रामसर दर्जा न मिलने के बाद भी संवरेगा धनौरी वेटलैंड, ₹150 करोड़ का होगा निवेश से YEIDA बनाएगा बायोडायवर्सिटी पार्क, विशेषज्ञों ने उठाये वन विभाग की जगह बाहरी एजेंसी के चयन हेतु RFP पर सवाल, बताया ऑयवाश

आशु भटनागर
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उत्तर प्रदेश के यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में स्थित धनौरी वेटलैंड, जिसे हाल ही में रामसर साइट का दर्जा नहीं मिल पाया था, अब एक बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य इस समृद्ध पर्यावास और इसकी जैव विविधता को संरक्षित करना है। इस परियोजना पर लगभग ₹150 करोड़ का अनुमानित निवेश होगा, जिसमें लगभग 30 हेक्टेयर ज़मीन के अधिग्रहण की लागत शामिल है।

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YEIDA ने यह कदम तब उठाया है जब वन विभाग द्वारा धनौरी वेटलैंड को रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने का दिया प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया था। अब अथॉरिटी का दावा है कि बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में इसे विकसित करने से न केवल वेटलैंड को संरक्षण मिलेगा, बल्कि यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और पर्यटन केंद्र भी बनेगा।

वेटलैंड की समृद्ध जैव विविधता का संरक्षण धनौरी वेटलैंड अपने आप में जैव विविधता का एक अनमोल खजाना है। सर्दियों के मौसम में, यह हर साल हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों का घर बन जाता है, जो देश-विदेश से यहां आते हैं। यह अपनी इसी विशेषता के चलते पक्षी प्रेमियों और बर्डवॉचर्स के लिए एक पसंदीदा स्थान बन गया है। YEIDA के नोटिफाइड एरिया में हो रहे तीव्र विकास के कारण वेटलैंड पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को देखते हुए, अथॉरिटी ने इसके आसपास केवल आवासीय विकास की योजना बनाई है, ताकि वेटलैंड के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को कोई क्षति न पहुंचे।

“धनौरी वेटलैंड जैव विविधता से भरपूर है। इसे बायोडायवर्सिटी पार्क के तौर पर डेवलप और सुरक्षित रख जाएगा। हमारा लक्ष्य जल्द ही इस परियोजना के लिए एक योग्य कंसल्टिंग एजेंसी का चयन करना है।”

CEO यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA)

भूमि अधिग्रहण और वित्तीय योजना धनौरी वेटलैंड कुल 46.35 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें से 12 हेक्टेयर जमीन गांव के लोगों के स्वामित्व में है, जबकि 25 हेक्टेयर YEIDA के अधीन है। बायोडायवर्सिटी पार्क के विकास के लिए, अथॉरिटी को लगभग 30 हेक्टेयर अतिरिक्त ज़मीन का अधिग्रहण करना होगा, जिसकी अनुमानित लागत लगभग ₹150 करोड़ है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की ज़मीन वेटलैंड का हिस्सा है, उनके हितों की रक्षा की जाएगी, लेकिन उन्हें अपनी ज़मीन पर ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति नहीं होगी जिससे जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।

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क्या होता है बायोडायवर्सिटी पार्क?

बायोडायवर्सिटी पार्क एक ऐसा संरक्षित क्षेत्र होता है जहाँ पौधों, जानवरों, सूक्ष्मजीवों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र सहित संपूर्ण जैव विविधता को संरक्षित और पुनर्जीवित किया जाता है। इन पार्कों में स्थानीय वनस्पतियों और जीवों को बचाया जाता है, और तालाबों, घास के मैदानों और जंगल जैसे विभिन्न प्राकृतिक आवासों का निर्माण किया जाता है ताकि जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सके।

विशेषज्ञों ने उठाये RFP पर सवाल

यह पूरा प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम प्रतीत होता है, लेकिन एक पहलू पर पर्यावरणविदों और जानकारों ने प्रश्न उठाए हैं। YEIDA द्वारा रामसर क्षेत्र के स्थान पर बायोडायवर्सिटी पार्क को विकसित करने के लिए कंसल्टिंग एजेंसी के चयन हेतु ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

dhanori wetland noida airport

पर्यावरण विदों का स्पष्ट कहना है कि यमुना प्राधिकरण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पर्यावरण मंजूरी के सापेक्ष दिए गए अपने वादे से पीछे हटने के लिए धनोरी वेटलैंड को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में बनाने के दावों से सिर्फ धोखा देने की कोशिश कर रहा है। अगले माह जनवरी में होने वाले एनजीटी की सुनवाई में उनको इसका उत्तर रखना होगा। विशेषज्ञों ने धनोरी वेटलैंड को केंद्र सरकार द्वारा रामसर क्षेत्र की मंजूरी न देने के दावे पर भी प्रश्न खड़े किए है, उनका दावा है कि केंद्र सरकार से न सिर्फ अप्रूवल दिया गया है बल्कि इसको  वाल्मीकि रामसर नाम भी लिखा गया है ।

dhanori wetland

वहीं कई जानकारों का मानना है कि बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे संवेदनशील और विशिष्ट परियोजना के लिए, राज्य का वन विभाग सबसे उपयुक्त और सक्षम निर्माणकर्ता हो सकता है, क्योंकि उनके पास ऐसे पारिस्थितिकी तंत्रों के प्रबंधन और विकास का गहरा अनुभव और विशेषज्ञता होती है। किसी बाहरी एजेंसी के बजाय वन विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपना अधिक प्रभावी और पर्यावरण के दृष्टिकोण से बेहतर हो सकता था। लोगो ने आशंका व्यक्त करने हुए पूछा है कि कहीं बाहरी एजेंसी के चयन के चलते इतने बड़े प्रोजेक्ट का हाल नोएडा के बहुचर्चित स्पोर्ट्स सिटी घोटाले जैसा न हो जाए।

बहरहाल, धनौरी वेटलैंड को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित करने का YEIDA का सैद्धांतिक निर्णय भले ही एक महत्वपूर्ण पहल लग रहा है, परंतु क्या यह सच में धरातल पर उतर पाएगा या फिर कानूनी दांव पेच के बीच इसमें कई पड़ाव देखने को मिलेंगे। एनसीआर खबर भी आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर कई चौंकाने वाले खुलासे करेगा ।

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आशु भटनागर बीते 15 वर्षो से राजनतिक विश्लेषक के तोर पर सक्रिय हैं साथ ही दिल्ली एनसीआर की स्थानीय राजनीति को कवर करते रहे है I वर्तमान मे एनसीआर खबर के संपादक है I उनको आप एनसीआर खबर के prime time पर भी चर्चा मे सुन सकते है I Twitter : https://twitter.com/ashubhatnaagar हम आपके भरोसे ही स्वतंत्र ओर निर्भीक ओर दबाबमुक्त पत्रकारिता करते है I इसको जारी रखने के लिए हमे आपका सहयोग ज़रूरी है I एनसीआर खबर पर समाचार और विज्ञापन के लिए हमे संपर्क करे । हमारे लेख/समाचार ऐसे ही सीधे आपके व्हाट्सएप पर प्राप्त करने के लिए वार्षिक मूल्य(रु999) हमे 9654531723 पर PayTM/ GogglePay /PhonePe या फिर UPI : ashu.319@oksbi के जरिये देकर उसकी डिटेल हमे व्हाट्सएप अवश्य करे