पतंजलि के घी में मिलावट: पिथौरागढ़ कोर्ट ने लगाया 1.4 लाख का जुर्माना, उपभोक्ता सुरक्षा पर बड़ा फैसला

NCR Khabar News Desk
6 Min Read

देश और प्रदेश की प्रतिष्ठित आयुर्वेद कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा है। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में बाबा रामदेव की स्वामित्व वाली पतंजलि आयुर्वेद का गाय का घी गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है। एक चार साल पुराने मामले में, न्याय निर्णायक अधिकारी/अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ के न्यायालय ने बीते बृहस्पतिवार को कंपनी और संबंधित कारोबारियों पर कुल 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उपभोक्ता सुरक्षा और खाद्य मानकों के अनुपालन के महत्व को रेखांकित करता है, विशेषकर ऐसे समय में जब उपभोक्ता स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।

यह मामला अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ जब पिथौरागढ़ के वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने कासनी स्थित करन जनरल स्टोर से पतंजलि के गाय के घी का एक नमूना लिया। यह एक नियमित जांच का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। इस नमूने को प्रारंभिक जांच के लिए रुद्रपुर स्थित राजकीय प्रयोगशाला में भेजा गया।

- Advertisement -
Ad image


कितनी कंपनियों पर लगा कितना जुर्माना?
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता) : 1,00,000 रुपये
ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रिब्यूटर) : 25,000 रुपये
करन जनरल स्टोर (विक्रेता) : 15,000 रुपये
कुल जुर्माना: 1,40,000 रुपये

दोहरी जांच में भी मिलावट की पुष्टि: पतंजलि की अपील रही विफल

रुद्रपुर लैब की जांच रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए। पतंजलि आयुर्वेद के घी का यह नमूना मानकों की कसौटी पर खरा नहीं उतरा, जिसमें स्पष्ट रूप से मिलावट पाई गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पतंजलि आयुर्वेद को 2021 में इस रिपोर्ट की जानकारी दी, लेकिन कंपनी की ओर से लंबे समय तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया।

मामले ने तब एक नया मोड़ लिया जब पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने रुद्रपुर लैब की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए नमूने की दोबारा जांच की अपील की। कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2021 को निर्धारित 5,000 रुपये का शुल्क जमा कराया। इसके बाद, अगले ही दिन, 16 अक्टूबर, 2021 को नमूने को गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला (Central Lab) में भेजा गया, जो देश की एक प्रमुख और विश्वसनीय खाद्य जांच सुविधा है।

- Advertisement -
Ad image

राष्ट्रीय लैब की जांच रिपोर्ट 26 नवंबर, 2021 को आई, और इसने भी रुद्रपुर लैब के निष्कर्षों की पुष्टि की। यहां भी घी का नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा और उसमें गंभीर त्रुटियां पाई गईं। यह दूसरी बार था जब पतंजलि का उत्पाद गुणवत्ता जांच में विफल रहा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि घी में वास्तव में मिलावट थी। अधिकारियों के अनुसार, मानकों से नीचे गुणवत्ता वाले इस घी के सेवन से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते थे।

न्यायालय में वाद और ऐतिहासिक फैसला

दोनों ही प्रयोगशालाओं में नमूने के फेल होने के बाद, खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पास उत्पादक कंपनी, वितरक और विक्रेता के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। 17 फरवरी, 2022 को यह मामला अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ की अदालत में प्रस्तुत किया गया।

अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह की अदालत ने सभी पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का गहन परिशीलन किया। लगभग दो वर्षों की सुनवाई और विस्तृत अध्ययन के बाद, बीते बृहस्पतिवार को इस मामले पर अंतिम फैसला आया। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में, उत्पादक कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया। इसके साथ ही, वितरक ब्रह्म ऐसेसरीज, धारचूला रोड, पिथौरागढ़ पर 25 हजार रुपये और विक्रेता करन जनरल स्टोर, कासनी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार, कुल 1 लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना तीनों संबंधित पक्षों पर लगाया गया है।

कब-कब क्या हुआ?
20 अक्टूबर 2020 : कासनी से घी का नमूना लिया गया
2021 (रुद्रपुर लैब रिपोर्ट) : घी मानकों पर फेल
15 अक्टूबर 2021 : पतंजलि ने दोबारा जांच की अपील की
16 अक्टूबर 2021 : गाजियाबाद राष्ट्रीय लैब में दूसरी जांच
26 नवंबर 2021 : दूसरी रिपोर्ट में भी घी असफल
17 फरवरी 2022 : मामला कोर्ट में प्रस्तुत
27 नवंबर 2025 : अदालत ने सुनाया फैसला, जुर्माना लगाया

अधिकारियों और उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा ने इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, “नमूनों की जांच रुद्रपुर की राज्य प्रयोगशाला और उसके बाद गाजियाबाद स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला में कराई गई थी। दोनों जांचों में घी मानकों पर खरा नहीं उतरा। विभागीय अधिकारियों ने सबूतों सहित पूरा मामला अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस प्रकार की मिलावट उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

यह फैसला उद्योग के लिए एक मजबूत संदेश है, खासकर उन बड़ी कंपनियों के लिए जो अपनी ब्रांड पहचान और उपभोक्ता विश्वास पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं। पतंजलि, जो कि योग गुरु बाबा रामदेव के नेतृत्व में एक घरेलू नाम बन चुकी है और “स्वदेशी” व “आयुर्वेदिक” उत्पादों के लिए जानी जाती है, के उत्पाद में मिलावट का पाया जाना निश्चित रूप से उसके ब्रांड छवि के लिए एक चुनौती है।

Share This Article
एनसीआर खबर दिल्ली एनसीआर का प्रतिष्ठित हिंदी समाचार वेब साइट है। एनसीआर खबर में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय,सुझाव और ख़बरें हमें mynews.ncrkhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं या 09654531723 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I अपना सूक्ष्म सहयोग आप हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : 9654531723@paytm के जरिये दे सकते है