सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सरकारी संपत्तियों पर किरायेदारों को हटाने में अब ‘पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट’ होगा प्रभावी, राज्यों के किराया कानूनों पर भारी

NCR Khabar Internet Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक व दूरगामी असर डालने वाला आदेश सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी स्वामित्व वाली संपत्तियों से किरायेदारों या अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने के लिए पब्लिक प्रिमाइसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) एक्ट, 1971 के प्रावधान लागू होंगे। अदालत ने कहा कि इस केंद्रीय कानून के प्रावधान राज्य के किराया नियंत्रण कानूनों पर प्राथमिकता रखेंगे, जिससे एलआईसी, राष्ट्रीयकृत बैंक और अन्य सरकारी कंपनियां अपनी ‘पब्लिक प्रिमाइसेस’ से अनधिकृत कब्जा हटाने में कानूनी तौर पर अधिक सशक्त होंगी।

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यह मामला उन परिस्थितियों से जुड़ा था जहां सरकारी उपक्रमों और वित्तीय संस्थानों की संपत्तियों पर कई वर्षों से किरायेदार या कब्जाधारी बने हुए थे, जिनका किराया समझौता या तो समाप्त हो चुका था या जिनकी मौजूदगी ‘अनधिकृत’ मानी जा रही थी। अभी तक कई राज्यों के Rent Control Acts के तहत किरायेदारों को निष्कासन से बचाव के लिए पर्याप्त कानूनी संरक्षण मिला हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच – जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया – ने इस विवाद पर अंतिम रूप से स्पष्टता दी।

क्या है पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट, 1971?

1971 में लागू किया गया Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act एक केंद्रीय कानून है, जिसे खासतौर पर राष्ट्रीयकृत संस्थाओं, सरकारी विभागों, और सार्वजनिक उपक्रमों की संपत्तियों पर अनधिकृत कब्जा खत्म करने के लिए बनाया गया था।

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इसके तहत:

  • पब्लिक प्रिमाइसेस में वे सभी इमारतें, भूमि और संपत्तियां आती हैं जो केंद्र सरकार, सरकारी कंपनियों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, एलआईसी आदि के स्वामित्व में हों।
  • यदि कोई व्यक्ति इन संपत्तियों का कब्जा बिना कानूनी अधिकार के कर रहा है, तो संबंधित संस्था के ‘एस्टेट ऑफिसर’ को अधिकार है कि वह नोटिस देकर, सुनवाई कर और आदेश जारी कर निष्कासन की प्रक्रिया पूरी करे।
  • यह प्रक्रिया सामान्य दीवानी व किराया नियंत्रण कानूनों की तुलना में कहीं अधिक त्वरित और सरलीकृत है।
  • फैसले के मुख्य बिंदु

शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि जहां पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट लागू होता है, वहां राज्य के किराया नियंत्रण कानूनों के प्रावधान प्रभावी नहीं होंगे। इससे एलआईसी, राष्ट्रीयकृत बैंक और अन्य सरकारी कंपनियों को अब उन किरायेदारों या कब्जाधारियों को हटाने में आसानी होगी जिनका अनुबंध खत्म हो चुका है या जो अनधिकृत रूप से संपत्ति पर कब्जा किए बैठे हैं।

अदालत ने माना कि भले ही राज्य कानून किरायेदारों को निष्कासन से बचाने के लिए बनाए गए हों, लेकिन सरकारी संपत्ति के मामले में सार्वजनिक हित और सरकारी स्वामित्व को प्राथमिकता दी जाएगी।



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