजधानी पेशावर है उसको मांगते हैं। यह दोनों पहाड़ी राज्य अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान को दे देगा तो पाकिस्तान में सिर्फ मैदानी इलाका पंजाब, सिंध और मुश्किल से संभाला हुआ कब्जाया हुआ पर्वतीय जम्मू कश्मीर बचेगा।
पाकिस्तानियों को और खासकर उनकी पंजाबी सेना को पख़्तून अपनी जमीन वापिस मिलने तक जीने नहीं देंगे इसी कड़ी में 8 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा के ओरकजई जिले में एक घात लगाकर किए गए हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर सहित 16 सैनिक मारे गए। यह आदिवासी क्षेत्र दो दशकों से जारी लड़ाई के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए हताहतों की दृष्टि से सबसे घातक बना हुआ है।

अब रात के इस पहर पाकिस्तानी वायु सेना काबुल पर बमबारी कर रही है गौरतलब है कि अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी इस समय भारत यात्रा पर है। पाकिस्तान कथित तौर पर पख़्तून विद्रोहियों यानी पाकिस्तान तालिबान (TTP) के प्रमुख नूर वली महसूद को निशाना बनाने के उद्देश्य से हमले कर रही हैं। सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काबुल के केंद्र और उत्तरी इलाकों में भारी धमाके हुए, जिनमें नागरिक घरों को नुकसान पहुंचा। अफगान अधिकारियों ने इसे युद्ध की घोषणा करार दिया है।
रात में काबुल के शार-ए-नव, दश्त-ए-बारची, ख्वाजा रवाश (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास) और खैरखाना इलाकों पर हमले हुए जिसमें एक वाहन को भी निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी सेना द्वारा TTP प्रमुख नूर वली महसूद की मौत की भी अफवाहें, हालांकि यह पुष्टि नहीं हुई। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह हमले से बच निकले। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने विस्फोट की पुष्टि की, लेकिन कोई बड़ा नुकसान न होने का दावा किया। अन्य स्रोतों के अनुसार, बच्चे और महिलाएं सहित नागरिक हताहत हुए। यह काबुल पर 2021 में तालिबान हुकूमत आने के बाद पाकिस्तान का तीसरा हमला है सो तालिबान ने पाकिस्तानी राजदूत को तलब किया और प्रतिशोध की चेतावनी दी, जिसमें पाकिस्तान में आत्मघाती हमले शामिल हो सकते हैं।


