राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लगातार ‘खराब’ श्रेणी में बने रहने के उपरांत, नोएडा प्राधिकरण ने वायु प्रदूषण के खिलाफ एक अभूतपूर्व और सघन अभियान छेड़ दिया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा दिनांक 14.10.2025 को जारी सख्त निर्देशों के अनुपालन में, नोएडा प्राधिकरण ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को पूरी मुस्तैदी और कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया है। प्राधिकरण की 14 विशेष टीमें युद्धस्तर पर काम करते हुए, वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर अंकुश लगाने के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है जब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। CAQM के निर्देश और GRAP के नियमों का उद्देश्य वायु प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से पहले ही रोकना और मौजूदा प्रदूषण को कम करना है। नोएडा प्राधिकरण इस चुनौती का सामना करने और निवासियों को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सघन निरीक्षण और जन जागरूकता: दोहरी रणनीति
वायु प्रदूषण नियंत्रण अभियान के तहत, नोएडा प्राधिकरण की टीमें केवल प्रवर्तन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जन जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में, प्राधिकरण की विशेष टीमों ने नोएडा क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों और ग्रामीण इलाकों में कुल 62 स्थलों का गहन निरीक्षण किया। इन निरीक्षणों का उद्देश्य न केवल GRAP दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करना था, बल्कि स्थानीय निवासियों को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों और इसे रोकने के उपायों के बारे में जागरूक करना भी था। निवासियों को खुले में कूड़ा जलाने, निर्माण सामग्री को खुला छोड़ने और व्यक्तिगत वाहनों का कम उपयोग करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर शिक्षित किया गया। प्राधिकरण का मानना है कि जनभागीदारी के बिना प्रदूषण के खिलाफ युद्ध जीतना असंभव है।
सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण: प्रमुख फोकस
सड़कों पर उड़ने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारक है, खासकर शुष्क मौसम में। इस समस्या से निपटने के लिए, नोएडा प्राधिकरण ने एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है:

- शोधित जल का छिड़काव: नोएडा के सभी मुख्य मार्गों पर 54 समर्पित टैंकरों के माध्यम से शोधित जल का नियमित छिड़काव किया जा रहा है। कुल 231.70 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सड़क की सतह पर जमी धूल को जमने नहीं देना और उसे हवा में मिलने से रोकना है। यह प्रक्रिया सुबह और शाम दोनों समय की जा रही है ताकि धूल के कणों को लंबे समय तक प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
- मैकेनिकल स्वीपिंग: जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 19 अत्याधुनिक मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों का उपयोग कर 340 किलोमीटर मुख्य मार्गों की सघन सफाई कराई जा रही है। ये मशीनें पारंपरिक सफाई विधियों की तुलना में धूल को कहीं अधिक प्रभावी ढंग से उठाती हैं, जिससे सड़कों से धूल के कणों को पूरी तरह हटाया जा सके। मैकेनिकल स्वीपिंग धूल को उड़ने से रोकने और सड़कों को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इन प्रयासों के माध्यम से, नोएडा प्राधिकरण यह सुनिश्चित कर रहा है कि वाहनों के चलने और हवा के बहाव से उड़ने वाली धूल कम से कम हो, जिससे आसपास की वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
हरियाली का संरक्षण और एन्टी-स्मॉग गन का उपयोग
वायु प्रदूषण से निपटने में हरियाली का महत्वपूर्ण योगदान होता है, क्योंकि पेड़-पौधे हवा से धूल और अन्य प्रदूषकों को अवशोषित करते हैं। उद्यान विभाग की टीमें भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हैं:
- पेड़-पौधों की धुलाई: उद्यान विभाग के 19 टैंकरों द्वारा सेंट्रल वर्ज (सड़क विभाजक) पर लगे पेड़-पौधों और झाड़ियों की नियमित रूप से धुलाई की जा रही है। इससे पत्तियों पर जमी धूल हट जाती है, जिससे पेड़-पौधे बेहतर ढंग से प्रकाश संश्लेषण कर पाते हैं और हवा को शुद्ध करने की उनकी क्षमता बढ़ जाती है। यह न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार करता है, बल्कि शहर के सौंदर्य को भी बढ़ाता है।
- एन्टी-स्मॉग गन का संचालन: विशेष रूप से धूल प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए, नोएडा के विभिन्न बड़े निर्माण स्थलों पर 88 नग एन्टी-स्मॉग गन (धूल रोधी तोप) का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, 10 नग ट्रक माउंटेड एन्टी-स्मॉग गन का भी उपयोग किया जा रहा है, जिन्हें ऐसे स्थानों पर ले जाया जा सकता है जहां बड़े निर्माण कार्य चल रहे हों या जहां धूल का स्तर अधिक हो। ये तोपें पानी की महीन फुहारें छोड़ती हैं जो हवा में मौजूद धूल के कणों को नीचे बिठा देती हैं, जिससे हवा में PM2.5 और PM10 जैसे हानिकारक कणों का स्तर कम होता है।
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (C&D Waste) प्रबंधन और प्रवर्तन
निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (C&D Waste) वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है, खासकर जब इसे अनुचित तरीके से प्रबंधित किया जाता है। नोएडा प्राधिकरण इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कदम उठा रहा है:
- मलबे का उठान एवं प्रोसेसिंग: प्राधिकरण की टीमों द्वारा विभिन्न स्थानों से कुल 601.89 टन C&D Waste (निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट) मलबे का तत्परता से उठान किया गया है। इस मलबे को अनुमत स्थानों पर ले जाकर उसकी प्रोसेसिंग की जा रही है ताकि इसका पुनर्चक्रण या सुरक्षित निपटान सुनिश्चित हो सके। इससे खुले में मलबे के ढेर जमा होने से रोका जा रहा है, जो धूल के साथ-साथ अन्य पर्यावरणीय समस्याओं का कारण बनते हैं।
- सख्त प्रवर्तन कार्रवाई: प्राधिकरण की टीमें प्रतिदिन निर्माण परियोजनाओं, मार्गों और खुले क्षेत्रों का गहन निरीक्षण कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी निर्माण स्थल GRAP दिशा-निर्देशों और माननीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का कड़ाई से पालन करें। उल्लंघन पाए जाने पर, नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करते हुए अर्थदण्ड अधिरोपित किया जाता है। नियमों के अनुसार, निर्माण सामग्री को ग्रीन नेट से ढकने, नियमित रूप से पानी का छिड़काव करने और मेटो शीट/ग्रीन कारपेट का उपयोग सुनिश्चित कराया जा रहा है ताकि निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न धूल को नियंत्रित किया जा सके। प्राधिकरण ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
निरंतर निगरानी और भविष्य की रणनीति
नोएडा प्राधिकरण केवल तात्कालिक उपायों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए एक दीर्घकालिक और सतत रणनीति पर काम कर रहा है। वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी की जा रही है और प्राप्त डेटा के आधार पर भविष्य की कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है जो नोएडा के निवासियों को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए है।
नोएडा प्राधिकरण समस्त निवासियों से अपील करता है कि वे प्रदूषण नियंत्रण के इन महत्वपूर्ण प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करें। हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह GRAP के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करे। खुले में कूड़ा जलाने से बचें, भवन निर्माण सामग्री को ढककर रखें, अपने वाहनों का नियमित रखरखाव करें और यथासंभव सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। आपके सहयोग से ही नोएडा को स्वच्छ और हरा-भरा बनाया जा सकता है। यह सामूहिक प्रयास ही हमें इस पर्यावरणीय चुनौती से पार दिलाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण करेगा।


